तकनीक / तीन दिन में 12 स्टेप्स से गुजरकर तैयार होता है आपका गहना



Your jewel is ready after going through 12 steps in three days in tanishq
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Your jewel is ready after going through 12 steps in three days in tanishq

Dainik Bhaskar

Sep 17, 2019, 07:40 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. सोने का गहना दिखने में भले ही नाजुक हो, लेकिन काफी कठिन चरणों से गुजरकर तैयार होता है। देश के अनेक बड़े प्लांट्स में गहने तैयार करने के लिए एक दो नहीं सैकड़ों कारीगर आधुनिक मशीनों की सहायता से रॉ गोल्ड को खूबसूरत गहने की शक्ल देते हैं। मोटे तौर पर एक गहना 12 पायदानों से गुजरकर कम से कम तीन दिन में तैयार होता है। तनिष्क ज्वैलरी प्लांट के यूनिट हैड अग्लियो लॉरेंस बता रहे हैं कैसे तनिष्क तैयार करता है गोल्ड और डायमंड ज्वैलरी...

थ्री डी प्रिंटिंग से बनाए जाते है गहनें

  1. तनिष्क

     

    डिजाइन बनाना
    ज्वेलरी डिजाइनर गहने की एक इमेज कागज पर उकेरता है। इस स्केच को कम्प्यूटर द्वारा कैड डिजाइन में तब्दील किया जाता है।

     

    थ्री डी प्रिंट
    कैड डिजाइन को थ्री-डी प्रिंटर के द्वारा प्रिंट किया जाता है, जिसे रेसिन प्रोटोटाइप कहते हैं। प्रिंट प्लास्टिक मटैरियल में निकलता है।

     

    सिल्वर प्रोटोटाइप
    रेसिन को लिक्विड मोल्ड के सांचे में ढाला जाता है और उससे पहले चांदी का प्रोटोटाइप तैयार किया जाता है, जिसे मास्टर बुलाया जाता है।

     

    सिलिकॉन मोल्ड
    मास्टर से कुशल कारीगर द्वारा सिलिकॉन मोल्ड कट किया जाता है, और उसमें वैक्स को ठीक प्रकार से इंजेक्ट किया जाता है।

     

    डायमंड फिक्सिंग
    यदि गहने में डायमंड लगना है तो इस स्टेप पर हीरों को माइक्रोस्कोप की मदद से कारीगरों द्वारा वैक्स पीस में सेट किया जाता है।

     

    वैक्स ट्री
    गहनों को एक वैक्स ट्री के आकार में जोड़ा जाता है। गुणवत्ता जांच के पश्चात वैक्स ट्री गोल्ड कास्टिंग के लिए अगले विभाग में जाता है।

     

    गोल्ड ट्री
    अब लॉस्ट वैक्स कास्टिंग विधि द्वारा गोल्ड ट्री तैयार किया जाता है। इसके लिए वैक्स ट्री को प्लास्टर ऑफ पेरिस के घोल में डालकर चार घंटे सुखाया जाता है।

     

    पिघला सोना
    फ्लास्क को 16 घंटे 500 से 600 डिग्री के तापमान पर गरम किया जाता है। उसमें शुद्ध सोना पिघलाकर उचित तापमान में कास्ट किया जाता है।

     

    सेपरेट फ्रॉम गोल्ड ट्री
    गोल्ड ट्री को प्लास्टर ऑफ पेरिस के फ्लास्क से बाहर निकाला जाता है, हर गहने को अलग करते हैं। फिर इसे गुणवत्ता जांच के लिए भेजा जाता है।

     

    सोल्डर एंड पॉलिश
    डाउनस्ट्रीम प्रोसेस में गहनों को डिजाइन अनुसार जोड़ा जाता है, सोल्डर करते हैं और चमक के लिए चार से पांच स्टेप्स में बेहतर पॉलिश होती है।

     

    रोडियम एंड हॉलमार्किंग
    क्वालिटी इंस्पेक्टर के अनुमोदन करने पर तैयार गहने को रोडियम के लिए भेजा जाता है। अब गहना हॉलमार्किंग के लिए तैयार माना जाता है।

     

    क्वालिटी चैक
    फैक्टरी से बाहर निकलने से पहले हर गहने की आधुनिक मशीनों एवंप्रशिक्षित क्वालिटी इंस्पेक्टर्स द्वारा गुणवत्ता की जांच की जाती है। गहना तैयार हो जाने के बाद लॉकर में रखा जाता है, जहां से ऑर्डर के अनुसार विभिन्न शहरों में भेजा जाता है। कोई स्पेशल ऑर्डर या डिफरेंट डिजाइन का गहना तैयार होने में ज्यादा वक्त भी लग सकता है।

  2. 70 प्रतिशत वेस्ट

     

    तनिष्क

    जब भी उपरोक्त 12 स्टेप्स से गुजरकर कोई गहना तैयार किया जाता है, तो सेपरेट फ्रॉम गोल्ड ट्री प्रोसेस के बाद 70 प्रतिशत वेस्ट निकलता है। इस वेस्ट में गोल्ड व अन्य केमिकल्स शामिल होते हैं। कुछ प्रोसेस के बाद इस वेस्ट में से गोल्ड को रीयूज कर लिया जाता है।

  3. 90 किलो धूल में से 2.5 किलो सोना

    तनिष्क

    तनिष्क के पंतनगर (उत्तराखंड) स्थिति ज्वेलरी प्लांट में यूएसए, जर्मनी, इटली एवं जापान से इम्पोर्टेड मशीनों का इस्तेमाल होता है। यहां पर कार्यरत कारीगरों में करीब 80 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो कि उत्तराखंड के सुदूरवर्ती गांवों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। इस प्लांट की सबसे खास बात ये है कि यहां पर प्रोसेस के दौरान उड़ने वाले हर धूल के कण को एकत्र किया जाता है और उससे सोने की रिकवरी की जाती है। औसतन एक महीने में 90 किलो धूल एकत्र होती है, जिसमें से करीब 2.5 किलो 24 कैरेट सोना प्राप्त किया जाता है।

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