सर्वे / 86 फीसदी भारतीय मानते हैं वर्कप्लेस पर झपकी लेने से कार्यक्षमता बढ़ती है

86% of Indians feel napping at work can improve productivity say a online survey
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86% of Indians feel napping at work can improve productivity say a online survey

  • ऑनलाइन रिसर्च स्टार्टअप वेकफिट ने 1500 लोगों पर किया सर्वे, नाम दिया राइट टू वर्क नैप्स
  • सर्वे के मुताबिक, कार्यस्थल पर नींद दूर करने के लिए मुंह धोते हैं या चहलकदमी करते हैं भारतीय

दैनिक भास्कर

Aug 21, 2019, 11:52 AM IST

हेल्थ डेस्क. भारतीयों को नींद लेना बेहद पसंद है, हालिया सर्वे में यह बात सामने आई है। ऑनलाइन रिसर्च स्टार्टअप वेकफिट के सर्वे के मुताबिक, 86 फीसदी भारतीयों का मानना है कि कार्यस्थल पर झपकी लेने से कार्यक्षमता में इजाफा होता है। सर्वे का नाम राइट टू वर्क नैप्स रखा गया था और इसमें 1500 लोगों को शामिल किया गया था। 

70 फीसदी ने कहा, ऑफिस में होना चाहिए नैप रूम

सर्वे के मुताबिक, 70 फीसदी लोगों का मानना है ऑफिस में सोने के लिए कमरा (नैप रूम) होना है चाहिए जहां वे कुछ समय के लिए झपकी ले सकें। ऐसा न होने का सीधा असर उनकी कार्य क्षमता पर पड़ रहा है। सर्वे में सामने आया है कि 41 फीसदी लोग अधूरी नींद से जूझ रहे हैं।

सर्वे में जांचा गया कि कैसे ऑफिस में काम को लेकर होने वाली बेचैनी का असर उनकी नींद पर पड़ता है। कार्यस्थल पर नींद से बचने के लिए भारतीय या तो अपना चेहरा धोते हैं या सहकर्मियों से बात करना शुरू करते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो थोड़ी देर चहलकदमी करके नींद दूर करते हैं। ऐसे मामलों में कमी लाने और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए लोगों ने वर्कप्लेस पर नैप रूम बनाने की वकालत की है। 

मार्केट रिसर्च फर्म केजेटी और फिलिप्स के एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि नींद लेने के मामले में भारतीयों ने चीन, सउदी अरब के लोगों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस सर्वे में 12 देशों के 18 और इससे अधिक उम्र के 11006 लोगों पर किया गया है। सर्वे में सामने आया कि दुनियाभर के 62 फीसदी लोगों को रात में नींद नहीं आती लेकिन भारतीय पूरी नींद लेने के मामले में भारतीय अव्वल हैं। 

फिलिप्स ग्लोबल स्लीप सर्वे 2019 के मुताबिक, कनाडा और सिंगापुर ऐसे देश हैं जहां नींद न आने का सबसे बड़ा कारण तनाव है। अनिद्रा की वजह लाइफस्टाइल का व्यवस्थित न होना है। सर्वे में नींद न आने के पांच कारण गिनाए गए हैं। इनमें  तनाव (54 %), सोने की जगह (40 %), काम और स्कूल का शेड्यूल (37 %), एंटरटेनमेंट (36 %) और स्वास्थ्य की स्थिति (32 %) शामिल है।

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