वर्ल्ड एड्स डे / एचआईवी पॉजिटिव लोगों ने साझा की अपने संघर्ष की सच्ची कहानियां

HIV positive people shared true stories of their struggle
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HIV positive people shared true stories of their struggle

Dainik Bhaskar

Dec 01, 2019, 11:59 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क. जागरूकता कार्यक्रमों और सावधानियों के बावजूद एचआईवी पॉजीटिव आना... किसी भी व्यक्ति और उसके परिवार के लिए सदमे जैसा ही होता है। एड्स सुनते ही लोगों का रवैया अक्सर बदल जाता है। शारीरिक तकलीफें तो होती ही हैं, मानसिक तकलीफें उससे भी ज्यादा। एक दिसंबर वर्ल्ड एड्स डे के अवसर पर हमने ढूंढी, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कुछ ऐसे परिवारों की कहानियां, जहां यह वायरस भी रिश्तों में दरार न डाल सका। 
 

पत्नी ने डीप डिप्रेशन से निकाला अब मरीजों की मदद कर रहे है

  1. शरद और नैना (परिवर्तित नाम) की शादी को 13 साल हो गए थे। जिंदगी भी सेट मालूम पड़ रही कि शरद की तबीयत अक्सर खराब रहने लगी। दवाइयां बेअसर होने लगीं। शरद इतने कमजोर हो गए कि ऑफिस छोड़ बेड रेस्ट पर आ गए। एचआईवी टेस्ट हुआ तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। परिवार के सदस्यों को यह बात बताई, तो सभी ने साथ दिया। शरद के दोनों बच्चे अभी छोटे थे। उन्हें चिंता थी कि अब परिवार का क्या होगा, नैना कैसे जिम्मेदारी संभालेगी। वे डीप डिप्रेशन में चले गए। किसी की बातों का जवाब ही नहीं देते थे। बच्चों को परिवार के साथ छोड़ नैना ने दिन-रात शरद की सेवा की, उनकी काउंसलिंग करवाई और डिप्रेशन से बाहर खींच लाईं। उन्हें वायरस से लड़ते 10 साल हो गए हैं। शरद अब एचआईवी पॉजिटिव लोगों की तनाव से दूर रहने में मदद करते हैं। 

  2. निशा को एचआईवी पॉजिटिव शिवा से शादी का इंतजार

    शिवा और निशा (परिवर्तित नाम) एक साथ स्कूल में पढ़े हैं और दोनों परिवार एक-दूसरे को जानते थे। इसलिए दोनों की शादी तय हो गई। दोनों का नया-नया जॉब था, इसलिए शादी के लिए रुकने का फैसला किया। इसी बीच शिवा की तबीयत अक्सर खराब रहने लगी। एचआईवी टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने निर्णय लिया कि बचपन की दोस्त और वह लड़की जिसे वे पसंद करते हैं,
    उसे धोखा नहीं देंगे। उन्होंने निशा को बीमारी के बारे में बताकर समझाया कि उन्हें रिश्ता आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। निशा कोई दूसरा लड़का पसंद कर लें। लेकिन निशा ने तय किया कि उन्हें शिवा के साथ ही जिंदगी बितानी है। शिवा जितना निशा से दूर रहने की कोशिश करते, निशा उतनी ही सेवा करतीं। 4 साल हो गए हैं। अभी भी निशा शिवा की देखभाल से जुड़े सारे काम करती हैं। हालांकि, शादी के लिए शिवा अभी भी नहीं माने हैं। निशा उनका इंतजार कर रही हैं। 

  3. पत्नी की लगन से 21 साल से स्वस्थ हैं 53 साल के रामप्रसाद

    राम प्रसाद (परिवर्तित नाम) को 21 साल पहले पता चला कि वे एचआईवी पॉजिटिव हैं। यह खबर सुनते ही रिश्तेदारों की बातचीत का लहजा बदल गया, लेकिन पत्नी सुनंदा (परिवर्तित नाम) ने हार नहीं मानी। सुनंदा की रिपोर्ट निगेटिव थी, तो उन्होंने दोनों बच्चों समेत पतिकी जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया। राम प्रसाद की दूध डेरी थी और पूंजी के नाम पर दो प्लॉट थे। हर महीने 25 हजार तक की दवाएं आतीं। प्लॉट बेचने पड़े, पत्नी ने जेवर बेच दिए। बच्चे छोटे थे इसलिए सुनंदा दोनों को साथ लेकर हॉस्पिटल के चक्कर काटतीं। बड़े भाई और भतीजे अस्पताल पहुंच हाल-चाल लेते थे, लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं उठा सकता था। सुनंदा ने लगन से पति को वापस स्वस्थ बनाने के प्रयास किए कि 53 साल की उम्र में भी राम प्रसाद, जिन्होंने 21 साल एचआईवी के साथ गुजारे हैं, स्वस्थ हैं। अब वे कोशिश करते हैं कि उनकी बीमारी से परिवार वाले कम से कम परेशान हों।

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