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परिवर्तन / समुद्री तापमान बढ़ने से शार्क भटक रही अपनी दिशा, ज्यादातर दाईं ओर तैर रहीं



Climate change is making sharks right handed Australian scientists say
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Climate change is making sharks right handed Australian scientists say

  • ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का दावा- समुद्र का तापमान बढ़ने से उनके व्यवहार में बदलाव हो रहा 
  • जलवायु गर्म होने से शार्क के ब्रेन के विकास और कार्यक्षमता पर भी असर

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 08:42 AM IST

हेल्थ डेस्क. जलवायु परिवर्तन समुद्री जीवों के लिए बड़ा खतरा बन रहा है। इसका असर शार्क मछलियों पर भी पड़ रहा है। बढ़ते तापमान के कारण शार्क अपना रास्ता भटक रही हैं। यह दावा ऑस्टेलियाई वैज्ञानिकों ने किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, समुद्र का तापमान बढ़ने से शार्क के तैरने की दिशा पर फर्क पड़ रहा है। नतीजतन वे सिर्फ दाईं ओर ही तैर रही हैं। जर्नल सिमेट्री में यह शोध प्रकाशित किया गया है।

रिसर्च से जुड़ी खास बातें

  1. शोधकर्ता ने यह अध्ययन शार्क की पोर्ट जैक्सन प्रजाति पर किया है। यह दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के तटीय क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती हैं। इनके तैरने की दिशा में बदलाव क्यों हो रहा है, इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया।

  2. शोधकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट से पोर्ट जैक्सन शार्क के अंडे इकट‌्ठे किए। इन्हें अलग-अलग गर्म टैंक में रखा। पहले 12 अंडों को एक टैंक में रखा। इसका तापमान 20.6 डिग्री तय किया। शेष 12 अंडों को 23 डिग्री तापमान वाले टैंक में रखा। 

  3. एक महीने तक चले शोध में पाया गया कि अंडों से निकलने वाली 50 फीसदी मछलियों की मौत हो गई थी। जो जिंदा रह गई थीं, वे सिर्फ दाईं ओर ही तैरना चाह रही थीं।

  4. शोधकर्ताओं ने पाया कि तापमान में बढ़ोतरी होने पर उनमें उम्मीद से ज्यादा बदलाव देखे गए। उनके तैरने के अंदाज को और भी बेहतर तरीके से समझने के लिए जिंदा बचीं शार्क को वाय (Y) आकार के टैंक में छोड़ा। सामान्य तापमान पर शार्क ने दाईं ओर ही तैरना जारी रखा।

  5. शोधकर्ताओं का कहना है कि समुद्र के बढ़ते तापमान ने शार्क के सोचने की क्षमता से ज्यादा उनके पूरे दिमाग पर गहरा असर छोड़ा है। जलवायु परिवर्तन से दुनियाभर के समुद्र में तेजी से बदलाव आ रहा है।

  6. रिपोर्ट के मुताबिक, तापमान बढ़ने से शार्क के तैरने के साथ उनके व्यवहार में भी बदलाव दिख रहा है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि जलवायु गर्म होने से उनके ब्रेन के विकास और इसकी कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

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