वर्ल्ड फोटोग्राफी डे / 193 साल पहले ली गई थी दुनिया की पहली तस्वीर, खिड़की से बाहर का दृश्य किया गया था कैप्चर



World Photography Day History story of world first photograph take by French photographer Joseph Nicéphore Niépce
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World Photography Day History story of world first photograph take by French photographer Joseph Nicéphore Niépce

  • तस्वीर को हकीकत में बनाने का श्रेय वैज्ञानिक जोसेफ नाइसफोर और लुइस डॉगेर को जाता है
  • जोसेफ और लुईस ने फोटोग्राफी प्रक्रिया डॉगोरोटाइप का किया था आविष्कार, 19 अगस्त 1839 को फ्रांस सरकार ने की थी इसकी घोषणा

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2019, 05:44 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. एक तस्वीर लाख शब्दों के बराबर होती है लेकिन इसे यह दर्जा इतनी आसानी से नहीं मिला है। दुनिया की पहली तस्वीर 1826 में ली गई थी यानी तस्वीर 193 साल पुरानी हो चुकी है। तस्वीर एक खिड़की से ली गई थी जिसे फ्रेंच वैज्ञानिक जोसेफ नाइसफोर ने लिया था। तस्वीर को हकीकत में बनाने का श्रेय वैज्ञानिक जोसेफ नाइसफोर और लुइस डॉगेर को ही जाता है। इन्होंने डॉगोरोटाइप प्रक्रिया का आविष्कार किया था। यह फोटोग्राफी की सबसे पहली प्रक्रिया है। इस अविष्कार की  घोषणा 19 अगस्त 1839 को फ्रांसीसी सरकार ने की थी। इसी याद में हर साल 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटोग्राफी मनाते हैं। 

पहली तस्वीर लेने में लगे थे 8 घंटे

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    1820 के करीब जोसेफ नाइसफोर और लुइस डॉगेर ने मिलकर फोटोग्राफिक प्रक्रिया  डॉगोरोटाइप का आविष्कार किया। इसकी मदद से ही पहली तस्वीर 1826 में कैप्चर की गई। इसे फ्रेंच साइंटिस्ट जोसेफ नाइसफोर ने अपने घर की खिड़की से लिया था। ऑब्सक्यूरा कैमरे से तस्वीर को कैप्चर करने में 8 घंटे लगे थे। इस पूरी प्रक्रिया को नाम दिया गया था हीलियोग्राफी। 

  2. लैवेंडर ऑयल से एक दिन में तस्वीर तैयार करना संभव हुआ

    हीलियोग्राफी से तैयार की जाने वाली तस्वीर में सिल्वर प्लेट का इस्तेमाल किया जाता था। इस प्लेट पर बिटुमिन ऑफ जुडिया लगाया जाता था। यह एक तरह का रसायन था। इसे लगाने के बाद तस्वीर के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। दोनों वैज्ञानिकों ने तस्वीर लेने की प्रक्रिया को और विकसित किया। 1832 में वैज्ञानिकों ने लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल किया और तस्वीर को एक दिन में तैयार करना संभव हो सका। 

    डॉगोरोटाइप दुनिया की पहली फोटोग्राफिक प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल 1839 से आम लोगों ने तस्वीरों के लिए किया गया था। इसमें काफी बड़े कैमरों का इस्तेमाल किया गया। इसकी मदद से कुछ मिनटों में ही साफ तस्वीर खिंची जा सकती थी लेकिन सिर्फ ब्लैड एंड व्हाइट। यह साल फोटोग्राफी के लिहाज से सबसे अहम माना गया। 
     

  3. 5वीं शताब्दी में बताए गए फोटोग्राफी के नियम

    • 5वीं  शताब्दी में चीनी और ग्रीक दार्शनिकों ने प्रकाश और कैमरे के सिद्धांतों को समझाया।

     

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    • 1021 में वैज्ञानिक अल-हायतम ने कैमरा ऑब्सक्यूरा का आविष्कार किया। जो फोटोग्राफिक कैमरे का सबसे पुराना रूप है।
    • 1827 में पहली बार फोटोग्राफिक प्लेट और कैमरा ऑब्सक्यूरा का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक जोसेफ ने तस्वीर खींची। जो एक खिड़की से ली गई थी, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं थी।

     

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    • 1838 में लुईस डॉगेर ने डॉगोरोटाइप प्रक्रिया से तस्वीर को खींचा जो पूरी तरह स्पष्ट थी। इस उपलब्धि को फ्रांस की सरकार ने 1839 में आम जनता से साझा किया।
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    • दुनिया की पहली सेल्फी अक्टूबर 1839 में ली गई थी। यह आज भी युनाइटेड स्टेट लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस प्रिंट में उपलब्ध है।
    • 1913 में कैमरों का आकार छोटा हुआ। 35 एमएम स्टिल कैमरे विकसित किए गए।
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    • 1963 में ऐसे पाेलरॉयड कैमरे बनाए गए जिनसे रंगीन तस्वीर ली जा सकती थी और मिनटों में उसे इंसान को डिलीवर भी किया जा सकता  था।
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    • 1968 में पहली बार चांद से धरती की तस्वीर को कैमरे में कैप्चर किया गया।

साल दर साल साफ हुई तस्वीर की तस्वीर

  1. 1861 : पहली रंगीन तस्वीर

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    स्कॉटलैंड के भौतिक शास्त्री क्लर्क मैक्सवेल ने लंबे समय रंगीन तस्वीर को तैयार करने की प्रक्रिया पर काम किया। उन्होंने 1861 में दुनिया की पहली रंगीन तस्वीर ली। यह तस्वीर एक फीते की थी, जिसमें लाल, नीला और पीला रंग था। 
     

  2. 1872 : पहली तस्वीर जिसमें मूवमेंट दर्ज किया गया

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    दुनिया में पहली मूवमेंट वाली तस्वीर को कैप्चर करने में 6 साल का समय लगा। इसकी शुरुआत फोटोग्राफर एडवर्ड मुएब्रिज ने 1872 में की थी। उन्होंने घोड़ों का हर मूवमेंट कैमरे में कैद करने के लिए रेसट्रैक पर 12 वायर कैमरे लगाए। 6 साल की मेहनत के बाद जमीन को छुए बगैर घोड़ों की तस्वीरों को कैद किया गया। इसे फर्स्ट मोशन पिक्चर 
    भी कहा गया।

  3. 1906 : पहली बार रात में ली गई जानवरों की तस्वीर

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    1906 में पहली बार रात में तस्वीर ली गई। तस्वीर हिरणों की थी जिसे कैमरे में वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर जॉर्ज शिरास ने कैप्चर किया था। जॉर्ज फ्लैशलाइट और वायर फोटोग्राफी के आविष्कारक थे। यह तस्वीर मिशिगन की वाइटफिश नदी में ली गई थी। जैसे ही जानवर मौके पर पहुंचे जॉर्ज ने रिमोट से संचालित होने वाले फ्लैशलाइट कैमरे का इस्तेमाल किया।

  4. 1926 : पानी में पहली रंगीन तस्वीर

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    पानी में रंगीन फोटोग्राफी की शुरुआत 1926 में हुई थी। नेशनल जियोग्राफिक के फोटोग्राफर चार्ल्स मार्टिन ने 1926 में मैक्सिको में हॉगफिश की तस्वीर को कैप्चर किया था। कैमरे को एक वाटरप्रूफ केस में रखा था। पानी के अंदर रोशनी रहे इसके लिए मैग्नीशियम फ्लैश पाउडर का इस्तेमाल किया गया था। यहां से ही वाटर फोटोग्राफी की शुरुआत हुई थी।
     

  5. 1984 : दुनिया की सबसे प्रसिद्ध रंगीन तस्वीर

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    नेशनल जियोग्रफिक के फोटोग्राफर स्टीव मैगकरी ने 1984 में एक ऐसी तस्वीर को कैमरे में कैद किया है जो आज भी लोगों का ध्यान आकर्षिक करती है। यह तस्वीर दिसंबर 1984 में ली गई थी और पाकिस्तान में अफगान रिफ्यूजी कैंप की है। इस अफगानी युवती की हरी आंखों ने दुनियाभर का ध्यान आकर्षित किया था।
     

  6. 90 के दशक में कैमरे में दिखे बदलाव

    90 का दशक फोटोग्राफी के लिहाज से बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हुआ। इस दौर में रील वाले कैमरे अपने चरम पर थे। इन कैमरों से फोटो लेने पर कई बार स्पष्ट आने की गारंटी नहीं होती थी। लेकिन दशक के अंत तक तेजी से पॉप्युलर हुए डिजिटल कैमरे ने पूरी तस्वीर ही बदल दी। इनमें रील की जगह मेमोरी कार्ड का इस्तेमाल किया गया। अब कैमरे में कैद हुई तस्वीरों को देखा जा सकता था और क्रिएटिविटी की भी गुंजाइश थी। धीरे-धीरे मोबाइल के कैमरे भी बदलाव के दौर से गुजरे और मोबाइल फोटोग्राफी का चलन शुरू हुआ।

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