वैलेंटाइन वीक स्पेशल / न्यूरो केमिकल के कारण प्रेमी में दिखनी बंद हो जाती हैं खामियां, बढ़ता जाता है प्यार का पारा



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  • वैज्ञानिक डॉ. फिशर के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति के आकर्षण का जादू मात्र 90 सेकंड से लेकर 4 मिनट में चल जाता है
  • प्रो. ऑर्थर कहते हैं, प्रेम में आकर्षक होना बहुत जरूरी नहीं है, सौम्यता और बुद्धि का होना अहम

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2019, 02:13 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. विज्ञान के हिसाब से प्यार अंधा होता है। रॉबर्ट फ्रेयर ने अपने प्रयोगों से साबित किया है कि एक खास किस्म के न्यूरो केमिकल, फिनाइल इथाइल अमीन की वजह से व्यक्ति को प्रेमी की तमाम खामियां दिखना बंद हो जाती हैं। दिलचस्प बात है कि यह रसायन हमेशा एक ही स्तर तक नहीं रहता इसलिए प्रेम के उतार-चढ़ाव सबको हिला देते हैं। जानिक साइंस और रिसर्च के मुताबिक क्या है प्रेम का पारा कब और कैसे बढ़ताहै…
 

रिसर्च के मुताबिक प्यार तीन रूपों में आता है

  1. रटगर्स यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता और व्हॉय वी लव किताब की लेखिका हेलन फिशर के अनुसार प्यार हमारे पास तीन रूपों में आता है औश्र हर रूप के पीछे अलग-अलग हार्मोन जुड़े होते हैं।

     

    पहला : तन की चाह 
    यह दरअसल वासना होती है जो सेक्स हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन और इस्ट्रोजन से पैदा होती है। टेस्टोस्टेरॉन सिर्फ पुरुषों में ही सक्रिय नहीं होता बल्कि महिलाओं में भी रिलीज होता है। 

  2. दूसरा :मन की चाहत

    • यहां से प्रेम की शुरुआत होती है। लोग प्यार में पड़ते हैं और दूसरा कुछ भी नहीं सूझता, उनकी भूख खत्म हो जाती है। वे अधिकतर समय अपने प्रेमी के बारे में सोचने में बिता देते हैं। प्यार के इस पड़ाव पर न्यूरो-ट्रांसमीटर का समूह, मोनोअमीनस मुख्य भूमिका निभाता है। 
    • डोपामाइन : यह केमिकल प्यार के अलावा नशीले पदार्थ जैसे कोकीन और निकोटीन के सेवन से भी तेज और एक्टिव होता है। 
    • नॉरइपीनेफ्रिन : इसे एड्रीलिन भी कहा जाता है। इससे पसीना आता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। 
    • सेरोटोनिन : इस केमिकल की प्यार में एक अहम भूमिका रहती है। इसी की वजह से प्यार में डूबे व्यक्ति की हालत पागलों जैसी हो जाती है। 

  3. तीसरा : जन्म-जन्म का साथ

    • यह अवस्था आकर्षण के बाद आती है, जब रिश्ता लंबे समय तक चलना होता है। लोग आकर्षण की अवस्था में हमेशा के लिए नहीं रह सकते। अगर ऐसा होता तो कुछ भी काम होना असंभव होता! यह रिश्ता लंबे समय तक चलता है और दो लोगों को जिंदगी भर साथ रहने और परिवार चलाने में मदद करता है। इस अवस्था में मस्तिष्क में दो विशेष हॉर्मोन उत्पन्न होते हैं। जो हमें सामाजिक जुड़ाव में मदद करते हैं
    • ऑक्सीटोसिन : यह हार्मोन शिशु के जन्म के समय हाईपोथैलेमस ग्रंथि से उत्पन्न होता है। यह मां और बच्चे के बीच एक मजबूत बंधन बनाने में सीमेंट की तरह काम करता है। यह हार्मोन यौन व्यवहार के समय उत्पन्न होता है और दोनों के बीच का भावनात्मक बंधन और मजबूत बनता है। 
    • वैसोपैसिन : एक लंबे और मजबूत बंधन में इस हार्मोन की भी अहम भूमिका होती है। यह किडनी को कंट्रोल करने का काम करता है। एक शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया, इस हार्मोन की प्रेम में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस हार्मोन से 'पुरुषों में आक्रामकता बढ़ती है, जिससे वह अपने साथी की रक्षा करने के लिए अधिक सक्रिय होता है।

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