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रिसर्च / सूखी मिट्‌टी में दीमक क्षमता से दोगुना काम करती है, हरियाली 51% तक बढ़ सकती है

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2019, 09:17 AM IST


Termites can reduce impact of drought University of Western Australia study reveals
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Termites can reduce impact of drought University of Western Australia study reveals

  • वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी की हालिया रिसर्च में किया गया दावा
  • रिसर्च के अनुसार, सूखे के दौरान मिट्टी में नमी और बीजों के अंकुरित होने की संभावना बढ़ जाती है

साइंस डेस्क. सूखे की स्थिति से निपटने के लिए दीमक अहम रोल अदा करती है। वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी की हालिया रिसर्च के मुताबिक, सूखा पड़ने के दौरान दीमक दोगुना तेजी से काम करती है। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के साथ इसमें पोषक तत्वों की मात्रा और नमी को बढ़ाती है। इसके कारण पानी न होने की स्थिति में भी एक बीज के पनपने की संभावना 51 फीसदी तक बढ़ जाती है। 

एशिया के सबसे बड़े द्वीप बोर्नियो में की गई रिसर्च

  1. उष्णकटिबंधीय वर्षा वन में दीमक की संख्या अधिक

    वैज्ञानिकों के मुताबिक, उष्णकटिबंधीय वर्षा वन (ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट) में दीमक काफी मात्रा में पाई जाती है और सेल्यूलोज को तोड़कर पौधे के विकास में मदद करती है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर थियोडोर ईवांस के मुताबिक, यह रिसर्च एशिया के सबसे बड़े द्वीप बोर्नियो के मलेशिया वाले हिस्से में की गई।

  2. ऐसे की गई रिसर्च

    • रिसर्च के दौरान, मलेशियाई बोर्नियो द्वीप के कुछ हिस्सों में दीमक पूरी तरह से हटा दी गई। फिर इस जगह की तुलना 2015-16 में अलनीनो के प्रभाव वाले सूखा ग्रस्त इलाके से की गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि सूखे के दौरान भी दीमक की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई थी। 
    • सूखे के दौरान, दीमक लगातार मिट्टी के अंदर मौजूद पत्तियों को खाती रही। इससे नमी और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती रही। चौंकाने वाली बात यह है कि नमी के मुकाबले सूखे में बीजों का अंकुरण ज्यादा तेजी से हुआ था। 
    • दीमक को जीवित रहने के लिए नमी की जरूरत होती है। सूखे के समय पानी कम होने के कारण ये मिट्टी में पहुंच जाती हैं। जिससे मिट्टी में नमी की मात्रा 36 फीसदी और बीजों के अंकुरित होने की संभावना 51 फीसदी बढ़ जाती है। 
    • ईवांस का कहना है कि सूखा पड़ने के दौरान अपनी क्षमता के मुकाबले दीमक दोगुना तेजी से काम करती हैं और जमीन में बेकार पड़ी पत्तियों को 40 फीसदी अधिक चबाती हैं। दीमक में इन पत्तियों के पाचन के बाद मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटेशियम और दूसरे उवर्रक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है।

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