ट्रैवेलॉग / चाय के बागान और मसालों के पेड़ से सजा है मुन्नार, मन को तरोताजा कर देती हैं यहां की वादियां और खुशबू



enjoy fragrance of tea and spices of munnar a monsoon travel destination places to visit munnar
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enjoy fragrance of tea and spices of munnar a monsoon travel destination places to visit munnar

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2019, 06:30 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. मानसून में मुन्नार की वादियों में घुली चाय और मसालों की खुशबू मन को मोह लेती है। यह मन को सुकून देने के साथ तरोताजा कर देता है। फ्रिक्वेंट ट्रेवलर डॉ. अतुल नाहर मुन्नार की खूबसूरती देखने पहुंचे। जानिए उनको कैसा लगा मुन्नार…

प्रकृति के नए रूप-रंग से सराबोर हुए

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    रोज की आपाधापी की जिंदगी से समय निकालकर हम निकल पड़े बेंगलुरु से कोच्चि और मुन्नार की यात्रा पर। दरअसल पर्यटन मन को सुकून देता है। इससे मन-मस्तिष्क तरोताजा हो जाता है और नया कार्य करने की प्रेरणा भी मिलती है। अपनी यात्रा के दौरान हमें यही महसूस हुआ।

    हम कोच्चि एयरपोर्ट पर उतरे। वहां से टैक्सी द्वारा मुन्नार पहुंचे। सुबह की पहली किरण जब पड़ी तो ऐसा लगा मानो ये किरणें हमारा स्वागत कर रही हों। जैसे ही हम मुन्नार पहुंचे मुंह से सिर्फ यही शब्द निकला, वाह...। हमने वहां कोको पाउडर के पेड़ देखे। जगह-जगह चॉकलेट की दुकानें देखीं। काली मिर्ची लौंग- इलाइची एवं काजू के पेड़ देखे। मुन्नार में जगह-जगह मसालों की दुकानें काफी हैं। यहां के लोग भी शांतिप्रिय और मेहनती हैं। यहां जाएं तो जगह-जगह आपको नारियल के पेड़ देखने को मिलेंगे।
     

  2. रोज गार्डन है खास

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    हमने वहां का रोज गार्डन भी देखा। यहां मौजूद गुलाब के फूलों की अलग-अलग प्रजाति अचंभित करने वाली थी। बड़े ही खूबसूरत खिले हुए गुलाब मन को सुकून दे रहे थे। रोज गार्डन आते ही हमारी थकावट दूर हो गई। गुलाब के साथ ही विभिन्न प्रकार के पौधे देखकर मन प्रफुल्लित हो रहा था।

  3. ब्लॉसम पार्क और इको पॉइंट

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    यह मुन्नार शहर से करीब 3 किमी दूर 16 एकड़ से अधिक दायरे में फैला है। यह एक शांतिपूर्ण स्थान है। यहां आते ही शांति का अहसास होता है। यहां स्थित रंग-बिरंगे फूल और हरी-भरी पहाड़ियां पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। साइकिल चलाना, रोलर स्कैटिंग जैसी गतिविधियां रोमांचकारी होती हैं। इको पॉइंट मुन्नार से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चिल्लाकर अपनी आवाज को दोबारा सुनना यहां आने वाले पर्यटकों को अचंभित करता है। ये जगह बेहद खूबसूरत है जो किसी का भी मन मोह सकती है।

  4. दो हजार रुपए किलो की चाय

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    हमने मुन्नार का चाय बागान भी देखा, जो करीब 100 साल पुराना है। एशिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक है यह जगह। यहां चाय की पत्तियों को तोड़कर प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद इसकी कीमत 2 हजार रुपए प्रति किलो हो जाती है। यह चाय निर्यात कर दी जाती है, जो कि दवा बनाने के काम भी आती है। इस चाय के सेवन से बॉडी में स्थित फैट्स बर्न होते हैं। 1880 में मुन्नार में चाय उत्पादन की शुरुआत से जुड़ी निशानियां जैसे दुर्लभ कलाकृतियां, चित्र और मशीनें यहां स्थित चाय संग्रहालय में रखी गई हैं। यहां कई ऐतिहासिक तस्वीरें भी लगी हुई हैं। इसके पास ही स्थित टी प्रोसेसिंग ईकाई में चाय बनने की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा व समझा जा सकता है।

  5. कुंडला झील में नाव की सवारी

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    कुंडला झील पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक छोटे से आकार के बांध के एक कृत्रिम जलाशय है। यह मुन्नार से करीब 27 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां शिकारा नाव की सवारी का मजा ही कुछ और है। इसके बाद हम टैक्सी द्वारा एलेप्पी पहुंचे। सबसे पहले वैम्बनाड झील को देखा। ये भारत की सबसे लंबी और केरल की सबसे बड़ी झील है। यह झील 2000 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है और 96.5 किलोमीटर लंबी व 14 किलोमीटर चौड़ी झील है।

  6. हर साल होती है बोट रेस

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    एलेप्पी जिला, एर्नाकुलम जिला एवं कोट्‌टयम जिला वैम्बनाड झील की बॉर्डर है। इस झील की खासियत है कि इसके एक हिस्से में समुद्र का बैक वाॅटर है और दूसरे हिस्से में साफ पानी, जो नदियों से आता है। इस झील में अथिणकौरिल, मणि माला, मिनाचिल, पेरियार सहित 10 नदियों का पानी आकर मिलता है। बैक वाॅटर पर्यटन का अपना ही मजा है। यहां 1000 बोट हैं। इसे पूर्व का वेनिस भी कहते हैं, क्योंकि इसमें कैनल्स का नेटवर्क है। इसमें स्नेक बोट रेस हर साल आयोजित की जाती है। यह झील अपने सौंदर्य से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। हमने यहां के स्ट्रीट फूड में मिर्चीबड़ा और केले व अदरक के जूस का आनंद लिया।

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