रथयात्रा / लकड़ी की कटाई से रथ निर्माण तक हर काम मुहूर्त के मुताबिक, 200 कारीगर मिलकर 58 दिनों में तैयार करते हैं रथ

Rath yatra 2019 inside story making of rath or chariot for lord shri jagannath rath
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  • भगवान जगन्नाथ के रथ को कपिलध्वज और बहन सुभ्रदा के रथ को पद्मध्वज कहते हैं
     

Jul 03, 2019, 01:45 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. नौ दिनों तक चलने वाली जगन्नाथ यात्रा की शुरुआत 4 जुलाई से होगी। भगवान जगन्नाथ बुधवार को भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ 15 दिनों के एकांतवास के बाद बाहर निकलेंगे। रथ यात्रा के लिए विशाल रथ तैयार किए जा चुके हैं। सबसे पहले रथ में भगवान जगन्नाथ, दूसरे में बहन सुभद्रा और अंतिम रथ में भाई बलभद्र विराजते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इनके दर्शन से सभी दुख दूर हो जाते हैं। हर साल इस यात्रा का विशेष आकर्षण होता है रथ, जिसमें बैठकर भगवान निकलते हैं। 34 हिस्सों में मिलकर बना रथ कई मायनों में खास होता है। जानिए इनके बारे में....

रथ से जुड़ी 5 बड़ी बातें

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रथ बनाने के लिए लकड़ी का इंतजाम ओडिशा सरकार की ओर किया जाता है। इसे तैयार करने के लिए ओडिशा के दस्पल्ला के जंगलों से लकड़ियां लाई जाती हैं। इसे बनाने में लकड़ी के करीब 4000 टुकड़ों की जरूरत पड़ती है। राज्य में लकड़ी और पेड़ों की संख्या कम न हो इसके लिए सरकार ने 1999 ने पौधरोपण कार्यक्रम शुरू किया था। लकड़ी को इकट्ठा करने की शुरुआत वसंत पंचमी से होती है। जरूरत के मुताबिक, लकड़ी को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने का काम रामनवमी से शुरू होता है। 

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रथ का निर्माण अक्षय तृतीय से शुरू होता है। इस दिन को रथ अनुकूला कहा जाता है। करीब 58 दिनों तक स्थानीय मंदिरों के 200 कारीगर मिलकर रथ को तैयार करते हैं। इसकी शुरुआत मंदिर के पुजारी कुल्हाड़ी को लकड़ी से छुआकर करते हैं। लकड़ी की पूजा की जाती और उस पर माला चढ़ाई जाती हैं। यहां की मान्यताओं के मुताबिक, अक्षय तृतीया के दिन शुरु किया गया काम बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन से ही जगन्नाथ मंदिर में 42 दिन तक चलने वाले चंदन महोत्सव की शुरुआत भी होती है।
 

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एक रथ 34 अलग-अलग हिस्सों से मिलकर बना होता है। नारियल की रस्सी से श्रद्धालु रथ को खींचते हैं। हर रथ में नौ पार्श्व देवता, दो द्वारपाल, एक सारथी और एक ध्वज देवता को होना अनिवार्य है। ये भी लकड़ी से तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा रथ 18 पिलर होते हैं।

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भगवान जगन्नाथ जी के रथ को नंदीघोष और कपिलध्वज के नाम से भी जानते हैं। बहन सुभ्रदा के रथ को देवदलन और पद्मध्वज कहते हैं। वहीं, भगवान बलभद्र के रथ को तालध्वज के नाम से जानते हैं। यात्रा के लिए 3 रथ का निर्माण होता है इनमें 42 चक्र लगाए जाते हैं। कपिलध्वज में 16, पद्मध्वज में 12 और तालध्वज में 14 चक्र होते हैं।

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जगन्नाथ जी के रथ का रंग लाल और हरा होता है। लाल और काले रंग से मिलकर बहन सुभद्रा के रथ की सजावट की जाती है। वहीं, बलभद्र जी के रथ को लाल और हरे रंग से कपडों से सजाया जाता है। यात्रा में सबसे आगे नंदीघोष फिर बहन सुभद्रा का रथ पद्मध्वज और अंत में भगवान बलभद्र का रथ शामिल होता है।

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