यूएई / जलसंकट खत्म करने के लिए अंटार्कटिका के हिमखंड को 9 हजार किमी दूर ले जाने की तैयारी



Millionaire ice pirate plans to tow 12 MILE iceberg to the UAE then melt it down to drink
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Millionaire ice pirate plans to tow 12 MILE iceberg to the UAE then melt it down to drink

  • यूएई के बिजनेसमैन अब्दुल्ला अल्शेही 6 साल से कर रहे हैं इस प्रोजेक्ट पर काम
  • अब्दुल्ला के मुताबिक- हिमखंड को संयुक्त अरब अमीरात पहुंचने में 10 महीने का वक्त लगेगा

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 08:10 AM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पानी में समस्या को दूर करने के लिए अनोखा तरीका अपनाने की तैयारी की जा रही है। संयुक्त अरब अमीरात के बिजनेसमैन अब्दुल्ला अल्शेही अंटार्कटिका के 2 किलोमीटर लंबे आइसबर्ग (हिमखंड) को दक्षिणी ध्रुव से अरब ले जाने की तैयारी में है। अब्दुल्ला कहना कहना है कि आइसबर्ग को 9 हजार किलोमीटर दूर खाड़ी देश ले जाया जाएगा। 
 

आइसबर्ग को पहुंचने में लगेंगे 10 महीने 

  1. अब्दुल्ला का दावा है कि ऐसा करने से पानी की समस्या दूर होने के साथ मौसम की स्थिति में सुधार होगा। पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा। अब्दुल्ला इस प्रोजेक्ट पर करीब 6 साल से काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि आइसबर्ग को अरब देश पहुंचने में 10 महीने का वक्त लगेगा।

  2. 30% तक घट जाएगा हिमखंड

    हिमखंड को दक्षिणी ध्रुव के हर्ड आइलैंड से एक मेटल बैल्ट की मदद से ले जाया जाएगा। इसे खासतौर पर डिजाइन किया जा रहा है। अब्दुल्ला के मुताबिक, 10 महीने की यात्रा के दौरान हिमखंड 30% तक खत्म हो जाएगा। गर्म पानी में तेजी से पिघलने से हिमशैल को रखना एक और बड़ी चुनौती है, लेकिन इसे दूर किया जा सकता है।

  3. इस साल के अंत में एक ट्रायल किया जाएगा। जिसमें पहले ट्रायल में बर्फ का छोटा हिस्सा लाया जाएगा। इसमें 410 से 550 करोड़ रुपए तक का खर्च आने का अनुमान है। इसके बाद सबसे बड़े आकार का हिमखंड ले जाया जाएगा। इसे ले जाने में 700 से 1 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

  4. 5 सालों तक मौजूद रहेगा पीने का पानी

    दुनियाभर में मौजूद खारे पानी का 15% इस्तेमाल अरब देश में होता है। इसे शुद्ध करके पीने लायक बनाया जाता है। अरब देशों में पानी किल्लत बढ़ती जा रही है। अब्दुल्ला का मानना है कि ऐसा करके करीब 5 सालों तक वहां के लोगों को पीने का पानी मुहैया कराया जा सकता है। यह एक इको-फ्रेंडली प्रक्रिया है इसकी मदद से पानी को बेहद कम कीमतों पर उपलब्ध कराया जाएगा।

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