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घातक कथाएं / बंदर का कलेजा और मगरनी की सौतन कथा...



stories of humour and moral science full of common sense
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stories of humour and moral science full of common sense

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 01:10 PM IST

कथा पुरानी-वक्त नया है। छलछंद झील के किनारे भैरंटबुद्धि नामक एक बंदर रहता था। उसकी दोस्ती उसी झील में रहने वाले कंटापप्रसाद `विकट` नामक मगरमच्छ से थी। कंटापप्रसाद रोज धूप सेंकने के लिए किनारे आ बैठते थे। भैरंटबुद्धि भी डाल पर आसन जमा लेते थे। दोनों दुनिया जहान की बातें करते। लौटते समय भैरंटबुद्धि कंटापप्रसाद को पके जामुनों से भरा एक थैला देते जिसे कंटापप्रसाद अपनी पत्नी को ले जाकर खिलाते। ऐसा चलता रहा।

 

आगे की कहानी तो आपको पता ही है। एक बार कंटापप्रसाद की पत्नी को जामुन खाते-खाते ख्याल आया कि जो बंदर रोज इतने मीठे जामुन खाता होगा, उसका कलेजा भी बहुत मीठा होगा। क्यों ना एक बार उसका `कीमा कलेजा` खाया जाए। कंटापप्रसाद ने दोस्ती वगैरह की दुहाई दी। लेकिन मगरनी पीछे पड़ गईं। थक-हारकर एक दिन कंटापप्रसाद ने भैरंटबुद्धि से कहा- यार, तेरी भाभी तुझे देखना चाहती है। तू मेरे साथ चल। भैरंटबुद्धि उनकी पीठ पर बैठकर चल दिए। जब दोनों झील के बीचोंबीच पहुंचे तो कंटापप्रसाद ने उन्हें अपना मकसद बताया। 

 

भैरंटबुद्धि ने डाल-डाल डोलने का अनुभव एकट्ठा कर रखा था। बिना घबराए उसने कंटापप्रसाद से कहा- ओहो...मित्र इतनी सी बात... मुझे भाभी के पास जल्दी ले चलो। कंटापप्रसाद तुरंत उसे लेकर मगरनी के पास पहुंचे। भैरंटबुद्धि ने मगरनी को नमस्कार कर मधुर स्वर में कहा- भाभीश्री, मेरा सौभाग्य आपके काम आ सका। जब कंटाप भैइया ने आपकी इच्छा के बारे में बताया तो मैं खुद पेड़ पर टंगा अपना कलेजा गिफ्ट पैक में रखकर आपके लिए लाया था। रास्ते में भैइया 10 मिनट को कहीं रुके और वो गिफ्ट पैक आपके जैसी ही दिखने वाली किसी को सौंप दिया था। मुझे कहा कि पेड़ पर कलेजा भूल आया हूं, ऐसी कहानी सुना दूं। भाभी आप हैं तो वो कौन थी? 

 

कंटापप्रसाद से खूंखार पूछताछ चली। खुद मगरनी भैरंटबुद्धि को लेकर `उसे` खोजने निकलीं। अपने पेड़ के पास पहुंचने पर 'ऊपर से देखता हूं' कहकर भैरंटबुद्धि कूदकर डाल पर चढ़ गए। अब भैरंटबुद्धि अपनी खैर मनाते हैं। कंटापप्रसाद रोज सफाई देते हैं। मगरनी आज भी सौतन की खोज में लगी हैं। 

 

मॉरल ऑफ द स्टोरी : घोर विपत्ति में रॉकेट साइंस टाइप किसी आइडिए की खोज करने की जगह कॉमन सेंस बनाए रखें। 

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