पर्यावरण / जापान की मियावाकी तकनीक से दुनिया में 3 हजार जंगल उगाए, इससे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं पेड़



miyawaki forest technique increasing in india know how to grow forest by miyawaki method
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miyawaki forest technique increasing in india know how to grow forest by miyawaki method

  • जापान के 91 वर्षीय डॉ. अकीरा मियावाकी ने 40 साल पहले मियावाकी तकनीक विकसित की थी 
  • इस तकनीक की मदद से पूर्वी एशिया, मलेशिया, इटली और दक्षिण अमेरिका में सफलतापूर्वक जंगल उगाए गए
  • इस तकनीक से करीब 10 हजार वर्गफीट जगह में 3500 पौधे उगाए जाते हैं जो मुख्यत: तीन तरह के होते हैं

अंकित गुप्ता

अंकित गुप्ता

Jul 08, 2019, 12:08 PM IST

हैप्पी लाइफ डेस्क.  साइंस जर्नल में छपी एक ताजा रिसर्च स्टडी में दुनिया को ठंडा रखने के लिए जंगल उगाना ही एकमात्र उपाय है। इस रिसर्च में कहा गया है कि अगर जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचना है तो पृथ्वीवासियों को कम से कम एक लाख करोड़ (एक ट्रिलियन) पेड़ लगाने होंगे। इसी सोच को आगे बढ़ाती है जापान से निकली जंगल उगाने की 'मियावाकी' तकनीक। इसे जापान के बॉटेनिस्ट अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था। इसकी मदद से बहुत कम और बंजर जमीन में भी तीन तरह के पौधे (झाड़ीनुमा, मध्यम आकार के पेड़ और छांव देने वाले बड़े पेड़) लगाकर जंगल उगाया जा सकता है।

 

अर्बन फॉरेस्ट कैटेगरी की यह तकनीक इतनी आसान है कि आप बगीचे या आसपास की खुली जगह में भी मिनी मियावाकी जंगल उगा सकते हैं। दुनियाभर में इस तकनीक से अब तक तीन हजार से ज्यादा जंगल उगाए जा चुके हैं। भारत में बेंगलुरु में afforestt.com के शुभेन्दु शर्मा ने तो इसे स्टार्ट-अप की तरह लिया है और टीम बनाकर 43 से ज्यादा क्लाइंट्स के लिए 54 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए हैं।

 

भारत में भी पर्यावरण की फिक्र करने वालों को यह तकनीक खूब पसंद आ रही है। पिछले दिनों तेलंगाना सरकार ने मियावाकी से 3.29 करोड़ पौधे लगाने की योजना बनाई है। महाराष्ट्र और बेंगलुरू में कई स्थानों पर सफलतापूर्वक ऐसे जंगल उगाए जा चुके हैं। मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित एम्स में भी मियावाकी जंगल तैयार करने पर काम चल रहा है। 
 

मियावाकी: तेजी से जंगल उगाने की तकनीक

  1. धर्म स्थलों के पेड़-पौधों से मिली प्रेरणा

    अकीरा मियावाकी को यह आइडिया जब आया जब वह 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित अर्थ समिट में पहुंचे। मियावाकी का अनुभव था कि दुनिया में कहीं भी चले जाएं मंदिर, चर्च और अन्य धार्मिक जगहों पर पनपने वाले पौधे कभी खत्म नहीं होते। यहां लगे पेड़ काफी प्राचीन होते हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम होती है। यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली। उनके अध्ययन में सामने आया कि जापान में सिर्फ .06 फीसदी ही ऐसे पेड़ हैं जिन्हें आबोहवा के हिसाब से कुदरती कहा जा सकता है। अलग से उगाए गए जंगल में अमूमल ऐसे पौधे रोप दिए जाते हैं जो वहां की मिट्टी के अनुकूल नहीं होते हैं। यही सच्चाई  मियावाकी तकनीक का आधार बनी।

     

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  2. 10 जरूरी बातें: एक्सपर्ट से सीखें मियावाकी उगाना

    भोपाल में मियावाकी जंगल लगा रही उत्कर्षिनी संस्था की फाउंडर बिंदु घाटपांडे ने बताया, इस विधि से जंगल दो तरह से लगाया जाता है। पहला जो किसी बड़े हिस्से में इसे विकसित किया जाता है, दूसरा, घर के आसपास या बगीचे में। दोनों जगहों पर जगह और पौधों की संख्या के हिसाब से कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखनी होती है।  

    1. तकनीक का पहला नियम है, जिस भी जमीन में पौधे लगाए जा रहे हैं, वह वहां की आबोहवा के अनुकूल होना चाहिए। ऐसे पौधे ही चुनें जो आपके इलाके की मूल प्रजाति है।
    2. अगर बीज बो रहे हैं तो वे भी अनुकूल भूमि में पनपे मूल प्रजाति के पौधे से लिए जाने चाहिए।
    3. अब जिस जमीन पर जंगल उगाना है पहले उसकी मिट्टी और इसके अनुकूल पौधों के बीजों को तलाश कर नर्सरी में छोटे पौधे उगा लें। 
    4. जमीन को 3 फीट गहरा खोदें। अब मिट्टी कैसी है यहां किस तरह के पौधे उगाए जा सकते हैं, इसकी जांच करें।
    5. मिट्टी की उर्वरता को सुधारने के लिए इसमें चावल का भूसा, गोबर, जैविक खाद या नारियल के छिलके डालकर ऊपर से मिट्‌टी डाल दें।
    6. अब पहले से नर्सरी में उगाए गए पौधों को आधे-आधे फीट की दूरी पर इस मिट्टी में लगाएं। 
    7. इसके लिए तीन तरह के पौधे - झाड़ीनुमा पौधे, मध्यम आकार के पेड़ और इन दोनों पर छांव, नमी और सुरक्षा देने वाले बड़े पेड़ लगाएं। ये पौधे एक-दूसरे को बढ़ने और जमीन की नमी बरकरार रखने में मदद करते हैं। 
    8. पौधों को लगाने के बाद इसके इर्द-गिर्द घास-फूस या पत्तियां डाल दें ताकि धूप मिट्टी की नमीं को खत्म न कर सकें।
    9. मियावाकी जंगल का बेसिक स्ट्रक्चर लगभग तैयार है, बस इसमें मौसम के अनुसार पानी देने और देखरेख की व्यवस्था करें।
    10. आपको सिर्फ दो से तीन साल तक इस जंगल की देखरेख करनी होगी, चौथे साल से यह आत्मनिर्भर जंगल की तरह विकसित हो जाएगा।
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  3. 5 फायदे : कम खर्च में 30 गुना अधिक घना जंगल

    1. इस तकनीक की मदद से 2 फीट चौड़ी और 30 फीट पट्टी में 100 से भी अधिक पौधे रोपे जा सकते हैं।
    2. बहुत कम खर्च में पौधे को 10 गुना तेजी से उगाने के साथ 30 गुना ज्यादा घना बनाया जा सकता है।
    3.  पौधों को पास-पास लगाने से इन पर खराब मौसम का असर नहीं पड़ता है और गर्मी में नमी नहीं कम होती और ये हरे-भरे रहते हैं।
    4. पौधों की बढ़त दोगुनी तेजी से होती है और 3 साल के बाद इनकी देखभाल नहीं करनी पड़ती।
    5. कम जगह में लगे घने पौधे ऑक्सीजन बैंक की तरह काम करते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल वन क्षेत्र में ही नहीं घरों के आसपास भी किया जा सकता है।
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  4. 4 सावधानियां: सही दूरी रखें, सही पौधे चुनें

    1. अगर बड़े हिस्से में इसे लगा रहे हैं पौधों चुनाव ध्यान से करें। इसके लिए बांस, शीशम, पीपल, बरगद जैसे छायादार पौधे लगाएं। बगीचे या घर के पिछले हिस्से में जंगल विकसित करना चाहते हैं तो झाड़ीनुमा पौधे लगाएं ताकि ये छोटे से हिस्से में आसानी से बढ़ सकें। 
    2. सबसे खास बात है कि इसे लगाते समय अलग तरह के पौधे चुनें। झाड़ी नुमा पौधे, मध्यम लंबाई वाला पौधा और अधिक लंबाई वाला पौधा। इन्हें लगाने का क्रम भी यही रखें ताकि इन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
    3. पौधों को पास-पास लगाएं। इनके बीच 4-5 फुट से कम का अंतर होना चाहिए। एक एकड़ में 10 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं।
    4. जंगल लगाने का सबसे बेहतर समय मानसून होता है। बारिश का पानी मिलने से जड़ें आसानी से विकसित होती हैं और पेड़ों को लंबे समय मिट्टी से नमीं मिलती रहती है। इस वजह से इन्हें कम देखभाल की जरूरत होती है। 
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  5. नौकरी छोड़कर सीखा जंगल उगाना

    टोयोटा की एक बढ़िया जॉब छोड़कर जिंदगी भर पेड़ लगाने में ही आजीविका ढूंढ़ने वाले इंडस्ट्रियल इंजीनियर शुभेन्दु शर्मा कहते हैं- "मियावाकी के लिए परिवार को समझाना थोड़ा मुश्किल रहा क्योंकि सबकुछ बदल जाने वाला था। मैंने महसूस किया कि मैं इस काम को सिर्फ अच्छे काम के नाम पर नहीं कर सकता इसीलिए मैंने इसे बिजनेस के रूप में लिया। कुछ दोस्तों की मदद से आज यह स्थापित हो गया है।

     

     

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