इंटरव्यू जरा हटके / 'रडार ही नहीं, आलसी कर्मचारी भी रुक जाते हैं'



special interview with Cloud on Radar
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special interview with Cloud on Radar

  • बादलों से नॉन-पॉलिटिकल बातचीत

May 18, 2019, 05:48 PM IST

प्रतीक गौतम. ऐसा पहली बार हुआ कि गर्मी के मौसम में बादलों के चर्चे हो रहे थे। हमारे एक नेता ने बताया कि बादलों की आड़ में रडार से बचा जा सकता था। तो रिपोर्टर ने बादलों तक का सफ़र तय कि या और उनसे बात कर डाली। आप भी सुनिए :

 

रिपोर्टर- मानसून के पहले ही आप राजनीति में आ गए, कैसा लग रहा है?
बादल- बहुत अच्छा लग रहा है, वरना हम बादल तो फ़िल्मी गानों में ही खर्च हो रहे थे।

 

रिपोर्टर- इतनी लाइमलाइट में आने के बाद कुछ बदला है?
बादल- अरे बदला ही बदला है। हम बादलों के कारण ही तो ‘बदला’ पूरा हुआ है।

 

रिपोर्टर- वैसे रडार के अलावा और किन-किन चीजों को रोक लेते हैं?
बादल- आलसी कर्मचारी को दफ्तर जाने से, होमवर्क पूरा न हो तो बच्चे को स्कूल जाने से।

 

रिपोर्टर- लेकिन ये सब आपने शुरू कब किया था?
बादल- बचपन में मैं एंटीने के सिग्नल रोक दिया करता था, बड़ा होकर रडार रोकने लगा।

 

रिपोर्टर- पर ये क्या साइंस है कि बादलों के बीच जहाज उड़े और किसी को पता नहीं चले?
बादल- आपके यहां बादल छाते हैं तो आप क्या करते हैं?

 

रिपोर्टर- अंदर छुप जाते हैं, ताकि बूंदों से भीग न जाएं।
बादल- बस यही साइंस है। जब इंसान बादलों से डर जाए तो रडार की क्या मजाल?

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