ग्लोबल वॉर्मिंग का असर / सिकुड़ रहा फिलीपिंस का गांव, सालों से चर्च में सभा नहीं, लहरों से लड़ते हुए बच्चे पहुंच रहे स्कूल

A village in the Philippines was held due to global warming
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  • स्थानीय निवासी फिलीपिन्स सरकार पर बना रहे दबाव, गांव का मुद्दा जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में उठाया जाए

Dainik Bhaskar

Nov 30, 2019, 07:37 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. फिलीपिन्स की राजधानी मनीला से 17 किमी दूर गांव सिटियो परिहान चर्चा में है। गांव का का दायरा घट रहा है।  ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण जलस्तर बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि चलने के लिए जमीन बमुश्किल नसीब होती है। बच्चे नाव के जरिए स्कूल जाते हैं। जल स्तर बढ़ने की वजह से गांव हर साल 4 सेंटीमीटर घटता जा रहा है। यहां इसका असर सबसे ज्यादा गरीब समुदायों पर दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन 2-13 दिसंबर से मैड्रिड में आयोजित किया जाएगा। समिट में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग और यूरोप की बाढ़ को प्रमुखता से शामिल किया जाना है। फिलीपिन्स की जनता सरकार पर दबाव बना रही है कि सिटियो परिहान का मुद्दा भी समिट उठाया जाए। लोगों में सरकार के प्रति रोष है।

 

नहीं बचा पीने लायक पानी

  • सिटियो परिहान गांव में भू-जल भी नहीं बचा है और अब पीने के लिए पूरा गांव एक कुएं पर निर्भर है। ज्यादातर घर पानी में डूबे हुए हैं। बिजली के खंबे नहीं लग पाए हैं। छतों पर लगे सोलर पैनल से बिजली बनाई जा रही है। यहां के लोग अपने घरों से तभी निकलते हैं जब कोई जरूरी काम हो। बाकी समय घर पर बिताना इनकी मजबूरी हो जाती है। 

  • पानी भरा होने के कारण चर्च में प्रर्थना सभा का आयोजन नहीं जा रहा है। गांव के हालात 2011 में आए टायफून नेसात तूफान के बाद से ज्यादा खराब होने लगे हैं। इस तूफान में उठी समुद्री लहरें काफी ऊंची थीं, जिस वजह से घर, स्कूल और कई सरकारी इमारतें तबाह हो गईं। तूफान के बाद 50 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ दिया। 

  • यहां रहने वालों को जिंदगी गुजर करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। समुद्री जीव यहां का मुख्य भोजन है। जो लोग यहां बच गए वो इसलिए लिए ये जगह नहीं छोड़कर जाना चाहते क्योंकि उन्होंने यहां जीना सीख लिया है। उन्हें डर है कि अगर वो शहर की तरफ गए तो भीख तक मांगनी पड़ सकती है।

नाव के बिना जिंदगी की कल्पना नहीं

  • यहां रहने वाली 16 साल की डेनिका मार्टीनेज बताती हैं, मैं रोज सुबह अपने भाई-बहनों के साथ नाव से स्कूल जाती हूं। स्कूल पहुंचने में मुझे 30 मिनट का समय लगता है। समुद्र में उठती तेज लहरों की वजह से कभी-कभी मैं पूरी तरह से भीग जाती हूं। यहां रहना बेहद मुश्किल है लेकिन हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। यहां रहना खतरे से भरा है लेकिन अब हमें आदत हो गई है। बिना नाव के यहां रहने की कल्पना नहीं की जा सकती है। 

  • डेनिका की मां मेरी जेन मार्टीनेज समुद्री जीव बेचने का काम करती हैं, जिन्हें उनके पति पकड़ते हैं। वह बताती हैं, यहां रहना दिन-ब-दिन तकलीफ देह होता जा रहा है। लेकिन शहर में जाकर बसना और नए सिरे जिंदगी शुरू करना संभव नहीं है। इसलिए हम गांव नहीं छोड़ पा रहे हैं।

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