घातक कथाएं / शोकेस और 'चीतूप्रसाद' की दुखभरी कहानी



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Dainik Bhaskar

Oct 20, 2018, 03:30 PM IST

एक समय की बात है। घनघोर नामक जंगल में चीतूप्रसाद "खतरू' नामक चीता निवास करता था। उसके खानदान में एक से एक फर्राटा चीते हुए थे। चीतू को भी लगता था कि वो भी दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला चीता है। कई बार यूट्यूब पर अपने खानदान के चीतों और वर्ल्ड चैंपियन उसेन बोल्ट की दौड़ के तुलना वाले वीडियो देखकर खुश होता। बोल्ट की दुर्गति देखकर दो कुलांचे भरता। लौटता। फिर फर्राटा मार देता। दिन बीत रहे थे।

 

उसी जंगल में परम दुष्ट टाइप कुछ जानवर भी रहते थे। वे हर जानवर के चाल-चलन पर विशेषज्ञ राय देते थे। हर आगे बढ़ने वाले की टांगों पर लिपटकर उसे धूल में मिला देते थे। वे चीतूप्रसाद के दिमाग में भी उसकी क्षमताओं को लेकर शक पैदा करते रहते थे। वे उसे बताते- भाई तेरी रफ्तार तो ठीक है, लेकिन नजदीक के जंगल में गतिमान सिंह "सुपरसोनिक' नाम का चीता तो 400 किमी की रफ्तार से 3 सियार और 2 तेंदुओं को एक बार में ही दबोचकर कंकाल बना देता है। अभी तू कच्चा है। तेरी रफ्तार में गच्चा है। छोटे जानवरों का ही पीछा करके पकड़ पाता है। उनकी बातें सुनकर चीतू निराशा के गर्त में गिर जाता था।

 

कई दिनों तक सुनने के बाद चीतू के दिमाग में एक तरीका आया। उसने एक शोकेस बनवाया। फिर उसे लेकर घूमने लगा। अब वो सिर्फ बड़े जानवरों को मारता, उनकी मुंडी इसी शो केस में सजा लेता। कुछ ही दिनों में शोकेस बहुत भारी हो गया। उसमें 20-30 मुंडियां जमा हो गईं। इस शोकेस को हर जगह ढोते रहने के कारण चीतू की स्पीड बहुत स्लो हो गई। इस रफ्तार से वो सिर्फ छोटे जानवरों को ही मार पाने की स्थिति में पहुंच गया। वह जिन परम दुष्ट टाइप जानवरों की बातों को गलत साबित करना चाहता था, उन्हीं की बातों का आसान शिकार हो गया।

 

मॉरल ऑफ द स्टोरी : दूसरों की बातों में मत आओ, जरा अपनी अकल लगाओ। अपनी अकल लगाता तो गतिमान सिंह "सुपरसोनिक' की सुपारी दे देता। 

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