ग्रीस / 10 हजार से ज्यादा बकरियों ने सामोथ्राकी द्वीप की वनस्पति चरी; इलाका वीरान मैदान बना, पर्यटक घटे

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  • द्वीप पर चारे का संकट, कुपोषण का शिकार हुई बकरियां, मीट और ऊन का कारोबार हुआ प्रभावित
  • सामोथ्राकी द्वीप की खूबसूरती घटी, पर्यटकों की संख्या घटने से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर

दैनिक भास्कर

Oct 08, 2019, 01:00 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. ग्रीस के सामोथ्राकी द्वीप पर मौजूद 10 हजार से अधिक बकरियां उसे बर्बादी की ओर ले जा रही हैं। जंगली बकरियां द्वीप पर मौजूद ज्यादातर वनस्पति चर चुकी हैं। द्वीप वीरान मैदान में तब्दील हो गया है। वहीं, आईलैंड प्रशासन को यूनेस्को की ओर से द्वीप को जैवमंडल रिजर्व का दर्जा मिलने की उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है। खूबसूरती कम के कारण पयर्टकों की संख्या घटने का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

पशुपालक और किसान तलाश रहे दूसरा विकल्प

द्वीप पर बकरियों की संख्या इंसान के मुकाबले 15 गुना ज्यादा हो गई हैं। पौधे और वनस्पतियां खत्म होने की कगार पर हैं। पिछले एक दशक से द्वीप को बचाने के लिए स्थानीय लोग और विशेषज्ञ मिलकर समाधान ढूंढ रहे हैं, लेकिन कोशिश बेनतीजा रही। इसका असर यहां की अर्थव्यवस्था और खूबसूरती पर पड़ रहा है। 

स्थानीय लोगों का कहना है ये जंगली बकरियां पूरे द्वीप को तबाह कर रही हैं। ये पेड़, कार और छतों पर चढ़ जाती हैं और जो कुछ भी उन्हें खाने लायक मिलता है, उसे चर जाती हैं। बकरियों ने द्वीप को मैदान में बदल दिया है। इसका असर जमीन पर भी दिख रहा है। जमीन का कटाव गंभीर स्तर पर बढ़ गया है। पिछले दो साल पहले हुई बारिश में सड़कें बह गई थीं।

बकरियां द्वीप के ऊपरी हिस्से पर मौजूद पेड़ और वनस्पति चर चुकी हैं, नतीजतन घरों को जमीन में धंसने का खतरा बढ़ गया है। पर्यावरण संस्था से जुड़े जॉर्ज मस्कालिदिस के मुताबिक, जमीन को सुरक्षित रखने वाले पेड़ खत्म हो चुके हैं। 1990 में यहां बकरियों की संख्या 75 हजार थी लेकिन यह संख्या 50 हजार तक अधिक घट चुकी है। 

वनस्पति घटने के कारण इनका चारा खत्म हो रहा है और बकरियां कुपोषण का शिकार हो रही हैं। इनके लिए चारा उपलब्ध कराना महंगा साबित हो रहा है। इसका सीधा असर मीट कारोबारियों पर पड़ रहा है। कुपोषण के कारण घटती क्वालिटी से कारोबारी जूझ रहे हैं। ऊन, लेदर, मीट और दूध के दाम गिर रहे हैं।

 

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किसान यियानिस वेवॉरस के मुताबिक, द्वीप में मौजूद ज्यादातर किसानों के बाद विकल्प बहुत कम ही बचे हैं। हम जैसे ज्यादातर लोग दूसरी नौकरियों की तलाश कर रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कई पर्यावरणविद और शोधकर्ताओं समाधान खोज रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां के ज्यादार लोग किसी न किसी रूप से बकरियों से जुड़े हुए हैं। इसलिए यह मुद्दा सभी को प्रभावित कर रहा है। 

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