दिलचस्प / मोनालिसा की मुस्कान का कारण ब्रेन डिसऑर्डर नहीं, दुनिया की सबसे रहस्यमय तस्वीर पर अमेरिकी वैज्ञानिक के 5 खुलासे,

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  • पिछले कई सालों में मोनालिसा पर हुई रिसर्च के दावों को अमेरिकी शोधकर्ता  डॉ. माइकल ने किया खारिज
  • माइकल का मोनालिसा न हायपर-थायरॉइडिज्म से प्रभावित रही हैं और न ही रहस्यमय मुस्कान का कारण मांसपेशियों और ब्रेन डिसऑर्डर से जुड़ा है

Apr 19, 2019, 03:58 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. दुनिया की सबसे रहस्यमयी मोनालिसा की तस्वीर के बारे में एक अमेरिकी शोधकर्ता ने नए खुलासे किए हैं। टेक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. माइकल याफी ने मोनालिसा की मुस्कान और सूजे हुए गले का कारण बताया है। साथ ही डॉ. माइकल ने मोनालिसा के हाइपर थाइरॉइडिज्म और मसल डिसऑर्डर बताने वाली रिसर्च को खारिज किया है। उनका दावा है कि लोगों को प्रेरित करने वाली मोनालिसा न तो हाइपर-थाइरॉइडिज्म से प्रभावित रहीं, न ही रहस्यमय मुस्कान का कारण मांसपेशियों और ब्रेन डिसऑर्डर से जुड़ा है।

दावा-1 : मोनालिसा को नहीं थी मांसपेशियों के कमजोर होने की समस्या

दुनिया की इस सबसे मशहूर पेंटिंग को लियोनार्डो दा विंसी ने बनाया था। इस पर पिछले कई सालों से रूमेटोलॉजिस्ट और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट शोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि करीब 100 साल पहले तस्वीर बनवाने के दौरान औरत बैठी रही, जिसे स्किन प्रॉब्लम और शरीर में सूजन की समस्या थी। इसका कारण लिपिड डिसऑर्डर था। इतना ही नहीं, वह हृदय रोग और मसल डिसऑर्डर से भी जूझ रही थीं।

रूमेटोलॉजिस्ट और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के दावों को डॉ. माइकल याफी ने खारिज किया है। उनका कहना है अगर वह किसी बीमारी से जूझ रही होती तो तस्वीर में लक्षण दिखाई देते। मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी होने पर वह तस्वीर बनवाने के लिए बैठ ही नहीं पाती। 

डॉ. माइकल टेक्सास यूनिवर्सिटी के पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी में बतौर प्रोफेसर काम कर रहे हैं। उन्होंने उस दावे को भी खारिज किया कि मोनालिसा को थाइरॉइड की समस्या थी जिसके कारण गर्दन बढ़ी हुई दिख रही थी और चेहरे की मांसपेशियां कमजोर हो गई थीं। 

डॉ. माइकल के मुताबिक- व्यक्तिगत तौर पर आकर्षक व्यक्तित्व वाली मोनालिसा का बचाव करना जिम्मेदारी की तरह है क्योंकि पिछली कुछ शताब्दियों तक इस तस्वीर ने हजारों लोगों को को प्रेरित किया है। मैं दूसरे लोगों की तरह नहीं सोच सकता है कि वह हाइपोथाइराॅइडिज्म से पीड़ित थीं।

डॉ. माइकल के मुताबिक, ज्यादातर आर्टिस्ट अपनी कृतियों में वही दर्शाते हैं जो समाज में देखते हैं। पेरू के रेगिस्तान में जुड़ी प्राचीन एंडियन और मिस्र की सभ्यता में एक बात सबसे कॉमन दिखती है। वह है- गले में घेंघा रोग क्योंकि इन क्षेत्रों में आयोडिन की कमी थी। मोनालिसा भी टस्कनी की रहने वाली थीं, वहां की स्थिति भी ऐसी ही थी।

डॉ. माइकल के मुताबिक, कुछ समय पहले डॉक्टरों ने अपने शोध में लिखा था कि मोनालिसा की मांसपेशियां कमजोर थीं अगर ऐसा होता है तो वह घंटों बैठकर पेंटिंग बनवाने में समर्थ नहीं होती। तस्वीर में त्वचा पीली दिखने पर डॉ. माइकल कहते हैं कि पेंटिंग को बने हुए काफी समय बीत चुका है, इस कारण इसमें पीलापन दिखाई देता है। चिकित्सीय रूप से इसका पता लगाना काफी मुश्किल है। 

डॉ. माइकल का कहना है कि ऐसा भी कहा जाता है कि तस्वीर बनवाने से पहले वह प्रेग्नेंट हो चुकी थीं और पेरिपार्टम थाइरॉइडिटिस से परेशान थी। डिलीवरी के कुछ समय बाद महिलाओं की थाइरॉइड में सूजन की समस्या हो सकती है लेकिन ऐसा कुछ समय के लिए ही होता है। इटली की रहने वाली मोनालिसा के व्यक्तिगत जीवन की जानकारी बहुत कम ही उपलब्ध है। 

पिछली कई रिसर्च में दावा किया गया है पेंटिंग को देखकर लगता है मोनालिसा के हाथ में सूजन है और बाल काफी पतले होते जा रहे हैं। 
लंदन के बिरघम स्थित हार्ट एंड वेस्कुलर सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मंदीप आर मेहता कहते हैं ये लक्षण हाइपरथाइरॉइडिज्म को दर्शाते हैं लेकिन प्रेग्नेंसी के बाद थाइरॉइड ग्रंथि में हुई सूजन इसका कारण हो सकती है। 

हाइपोथाइरॉडिज्म वो स्थिति है जब थाइरॉइड ग्रंथि शरीर में हार्मोन को अधिक मात्रा में नहीं रिलीज कर पाती, जिसके कारण बालों का पतला होना, चेहरे पर पीलापन और घेंघा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

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