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हिस्ट्री /मिस्त्र में हुई थी बोहरा समुदाय की शुरुआत, 11वीं शताब्दी में भारत आए और गुजरात के सिद्धपुर में बनाया मुख्यालय



Danik Bhaskar | Sep 14, 2018, 02:23 PM IST
  • ऐसे बना समाज

    ऐसे बना समाज

    • मूलत: मिस्र में उत्पन्न और बाद में अपना धार्मिक केंद्र यमन ले जाने वाले मुस्ताली मत ने 11वीं शताब्दी में धर्म प्रचारकों के माध्यम से भारत में अपनी जगह बनाई।
    • 1539 के बाद जब भारतीय समुदाय बहुत बड़ा हो गया, तब इस मत का मुख्यालय यमन से भारत में सिद्धपुर लाया गया।
    • 1588 में दाऊद बिन कुतब शाह और सुलेमान के अनुयायियों के कारण बोहरा समुदाय में विभाजन हुआ और दोनों ने समुदाय के नेतृत्व का दावा किया।
    • बोहराओं में दाऊद और सुलेमान के अनुयायियों के दो प्रमुख समूह बन गए, जिनके धार्मिक सिद्धांतों में कोई खास सैद्धांतिक अंतर नहीं है।
    • दाऊदियों के प्रमुख मुम्बई में तथा सुलेमानियों के प्रमुख यमन में रहते हैं।

  • उपलब्धियां मानव सभ्यता की पूंजी

    उपलब्धियां मानव सभ्यता की पूंजी

    • दाऊदी बोहरा मुसलमानों की विरासत फातिमी इमामों से जुड़े हैं जो पैगंबर मोहम्मद के प्रत्यक्ष वंशज हैं।
    • 10वीं से 12वीं सदी के दौरान इस्लामी दुनिया के अधिकतर हिस्सों पर राज के दौरान ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य और वास्तु में उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल कीं आज मानव सभ्यता की पूंजी हैं। इनमें एक है काहिरा में विश्व के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक ‘अल-अजहर’।
    • भारत में उनका सबसे बड़ा शाहकार है भेंडी बाजार स्थित रूदाते ताहेरा जो 51वें दाई अल-मुतलक सैयदना डॉ. ताहिर सैफुद्दीन और उनके पुत्र 52वें दाई अल-मुतलक सैयदना डॉ. मोहम्मद बुरहानु्द्दीन का मकबरा है। संगमरमर का बना यह मकबरा 10 से 12वीं सदी के दौरान मिस्र में प्रचलित फातिमीदी वास्तु और भारतीय कला का अद्भुत मिश्रण है।
    • रूदाते ताहेरा की शान बढ़ाती है बेशकीमती जवाहरातों से जड़ी सुनहरे हर्फों वाली अल-कुरान। मुंबई की 20 से ज्यादा बोहरा मस्जिदों में कई शानदार हैं जिनमें सबसे बड़ी है 100 वर्ष से भी ज्यादा पुरानी सैफी मस्जिद। 

  • यहां अधिक रहते हैं समुदाय के लोग

    यहां अधिक रहते हैं समुदाय के लोग

    • दाऊदी बोहरा मुख्यत: गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, दाहोद, और महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे व नागपुर, राजस्थान के उदयपुर व भीलवाड़ा और मध्य प्रदेश के उज्जैन, इन्दौर, शाजापुर, जैसे शहरों और कोलकाता व चेन्नई में बसते हैं।
    • पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, दुबई, ईराक, यमन व सऊदी अरब में भी उनकी अच्छी तादाद है। मुंबई में इनका पहला आगमन करीब ढाई सौ वर्ष पहले हुआ। यहां दाऊदी बोहरों की मुख्य बसाहट मुख्यत: भेंडी बाजार, मझगांव, क्राफर्ड मार्केट, भायखला, बांद्रा, सांताक्रुज और मरोल में है।
    • मुंबई में भेंडी बाजार है, जहां बोहरों का बोलबाला है- बोहरी मोहल्ला ही कहलाने लगा है। फोर्ट की एक सड़क भी बोहरा बाजार के नाम से मशहूर है। 

  • दाई-अल-मुतलक दाऊदी सबसे बड़े गुरु

    दाई-अल-मुतलक दाऊदी सबसे बड़े गुरु

    • दाई-अल-मुतलक दाऊदी बोहरों का सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु पद होता है। समाज के तमाम ट्रस्टों का सोल ट्रस्टी होने नाते उनका कारोबार व अन्य संपत्ति पर नियंत्रण होता हैं।
    • इस समाज में मस्जिद, मुसाफिरखाने, दरगाह और कब्रिस्तान का नियंत्रण करने वाले सैफी फाउंडेशन, गंजे शहीदा ट्रस्ट, अंजुमन बुरहानी ट्रस्ट जैसे दर्जनों ट्रस्ट हैं।
    • 150 छोटे ट्रस्टों को मिलाकर बनाया गया अकेला दावते हादिया प्रॉपर्टी ट्रस्ट ही 1000 करोड़ से ऊपर का बताया जाता है जो जमात के प्रशासन के लिए जिम्मेदार है।