काइट फेस्टिवल्स / आसमान में पतंगबाजी का ऐसा उत्साह जहां रात में भी तारों की तरह झिलमिलाती हैं पतंगें



kite festivals of the world from gujrat to china people and tourist enjoy kites
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Dainik Bhaskar

Jan 09, 2019, 12:48 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. गुजरात में पहली बार स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनने के बाद प्रतिमा परिसर में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। अहमदाबाद में भी इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल की शुरुआत हो चुकी है। इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम समेत 45 देशों के150 पतंगबाज इस फेस्टिवल में हिस्सा ले रहे हैं। बड़ी-बड़ी तितलियों से लेकर ड्रैगन, घोड़े, बैलून, फ्रूट्स समेत कई तरह की पतंगें आसमान में उड़ती नजर आ रही हैं। काइट फेस्टिवल के दौरान रात में भी “टुक्कल्स’ पतंगें उड़ाई जाती हैं। अंधेरे में झिलमिलाती ये पतंगें बड़ा ही खूबसूरत नजरा पेश करती हैं। गुजरात ही नहीं राजस्थान, दिल्ली समेत दुनिया के कई शहर ऐसे हैं जो काइट फेस्टिवल के लिए भी जाने जाते हैं, जानते हैं इनके बारे में....

जानिए क्यों खास हैं देश-दुनिया के काइट फेस्टिवल्स

  1. गुजरात : पतंगबाजी के बीच गजक और सूरती जामुन की मिठास का मजा 

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    टुक्कल्स पतंगें

     

    • पतंगबाजी के दौरान मूंगफली, गजक सहित गुजरात के लजीज व्यंजन भी चखने को मिलते हैं। इसके लिए  खास पकवान लड्डू, उंधयू और सूरती जामुन बनाए जाते हैं। साथ ही हर घर की छत पर बड़ी संख्या में लोग पतंग उड़ाते दिख जाएंगे। अहमदाबाद के अलावा गुजरात के सूरत, वड़ोदरा, राजकोट और नडियाद जैसे शहरों में भी पतंगबाजी होती है।
    • रात में भी पतंगबाजी का दौर जारी रहता है। काइट फेस्टिवल के दौरान रात में भी “टुक्कल्स’ पतंगें उड़ाई जाती हैं। अंधेरे में झिलमिलाती ये पतंगें बड़ा ही खूबसूरत नजरा पेश करती हैं।
    • एक हफ्ते तक चलने वाले इस रंग-बिरंगे फेस्टिवल में देश के विभिन्न प्रांतों के पर्यटकों के साथ ही इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, चीन, सिंगापुर, मलेशिया, फ्रांस जैसे देशों के सैलानी भी उत्सव में शिरकत करते हैं। पतंगबाजी के दौरान आसमान इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर हो जाता है।
    • पर्व का सबसे रोमांचक क्षण तब आता है, जब पेंच लड़ाया जाता है। इसमें लोग एक दूसरे की पतंग से पेंच लड़ाकर उसे काटने का प्रयास करते हैं। दरअसल, पतंग उड़ाने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। यहां पतंगों का म्यूजियम भी है। इसमें पतंग का इतिहास सुंदर तरीके से बताया गया है।

  2. जयपुर : राजस्थानी रंग में रंगा फेस्टिवल जो देगा यादगार अनुभव

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    • पिंकसिटी में काइट फेस्टिवल 14-16 जनवरी तक चलेगा। राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इस फेस्टिवल में विदेशी सैलानी भी पतंगबाजी करते नजर आते हैं। सैलानी जब पेच लड़ाकर दूसरों की पतंग काटते हैं तो 'वो काटा, वो मारा' की आवाज सुनाई देती है। 
    • हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जयपुर काइट फेस्टिवल का आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से जयपुर की पाल पर किया जा रहा है। फेस्टिवल में सैलानियों के लिए कई तरह प्रतियोगिताएं आयोजित होगी।
    • पतंगबाजी के बीच लोक कलाकारों की परफॉर्मेंस और राजस्थानी संगीत का मेल इस फेस्टिवल को यादगार बनाता है। 

  3. चीन : वेईफांग में दुनिया का सबसे बड़ा पतंग संग्राहलय

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    • चीन भी पतंगबाजी के लिए मशहूर है। यहां देश-दुनिया से पतंगों के शौकीन काइट फेस्ट में जुटते हैं। पतंग उत्सव वेईफांग शहर में हर साल अप्रैल में आयोजित किया जाता है।
    • उत्सव के दौरान आपको हाथ से बनी एक से बढ़कर एक खूबसूरत पतंगें देखने को मिलेंगी। चीन में माना जाता है कि ऊंची पतंग को देखने से नजर अच्छी रहती है। 
    • दुनिया का सबसे बड़ा पतंग संग्राहलय वेईफांग में है। इसके अलावा 9 सितंबर को भी पूरे चीन में पतंगोत्सव मनाया जाता है। पतंग को लेकर यहां कुछ मिथक भी हैं। चीन में किंन राजवंश के शासन के दौरान पतंग उड़ाकर उसे अज्ञात छोड़ देने को अपशकुन माना जाता था। साथ ही किसी की कटी पतंग को उठाना भी अशुभ माना जाता था।  हालांकि समय के साथ ये बातें अब पुरानी हो गई हैं। 

  4. जापान : पतंग उड़ाकर देवता को प्रसन्न करने का रिवाज

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    • जापान में पतंग महोत्सव का आयोजन हर साल मई के प्रथम सप्ताह में किया जाता है। हमामात्सु के शिजुका प्रान्त में होने वाले इस उत्सव के दौरान नीला आकाश रंगीन युद्ध के मैदान में बदल जाता है। इस पतंग उत्सव में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग दूसरे शहरों से आते हैं।
    • काइट फेस्टिवल में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी बढ़े इसलिए विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं। जापान में ऐसा माना जाता है कि पतंग उड़ाने से देवता प्रसन्न होते हैं। यहां प्रतिवर्ष मई के महीने में पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
    • प्राचीन काल में जापान के लोगों में विश्वास था कि पतंगों की डोर वह जरिया है, जो पृथ्वी को स्वर्ग से मिलाती है।

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