परेशानी:कोरोना काल के बाद किताब व ड्रेस की कीमत 20 फीसद बढ़ी

अररिया13 दिन पहले
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बरामदे पर पढ़ाई करते बच्चे। - Dainik Bhaskar
बरामदे पर पढ़ाई करते बच्चे।
  • जिले के सरकारी स्कूलों में चार लाख व निजी विद्यालयों में दो लाख बच्चे कर रहे पढ़ाई

कोरोना काल के बाद एनसीईआरटी किताब और स्कूल यूनिफॉर्म के दाम बढ़ने से अभिभावकों के उपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। वहीं दुकानों में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध नहीं रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रहा है। अररिया के किताब दुकान व स्कूल ड्रेस मुहैया कराने वाले दुकानों की पड़ताल में सामने आया कि पटना के थोक किताब एजेंसी द्वारा समय पर दुकानों में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध नहीं कराने के कारण परेशानी हो रही है। अररिया के बस स्टैंड रोड स्थित बुक भंडार के मालिक विजय कुमार ने बताया कि पटना की किताब एजेंसी को कई बार एनसीईआरटी की सभी किताब के लिए ऑर्डर दिया गया, लेकिन वे लोग कुछ किताबें ही उपलब्ध कराते हैं। बताया कि एक साल कॉपी व स्टेशनरी की सामग्री में भी 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
पढ़ाई महंगी होने के कारण अभिभावक परेशान
कोरोना काल के बाद अभिभावकों का रोजगार धीमा पड़ गया। वहीं किताबों की बढ़ी कीमत व स्कूल ड्रेस में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ोतरी होने के कारण अभिभावकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। अभिवावक रमेश कुमार, संजय सिंह, प्रताप सिंह आदि ने बताया कि कोरोना के कारण बीते दो वर्षों से रोजगार धीमा पड़ गया है और महंगाई बढ़ने के कारण बच्चों का लालन पालन मुश्किल हो रहा है।

कक्षा 1-5 तक 20 व 6-8 तक 40 रुपये बढ़ा | कोरोना काल से पहले एनसीईआरटी की किताबों की कीमत 60 रुपए प्रति किताब था, लेकिन अब एनसीईआरटी की किताबों की कीमत 65 रुपए हो गया है। वर्ग 1 से लेकर वर्ग 5 तक के लिए एनसीईआरटी की कूल 4 किताबें लेना पड़ता है। जबकि कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को कुल 8 किताबें लेना पड़ता है। ऐसे में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को 20 रुपया और कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को 40 रुपए का अधिक बोझ उठाना पड़ता है। इतना ही नहीं बच्चों को कॉपी लेने में भी अधिक खर्च का बोझ उठाना पड़ता है।

पढ़ाई को ले अभिभावक की जेब पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ
ज़िले में प्राइवेट स्कूलों के दो एसोसिएशन कार्यरत हैं। जिनमें प्राइवेट स्कूल ऐंड वेलफेयर एसोसिएशन के जिला सचिव सह फारबिसगंज प्रखंड अध्यक्ष खुर्शीद खान उर्फ पप्पू खान और प्राइवेट स्कूल ऐंड चिल्ड्रन डेवलपमेंट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष एमएम मुजीब ने बताया गया कि जिले में बड़े छोटे मिलाकर लगभग 700 प्राइवेट स्कूल हैं। जिसमें 2 लाख के करीब छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।कई छोटे स्कूल जरूरत के अनुसार कम किताबों का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए इन स्कूलों के किताबों की कीमत में ज्यादा फर्क नजर आया।

प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को किताब में लगने वाली कीमत
कक्षा छोटे स्कूल बड़े स्कूल
1 दो हजार से 4 से 45 सौ
ढाई हजार
2 21 सौ 42 से 43 सौ
3 21 सौ 43 सौ
4 22 सौ 44 सौ
5 22 सौ 44-50 सौ
6 23 सौ 45 सौ
7 23 सौ 46 सौ
8 23 सौ 46 सौ
9 15 सौ से 2 हजार
2 हजार
10 15 सौ से 2 हजार
2 हजार

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