जीनियस / कम्प्यूटर को हराने वाली शकुंतला देवी को कहते हैं मेंटल कैल्कुलेटर, इनके नाम हैं कई रिकॉर्ड

Dainik Bhaskar

May 09, 2019, 12:22 PM IST


who is Skakuntala devi a human computer vidya balan to play math genius shakuntala devi
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who is Skakuntala devi a human computer vidya balan to play math genius shakuntala devi

लाइफस्टाइल डेस्क. शकुंतला देवी, नाम जितना परंपरागत है इनकी उपलब्धियां भी उतनी ही एडवांस रही हैं। अपने समय से कई दशक आगे की साेच रखने वाली शकुंतला देवी के नाम कई रिकॉर्ड हैं। भले ही लोग इस नाम से अधिक वाकिफ नहीं हैं लेकिन इन्हें ह्यूमन कम्प्यूटर का दर्जा दिया गया है। अंकों का कितना भी पेचीदा कैल्कुलेशन हो, यह इनके बाएं हाथ का खेल रहा है। दुनिया की कई बड़ी और नामी यूनिवर्सिटीज इनका लोहा मान चुकी हैं। इनके पास उपलब्धियां इतनी ज्यादा हैं कि एक फिल्म भी बन रही है। गणितज्ञ शकुंतला का मुख्य किरदार विद्या बालन निभाने जा रही है। फिल्म 2020 में रिलीज होगी। 
 

पहला रिकॉर्ड : 6 साल की उम्र में मैसूर यूनिवर्सिटी में दिखाया अंकों का जादू

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    बेंगलुरु के कन्नड़ ब्राह्मण परिवार में जन्मी शकुंतला देवी के पिता एक सर्कस में काम करते थे। इनका दिमाग गणित में कितना तेज है, इसे सबसे पहले इनके पिता ने समझा। एक बार पत्तों से जुड़ी ट्रिक समझाते समय उन्हें इसका अहसास हुआ। पिता ने सर्कस छोड़कर शकुंतला के रोड शो करने शुरू किए। बिना किसी आधिकारिक शिक्षा के इतनी तेजी से सवालों को हल करने के कारण शकुंतला देवी ने कम में उम्र में ही प्रसिद्ध पाई। 1944 में 6 साल की उम्र में इन्हें मैसूर यूनिवर्सिटी में आमंत्रित किया गया। जहां शकुंतला देवी ने अंकों के जादू से लोगों पर छाप छोड़ी। कुछ सेकंडभर में गणित के कठिन कैल्कुलेशन को हल करते देख लोग आश्चर्यचकित रह गए।  1944 में ही वह अपने पिता के साथ रहने लंदन चली गईं।

  2. दूसरा रिकॉर्ड : डलास में अत्याधुनिक कंप्यूटर ‘यूनिवैक’ से मुकाबला किया और हराया भी

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    शकुंतला को मानव कम्प्यूटर कहा जाता है। इसकी भी एक कहानी है। 1977 में इन्हें अमेरिका जाने का मौका मिला। यहां डलास की यूनिविर्सटी में इनका मुकाबला आधुनिक तकनीकों से लैस एक कंप्यूटर ‘यूनीवैक’ से हुआ। शकुंतला को गणना करके 201 अंकों की एक संख्या का 23वां मूल निकालना था। इस सवाल को हल करने में इन्हें 50 सेकंड लगे। वहीं इसे हल करने में ‘यूनीवैक’ ने 62 सेकंड का समय लिया था। इस घटना के बाद इन्हें दुनियाभर में ह्यूमन कम्प्यूटर के नाम से जाना गया। 

  3. तीसरा रिकॉर्ड : भारत में समलैंगिकता पर अध्ययन करने वाली पहली महिला

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    गणित और ज्योतिष पर किताब लिखने के अलावा इन्होंने उपन्यास भी लिखे हैं। 1977 में समलैंगिकता पर रिसर्च की। यह भारत में ऐसी पहली रिसर्च थी। उन्होंने इसे नाम दिया ‘द वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्सुअल’। इस पर डॉक्यूमेंट्री भी बनी, नाम था ‘फॉर स्ट्रेट ऑनली’। किताब में एक समलैंगिक जोड़ों की कहानी को बयां किया गया है। जो कनाडा में रहते हैं और शादी को कानूनी रूप देना चाहते हैं। किताब उस दौर में लिखी गई थी जब इस विषय पर चर्चा तो दूर, लोग ‘समलैंगिक’ शब्द बोलने में भी कतराते थे। हालांकि यह किताब बहुत अधिक चर्चा में नहीं रही। 

  4. चौथा रिकॉर्ड : गिनीज बुक ऑफ रिकाॅर्ड से नवाजा गया

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    18 जून, 1980 को इम्पीरियल कॉलेज, लंदन में उन्होंने फिर से दो 13 अंकों की संख्याओं 7,686,369,774,870 X 2,465,099,745,779  के गुणा को हल किया। इतनी बड़ी संख्याओं को उन्होंने बिना कैल्कुलेटर के महज 28 सेकंड में हल कर दिया था। बेहद कम समय में गणित के सटीक परिणाम निकालने के कारण इन्हें गिनीज बुक ऑफ रिकाॅर्ड में शामिल किया गया। 1969 में फिलीपींस विश्वविद्यालय ने उन्हें वुमेन ऑफ दी इयर का दर्जा देते हुए सम्मानित किया था। इसके अलावा रामानुजन गणित ज्ञाता पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

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