मदर्स डे खास /शूटर श्वेता के परिवार की तीन मांओं की कहानी, सबने संघर्ष से चुनौतियों को हराया

Dainik Bhaskar

May 12, 2019, 07:49 AM IST


Shweta's family, defeated the challenges by all struggles
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Shweta's family, defeated the challenges by all struggles

नई दिल्ली (राजकिशोर). अब मां पहले वाली मां नहीं रही। वक्त के साथ उसकी भूमिका बदली है। उसकी चुनौतियां बढ़ी हैं। लेकिन जो एक चीज नहीं बदली है वो है उसका लक्ष्य। मां हमेशा से ही अपने बच्चों की तरक्की को सबसे बड़ी प्राथमिकता मानती रही है। ऐसी ही एक परिवार की तीन मां हैं। साल 2014 के एशियन गेम्स में इंडिविजुअल मेडल जीतने वाली शूटर श्वेता चौधरी, उनकी मां  बिमला और दादी बल्लोदेवी। ये तीनों बता रही हैं कि तीन पीढ़ियों में मां की जिम्मेदारी कैसे बदलती गई।

  • दादी कहती हैं- मां घर के काम सिखाती, ताकि जिम्मेदारी निभा सकूं 

    दादी कहती हैं- मां घर के काम सिखाती, ताकि जिम्मेदारी निभा सकूं 

    श्वेता की दादी बलोदेवी (94 साल) बताती हैं कि आजादी से पहले मेरा जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। हम चार भाई और चार बहनें थी। मेरी मां चाहती थी कि हम बहनें घर का काम अच्छे से सीखें। तब लड़कियों को पढ़ाने का तो कोई सोचता भी नहीं था। बड़े हुए, शादी हो गई। नई जिम्मेदारी मिली। चार बेटा और एक बेटी हुई। बच्चों को स्कूल भेजना, सास की सेवा और खेती ही दिनचर्या थी। बच्चे काम-धंधे से लग गए, तभी सुकून मिला। रमेश की बेटी श्वेता ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीत खानदान का मान-सम्मान बढ़ाया है। हमने जो त्याग किए, वो सफल हो गए।

  • मां बोलती हैं- बच्चों को दिक्कत न हो, इसलिए घर में शूटिंग रेंज बनवाई

    मां बोलती हैं- बच्चों को दिक्कत न हो, इसलिए घर में शूटिंग रेंज बनवाई

    श्वेता की मां बिमला देवी (57 साल) के मुताबिक, हमेशा घर के कामों में हाथ बंटाने पर जोर देती थी। शादी के बाद पति के साथ फरीदाबाद आ गईं। दो बच्चे हुए। काम के सिलसिले में पति बाहर जाते रहते थे। बेटा तोषिंद्र और बेटी श्वेता बड़े होने लगे। भविष्य की चिंता भी होने लगी। एक बार दोनों को शूटिंग रेंज ले गई। यहां इन्हें अच्छा लगा। शूटिंग रेंज दूर थी। शुरू में लाने-ले जाने में दिक्कत हुई। फिर घर में ही एयर पिस्टल का शूटिंग रेंज बनवाई। मंैने कभी बच्चों पर कुछ नहीं थोपा। बस इतना चाहती थी कि दोनों बच्चे सफल रहे। मुझे गर्व है कि दोनों बच्चों ने शूटिंग में नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर मेडल जीते। 

  • बेटी बताती हैं- बेटे के जन्म के बाद समझा कि मां ने कितने त्याग से पाला

    बेटी बताती हैं- बेटे के जन्म के बाद समझा कि मां ने कितने त्याग से पाला

    इंटरनेशनल शूटर श्वेता चौधरी कहती हैं कि जब तक शादी नहीं हुई थी और बेटा नहीं था, तब शायद मुझे ज्यादा एहसास नहीं हुआ कि मां ने मेरे लिए कितने त्याग किए हैं। मेरा ढाई साल का बेटा है। अब मेरे सामने बेटे को पालने की चुनौती है। लेकिन इस चुनौती को मेरी सास ने अासान बना दिया है। मैं शूटिंग की प्रैक्टिस करती हूं और ढाई साल के बेटे को सास देखती हैं। मां ने हमेशा आगे बढ़ने की सीख दी। घर के कामों को भी करने को लेकर नहीं कहती थी। लेिकन वह कहती थी, चूंकि शादी के बाद ससुराल में जाना है। ऐसे में घर के काम की जानकारी होनी चाहिए। इसकी ट्रेनिंग भी जरूरी है।

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