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सच्चे मैनेजमेंट गुरु हैं भगवान श्रीकृष्ण, उनकी 10 महत्वपूर्ण सीख जो सोच बदल सकती है

आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है, तस्वीरों में पढ़िए भगवान श्रीकृष्ण की 10 ऐसी सीख जो सफलता दिलाती हैं।

भगवान कृष्ण ने पांडवों का साथ हर मुश्किल वक्त में देकर यह साबित कर दिया था कि दोस्त वही अच्छे होते हैं जो कठिन से कठिन परिस्थिति में आपका साथ देते हैं। दोस्ती में शर्तों के लिए कोई जगह नहीं है, इसलिए आपको भी ऐसे ही दोस्त अपने आस-पास रखने चाहिए जो हर मुश्किल परिस्थिति में आपका संबल बनें।
Danik Bhaskar | Sep 03, 2018, 12:06 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क.  मैनेजमेंट गुरु भगवान श्रीकृष्ण की सिखाई गई बातें युवाओं के लिए इस युग में भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी अर्जुन के लिए रही थीं। उनका व्यवहारिक ज्ञान आज भी सफलता की गांरटी देता है। महाभारत के सबसे बड़े योद्धा अर्जुन ने ना केवल अपने गुरू से सीख ली बल्कि वह अपने अनुभवों से हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहे। आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है, इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण की 10 ऐसी सीख जो मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाने के साथ सफलता दिलाती हैं। (आगे की स्लाइड में एक-एक शिक्षा)

 

 

यहां पढें गीता में कही 5 बातें जो हर व्यक्ति के जीवन के लिए जरूरी है:

 

कर्म | क्यों जरूरी, यह कैसा होना चाहिए?


तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्।।अध्याय 8, श्लोक 7
कृष्ण कहते हैं- अर्जुन तुम मेरा चिंतन करो। लेकिन अपना कर्म करते रहो। वे अपना काम छोड़कर केवल भगवान का नाम लेते रहने का नहीं कहते। भगवान कभी भी किसी अव्यावहारिक बात की सलाह नहीं देते। गीता में लिखा है बिना कर्म के जीवन बना नहीं रह सकता। कर्म से मनुष्य को जो सिद्धि प्राप्त हो सकती है, वह तो संन्यास से भी नहीं मिल सकती।

 

आजीविका | काम कैसा चुनना चाहिए?


सदृशं चेष्टते स्वस्या: प्रकृतेर्ज्ञानवानपि।
प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रह: किं करिष्यति।। अध्याय 3, श्लोक 33
व्यक्ति को अपने स्वभाव के अनुसार काम-आजीविका चुननी चाहिए। वह काम जिसमें, उसे खुशी मिलती हो। हम अपनी प्रकृति और क्षमता के अनुसार काम करें। अपने अस्तित्व की जरूरत के अनुसार काम करें। गीता में यह भी लिखा है कि जो काम आपके हाथ में इस समय है, यानी वर्तमान कर्म उससे अच्छा कुछ नहीं है। उसे पूर्ण करो। 


शिक्षा | पाने का अच्छा तरीका क्या है?


तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिन:।।  अध्याय 4, श्लोक 34
शिक्षा और ज्ञान उसी को मिलता है, जिसमें जिज्ञासा हो। सम्मान और विनयशीलता से सवाल पूछने से ज्ञान मिलता है। जो जानकार हैं वे कोई भी बात तभी बताएंगे जब आप सवाल करेंगे। किताबों में लिखी या सुनी बातों को तर्क पर तौलना जरूरी है। जो शास्त्रों में लिखा, जो गुरु से सीखा है और जो अनुभव रहा है, इन तीनों में सही तालमेल से ज्ञान मिलता है। 

 

सेहत| अच्छी रहे इसलिए क्या करें?


युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दु:खहा।। अध्याय 6, श्लोक 17
जो सही मात्रा में भोजन करने वाला और सही समय पर नींद लेने वाला है, जिसकी दिनचर्या नियमित है, उस व्यक्ति में योग यानी अनुशासन आ जाता है। ऐसा व्यक्ति दुखों और रोगों से दूर रहता है। गीता में लिखा है- आयु: सत्वबलारोग्यसुखप्रितीविवर्धना:। सात्विक भोजन सेहत के लिए सर्वोत्तम है। ये जीवन, प्राणशक्ति, बल, आनंद और उल्लास बढ़ाता है। 

 

खुशी | सब चाहते हैं, पर मिलेगी कैसे? 


मास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदु: खदा:। 
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।। अध्याय2, श्लोक 14
सुख - दुख का आना और चले जाना सर्दी-गर्मी के आने-जाने के समान है। सहन करना सीखें। गीता में लिखा है- जिसने बुरी इच्छाओं और लालच को छोड़ दिया है, उसे शान्ति मिलती है। कोई भी इच्छाओं से मुक्त नहीं हो सकता। पर इच्छा की गुणवत्ता बदलनी होती है। 

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