अलार्मिंग / कीटनाशक का बढ़ता इस्तेमाल मधुमक्खियों के लिए बन रहा जहर, घटी संख्या



american researcher says Commonly used pesticides have turned honey bees habitats into a toxic world
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american researcher says Commonly used pesticides have turned honey bees habitats into a toxic world

  • पिछले दो दशक में कीटनाशकों का इस्तेमाल 48 गुना तक बढ़ा, नियोनिकोनॉयड्स सबसे खतरनाक
  • सस्ता होने के कारण वर्तमान में नियोनिकोनॉयड्स का इस्तेमाल खेती में अधिक हो रहा

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2019, 12:31 PM IST

साइंस डेस्क. खेती में बढ़ता रसायनों का प्रयोग मधुमक्खियों के लिए जहर का काम कर रहा है। हालिया रिसर्च में इसका खुलासा हुआ है। अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि कीटनाशक में मौजूद नियोनिकोटिनोयड्स मधुमक्खियों के लिए विषैला साबित हो रहा और उनकी संख्या घटा रहा है। इसकी शुरुआत 2004 से हुई थी।

 

ऐसे कीटनाशक के छिड़काव के बाद पौधे में निकले फूलों से जब मधुमक्खी परागण करती हैं तो यह उसमें पहुंच जाता है और जानलेवा हो जाता है। इनकी संख्या घटने से फसल उत्पादन गिरेगा और किसानों के लिए आर्थिक संकट पैदा होगा।

सस्ते कीटनाशक का प्रयोग बढ़ा

  1. पीएलओएस जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, पिछले दो दशक में कीटनाशकों का इस्तेमाल 48 गुना तक बढ़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले कीटनाशकों में ऑर्गेनोफॉस्फेट का इस्तेमाल किया जाता था जिसका असर अन्य कीटनाशकों की तुलना में लंबे समय तक रहता था। लेकिन वर्तमान में सस्ता होने के कारण नियोनिकोनॉयड्स का इस्तेमाल खेती में बढ़ गया है।

  2. वर्तमान में ऐसे बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिन पर पहले से ही कीटनाशक रसायनों की पर्त चढ़ी होती है। जब ये पौधे बनते हैं तो इनके हर हिस्से में ये रसायन मौजूद होते हैं पराग में भी। जिसका इस्तेमाल मधुमक्खी परागण के दौरान करती है। 

  3. चीन में हुई एक रिसर्च में भी ऐसे कीटनाशकों से मधुमक्खियों की मौत की बात सामने आई है। चीन में एडजुवेनट्स नाम का रसायन कीटनाशकों में डाला जाता है जिसके कारण मधुमक्खियों की बड़े पैमाने पर मौत हो सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, नियोनिकोटिनोयड्स कीटों के लिए बेहद जहरीला रसायन है। जो कुछ क्षेत्रों में इनकी संख्या 90 फीसदी तक घटा रहा है। 

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