रिसर्च / एक व्यक्ति साल में प्लास्टिक के 73 हजार कण निगल रहा, समुद्री जीव और बोतलबंद पानी है वजह



Average person accidentally ingests more than 73000 pieces of microplastics every year
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Average person accidentally ingests more than 73000 pieces of microplastics every year

  • ऑस्ट्रिया की मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियना के मुताबिक- एक दिन में एक इंसान माइक्रोप्लास्टिक के 200 टुकड़े निगल जाता है, आंतों में फैल रहा संक्रमण
  • शोध में बताया गया- प्लास्टिक के महीन कण शरीर में पहुंचकर जहरीले रसायन में तब्दील हो सकते हैं

Dainik Bhaskar

Sep 04, 2019, 08:05 AM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. एक इंसान सालभर में 73 हजार प्लास्टिक के बारीक कण निगल रहा है। यह खुलासा ऑस्ट्रिया की मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियना ने अपनी एक रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इंसान के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंचने का सबसे बड़ा जरिया समुद्री जीव हैं, जिसे भोजन के रूप में लिया जा रहा है। यह प्लास्टिक आंतों को संक्रमित कर रहा है।
 

प्रति दस ग्राम मानव मल में 20 माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े मिले

  1. प्रमुख शोधकर्ता डॉ. फिलिप श्वॉबल का कहना है कि एक दिन में एक इंसान माइक्रोप्लास्टिक के 200 टुकड़े निगल जाता है। एक वर्ष साल में यह आंकड़ा 73,000 के बराबर हो जाता है। बोतलबंद पानी के अलावा समुद्री जीवन भी इनका जरिया हैं। दरअसल जीव समंदर में फेंका गया कचरा खा जाते हैं और बाद में यही हमारी थालियों में पहुंचते हैं। शोधकर्ताओं को औसतन प्रति दस ग्राम मानव मल में 20 माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े मिले।

  2. शोधकर्ता डॉ. फिलिप के मुताबिक, पहली बार मानव मल का अध्ययन शरीर में पहुंची प्लास्टिक की मात्रा का पता लगाने में किया गया है। शोधकर्ता लंबे समय से इसकी जांच कर रहे थे कि आखिरकार प्लास्टिक मानव शरीर में पहुंचता कैसे हैं? शोध में यह बात स्पष्ट हुई है। रिसर्च में बताया गया है कि ये प्लास्टिक के महीन कण शरीर में पहुंचकर जहरीले रसायन में तब्दील हो सकते हैं। ये रक्त प्रवाह में मिलकर लिवर समेत शरीर के कई हिस्सों में पहुंचते हैं। 

  3. डॉ. फिलिप के मुताबिक, मल में माइक्रोप्लास्टिक मिलने के लिए प्लास्टिक की बोतलें काफी हद तक जिम्मेदार हैं। वैज्ञानिकों की टीम ने प्लास्टिक के सात अन्य रूपों का भी पता लगाया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे शरीर में पहुंचने के कई और भी स्रोत हैं। कुछ लोग प्रदूषित हवा सांस लेने रहे हैं है। ये कण धूल में भी मौजूद हैं। माइक्रोप्लास्टिक्स का आकार 5 मिमी से भी कम है। 

  4. दुनियाभर में प्लास्टिक के उत्पादन में साल दर साल तेजी से इजाफा हो रहा है। यह शोध मांसाहार का सेवन करने वालों पर किया गया है। रिपोर्ट में सामने आया है समुद्री जीव जैसे ट्यूना फिश, झींगा मछली से माइक्रोप्लास्टिक के कण शरीर में पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ सालों में माइक्रोप्लास्टिक्स समुद्री पानी, भोजन, हवा और पीने के बोतलबंद और नल के पानी में भी पाया गया है।

  5. पिछले महीने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे रोकने की पहल की थी। संगठन ने पेयजल से माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने वाले पर इंसान में होने वाले खतरों का विश्लेषण किया है। डब्ल्यूएचओ ये पता लगाएगा कि सबसे अधिक सूक्ष्म टुकड़े कहां से आ रहे हैं और पीने के पानी में इन्हें जाने से कैसे रोका जा सकता है। 

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