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लड़कों से बॉक्सिंग करके निखारा अपना खेल

एक वर्ष पहले
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लाइफस्टाइल डेस्क. निखत जरीन भारत में फीमेल बॉक्सिंग में अपनी पहचान बनाने वाली उन गिनी चुनी खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने बेहद कम समय में लंबी छलांग लगाई है। निखत अभी सोने से कुंदन बनने की उस प्रक्रिया में हैं, जिसमें उनका खेल के प्रति पागलपन उन्हें और आगे बढ़ा रहा है। इसमें उनके पिता मोहम्मद जमील अहमद पिता के साथ-साथ गुरु की भूमिका में रहकर पूरा सपोर्ट कर रहे हैं। पिता निखत की डाइट का ख्याल रखते हैं।
 
निजामाबाद(तेलंगाना) में जन्मी निखत ने 13 साल की उम्र में बॉक्सिंग खेलना शुरू किया था। इससे पहले वह एथलेटिक्स में रुचि रखती थीं। वह 100 मीटर और 200 मीटर रनिंग करती थीं। शुरू में उनके मन में प्रोफेशनल बॉक्सिंग खेलने जैसे ख्याल नहीं थे। आठवीं में पढ़ने वाली निखत निजामाबाद के कलेक्टर ग्राउंड में हो रहे अरबन गेम्स खेलने गईं थीं। वहां सारे गेम्स में लड़कियां थी, लेकिन बॉक्सिंग में किसी भी महिला खिलाड़ी को ना देखकर उन्होंने अपने पिता से पूछा कि इस खेल में क्यों कोई भी लड़की नहीं है। पिता का जवाब था, ‘शायद लड़कियां मार खाने या मारपीट‌वाले खेल में आने से डरती हैं।’

बस यहीं से बचपन से जिद्दी स्वभाव की निखत को इस खेल में आने की जिद लग गई। रियल एस्टेट एजेंट पिता ने अपने काम से ध्यान हटाकर अपनी बेटी को सही ट्रेनिंग दिलवाने पर पूरा ध्यान लगाया। हैंडबॉल के कोच अनवर ने निखत के खेल के बारे में पहचाना। उन्होंने निखत के पिता को खेल के फील्ड में आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने निखत को बेसिक ट्रेनिंग दी। इसके बाद कोच शमशम ने उन्हें ट्रेनिंग दी। दो-ढाई महीने की ट्रेनिंग के बाद स्टेट में चौथे नंबर पर आ गईं। इसके बाद उन्होंने स्टेट मैडल जीता। पांच महीने की ट्रेनिंग करने के बाद वह पंजाब गईं, उस वक्त 14 साल की निखत ने अंडर 18 में अपने से 4 साल बड़े बॉक्सर्स को हराकर ब्रॉन्ज मैडल जीता। 2010 में तमिलनाडु के इरोड में आयोजित नेशनल्स में गोल्डन बेस्ट बॉक्सर का खिताब जीता। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कोच द्रोणाचार्य अवॉर्डी आईवी राव ने उन्हें ट्रेनिंग दी।

निखत ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और नेशनल कैंप में ट्रेनिंग से पहले हैदराबाद के निजाम कॉलेज में ट्रेनिंग ली। यहां आमतौर पर अपोनेंट्स के रूप में, वो भी बॉक्सिंग जैसे खेल में लड़कियां नहीं होती थीं। ऐसे में निखत लड़कों के साथ ही ट्रेनिंग करतीं थी। इस दौरान उन्हें कई बार चोट भी लगी। निखती कहती हैं कि कुछ बनना है, तो मार खानी पड़ती है। वह उदाहरण सेट करना चाहती हैं, ताकि बॉक्सिंग जैसे खेल में भी लड़कियां आएं।
 

मैरी कॉम हैं रोल मॉडल, उनसे फाइट के लिए किया मेल
निखत जरीन मैरी कॉम को अपनी रोल मॉडल मानती हैं। मैरी कॉम पहले 48 किलोग्राम वेट कैटेगरी में खेलती थीं, लेकिन अब वह 51 किलोग्राम कैटेगरी में खेल रही हैं। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप के सिलेक्शन ट्रायल में 36 साल की मैरी कॉम ने 23 साल की निखत से फाइट करने के इंकार कर दिया। मैरी के अनुसार सीनियर होने के नाते उन्हें ट्रायल देने की जरूरत नहीं है। हालांकि निखत ने इसके खिलाफ फेडरेशन को ईमेल लिखकर शिकायत की है।

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