हैप्पीक्रेसी / 'कुत्र मोह' में कटखनी आत्माएं!



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Dainik Bhaskar

Nov 16, 2019, 05:32 PM IST

राजीव निगम. पुत्र मोह तो आपने सुना ही होगा, लेकिन इन दिनों कुत्र मोह से भी लोग ग्रसित हैं। कुछ लोग कुत्ते से इतना प्रेम करते हैं कि आप उन्हें कुछ भी कह दो चलेगा। लेकिन उनके कुत्ते को कुत्ता कह दिया तो ऐसा लगता है लपक के काट ही लेंगे। अच्छा, कुत्ता कुछ नहीं बोलता है क्योंकि किसी और को पता हो न हो कुत्ते को तो पता होता है कि वो कुत्ता है। मैडम लोगों में कुत्र मोह ज्यादा ही होता है। उनका खुद का बच्चा कामवाली की गोद में होगा लेकिन कुत्ते को अपनी गोद में मेला बच्चा, मेला छोना बाबू करती रहती है। कुछ मरियल टाइप सिंगल चेचिस वाले लोग हट्टा कट्टा तंदुरुस्त कुत्ता पाल लेते हैं। सुबह-सुबह जब ये उसको टहलाने लेकर निकलते हैं तो पता करना मुश्किल हो जाता है कि इसमें से मालिक कौन है। कौन किसको टहला रहा है। कमाल की बात यह है जिसको ठीक से एबीसीडी भी नहीं आती, उसको भी अंग्रेजी का इतना प्रबल ज्ञान हो जाता है कि वो घंटों कुत्ते के साथ अंग्रेजी में डिबेट करता रहता है। यहां लोग अंग्रेजी पढ़ाने-लिखाने के बाद भी ढंग से अंग्रेजी बोलना तो दूर, समझ भी नहीं पाते तो ये कुत्ता पता नहीं किस यूनिवर्सिटी से इंग्लिश की डिग्री लेकर आता है कि अंग्रेजी समझ लेता है। मैंने आजतक किसी को कुत्ते से उर्दू, भोजपुरी या पंजाबी में बात करते नहीं सुना।

 

कुछ कुत्तों की किस्मत ऐसी होती है कि उन्हें घर में राज्य मंत्री का दर्ज़ा प्राप्त होता है। घर के सोफे से लेकर बेड तक कहीं भी सो सकता है। कार में सबसे पहले बैठेगा। घर आए हुए मेहमानों को पहले उसको हाय हेलो कहना होगा। मुझे लगता है कि कुछ लोग सिर्फ इसलिए कुत्ता पालते हैं कि घर में उनकी भी कोई इज़्ज़त कर सके। जैसे ही वो घर में घुसते है, भौं भौं करके उनसे लिपट जाता हैं, उनको प्यार से चाटता है। पूंछ हिलाता है। मतलब उनका पूरा स्वागत करता है। कुछ कुत्ते तो मालिक के ऊपर ऐसे चढ़ जाते हैं जैसे बुमराह विकेट लेने के बाद कोहली के ऊपर चढ़ जाता है। कुत्ते का चूमना, चाटना और लिपट जाना मालिक को तो अच्छा लगता है, लेकिन उसकी क्या हालत होती होगी जो किसी काम से उस घर में आया है। कुत्ता उसकी अकेले मॉब लिंचिंग टाइप कर देता है। उस दिन मैं बॉस के घर गया। कुत्ता घर पर ही था। जी हां, मैं कुत्ते की ही बात कर रहा हूं। बॉस तो घर पर नहीं था। जैसे ही घंटी दबाई। दरवाजा खुला।

 

उसने मेरे ऊपर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। मैं चिल्लाता रहा, शेरू नहीं नहीं, काटना नहीं। तबतक वो ऑटोग्राफ दे चुका था। पीछे से मैडम आकर बोली, टाइगर सिट डाउन। तब वो शांत हुआ। मुझे समझ नहीं आया कि वो मेरी हिंदी नहीं समझ पाया या फिर हिंदी बोलने की वजह से गुस्से में आ गया था।

 

वैसे तो कुत्ता सिर्फ भौंकता ही है, लेकिन नए आदमी को क्या पता कि वो अंग्रेजी में भौंक रहा है या हिंदी में। वैसे कुछ भी हो, कुत्ता हमें बहुत कुछ सिखाता है। भले ही मालिक के बंगले में रहता है, खाता है। लेकिन अपनी मातृ भाषा नहीं छोड़ता है, भले ही उससे कोई अंग्रेजी में बोले या हिंदी में। वो जवाब में सिर्फ भौंकता है। लेकिन कुत्र मोह में डूबे लोग ये नहीं समझ पाते हैं। धन्य है ये कुत्र मोह वाले लोग!

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