इंटरव्यू जरा हटके / बजट ने खोला वित्त मंत्रालय में बनने वाले हलवे का राज



interview zara hatke on budget 2019
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interview zara hatke on budget 2019

Dainik Bhaskar

Jul 06, 2019, 05:27 PM IST

प्रतीक गौतम. चारों तरफ बजट का शोर सुन रिपोर्टर चौकन्ना था। बजट पेश हुआ और पेश होते ही रिपोर्टर ने उसे धर लिया।

 

रिपोर्टर: बिना हमें कन्फ्यूज किए यह बताओ कि तुम हर साल आ काहे जाते हो, पता है मीडिया लाइन में काम कितना बढ़ जाता है? 
बजट: हम तो जनता की सुविधा के लिए आते हैं? 

 

रिपोर्टर: वो कैसे? 
बजट: जनता हर दिन नेताओं को संसद में लड़ता देखती है, नहीं तो सोता देखती है। हम आते हैं तो माहौल अलग हो जाता है 

 

रिपोर्टर: संसद में बिल भी पास होते हैं, तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि तुम्हीं इतने अलग हो? 
बजट: क्योंकि बजट में पैसे हैं, बाकी दिन एक जैसे हैं। बिल्स पास होते है, हम पेश होते हैं। समझ आया अंतर? 

 

रिपोर्टर: लोगों को तुमसे उम्मीदें बहुत रहती हैं, तुम्हें भी कुछ उम्मीद रहती है? 
बजट: रहती है न, ये उम्मीद कि इस बार पेश होते टाइम पिछली बार से कितने शेर ज्यादा सुनने को मिलेंगे। 

 

रिपोर्टर: अच्छा एक सीक्रेट बात बताओ, ये जब बजट प्रिंट होता है तो वित्त मंत्रालय में हलवा क्यों बनता है? 
बजट: वो तो वित्त मंत्री का बाकी नेताओं को संदेश होता है कि इतनी देर तक खड़े रहकर बजट पढ़ना कोई हलवा नहीं है। 

 

रिपोर्टर: पहले तो तुम अकेले ही आया करते थे, अब ये रेल बजट के साथ क्यों आते हो? 
बजट: रेलवे वालों की एडजस्ट करने की आदत है। जनरल का डिब्बा दिखाकर सबको मना लिया कि जब यहां इतने लोग आ सकते हैं, तो आम बजट के साथ रेल बजट क्यों न आ जाएगा? 

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