ऑस्ट्रेलिया / चिड़ियाघर में नारंगी रंग के दुर्लभ फ्रांसुआ लंगूर का जन्म, दुनिया में ऐसे सिर्फ 3 हजार बंदर



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  • ऑस्ट्रेलिया के सिडनी तरोंगा चिड़ियाघर में जन्मे इस बंदर को फ्रांसुआ लंगूर कहते हैं
  • यह खासतौर पर चीन और वियतनाम के जंगलों में पाए जाते हैं, लेकिन तस्करी और शिकार के कारण विलुप्तप्राय घोषित किया गया

Dainik Bhaskar

Oct 06, 2019, 08:30 AM IST

साइंस डेस्क. ऑस्ट्रेलिया के चिड़ियाघर में एक दुर्लभ प्रजाति के बंदर का जन्म हुआ है। नारंगी रंग के दिखने वाले इस बंदर को फ्रांसुआ लंगूर कहते हैं। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी तरोंगा चिड़ियाघर का कहना है कि दुनियाभर में इस प्रजाति के मात्र 3 हजार बंदर हैं। ये खासतौर पर चीन और वियतनाम के जंगलों में पाए जाते हैं। लेकिन बढ़ते शिकार और निर्माण के चलते इनकी संख्या घट रही है।

2008 में घोषित किया गया था विलुप्तप्राय

  1. नर फ्रांसुआ लंगूर का जन्म हाल ही में हुआ है। अभी इसका कोई नाम नहीं रखा गया है। सिडनी चिड़ियाघर के सीनियर जू कीपर जेन मार्शल का कहना है कि इसकी प्रजाति पहले से ही काफी दुर्लभ है, इसलिए इसके बच्चे को देखना अद्भुत अनुभव था। बच्चे का रंग कुछ हफ्तों तक नारंगी रहता है, लेकिन कुछ समय बाद यह गहरा होता जाता है।

  2. मार्शल कहते हैं ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक प्रजाति के तौर पर जानते हैं लेकिन यह बेहद तेज, फुर्तीला और इंटेलिजेंट होता है। मां नोइल के अलावा कई मादा बंदर समूह में इसकी देखभाल कर रही हैं ताकि मां को अपने लिए भी समय मिल सके। जू प्रशासन ने नर फ्रेंकॉइस लंगूर की दो तस्वीरें 4 अक्टूबर को जारी की हैं। जिसमें वह अपनी मां की गोद में नजर आ रहा है। 

     

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    मां नोइल के साथ बेबी मंकी

  3. इससे पहले जू में इसी प्रजाति के बंदर का जन्म नवंबर 2015 में हुआ था। इसका नाम नंगुआ रखा गया था। जिसकी देखभाल का ज्यादातर जिम्मेदारी मादा बंदर नोइल उठाती थी। अब उसके बेटे के जन्म के बाद दूसरे मादा बंदर देखभाल में मदद करते हैं।

  4. दुर्लभ होने के कारण इस प्रजाति के बंदरों का शिकार और तस्करी अधिक की जाती है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर द कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने 2008 में इस प्रजाति को विलुप्तप्राय घोषित किया था।

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