लापरवाही:3 वर्षों में ही लाखों की राशि से बने सामुदायिक शौचालय हुए बदहाल

दाउदनगर11 दिन पहले
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बेकार पड़ा सामुदायिक शौचालय - Dainik Bhaskar
बेकार पड़ा सामुदायिक शौचालय

ओडीएफ अभियान के तहत गांव में तीन साल पहले सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। कुछ दिनों तक तो यह सार्वजनिक शौचालय ठीक-ठाक रहे लेकिन अब देखरेख के अभाव में यह बदहाल हो गए हैं। वर्तमान में इन सामुदायिक शौचालय का कोई लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। यह हाल दाउदनगर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में लाखों की राशि से बनाए गए सामुदायिक शौचालय की है। वर्तमान समय में उन सामुदायिक शौचालय की जो स्थिति है उसे देख कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ना तो इसको लेकर लोग गंभीर है और ना ही जनप्रतिनिधि व अधिकारी। किसी शौचालय का सीट टूटा हुआ है तो किसी का दरवाजा। और तो कहीं - कहीं पानी की व्यवस्था के लिए लगाए गए चापाकल भी खराब पड़े हैं।

ऐसे तो दाउदनगर प्रखंड पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित है लेकिन यह कागजों पर ही अच्छा दिखता है। धरातल पर इसे मजाक कहें तो सही होगा। क्योंकि अधिकांश गांव में अभी भी सड़क किनारे शौच करते हुए लोग दिख जाएंगे। हालांकि सामुदायिक शौचालय के साथ-साथ घरों में भी शौचालय निर्माण के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि दी गई थी पर उसके बावजूद गांव के हालात नहीं बदले। एक तरह से कहे तो सरकारी पैसे का जमकर दुरुपयोग हुआ है। प्रखंड के मनार पंचायत के नवरत्न चक एवं अनछा पंचायत में बना सामुदायिक शौचालय जर्जर अवस्था में है। वर्तमान समय में समुदायिक शौचालय का कोई उपयोग नहीं हो रहा।

इन जगहों पर बनाया गया था सामुदायिक शौचालय

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत दाउदनगर प्रखंड के 15 पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। इनमें तरार में 1, करमा 2, तरारी 2, शमशेर नगर 2, महावर 1, संसा 1, गोडीहां 2, अंछा 1, बेलवां 2, कनाप 2, अंकोढा 1, मनार में एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। लेकिन देखरेख के अभाव में इनमें से अधिकांश शौचालय बेकार पड़े हैं। हालांकि इन सामुदायिक शौचालयों का जिम्मा महादलित टोलों के लोगों को ही दिया गया था। पर लापरवाही व देखरेख के अभाव में ये भी शौचालय बेकार हो गएं।

18 सामुदायिक शौचालय निर्माण पर खर्च हुए हैं 32 लाख से ज्यादा की राशि

दाउदनगर प्रखंड के 15 पंचायत में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत 18 सामुदायिक स्वच्छता परिसर बनाए गए थे। जिसमें एक शौचालय पर 1 लाख 80 हजार की राशि खर्च की गई थी। इन शौचालयों पर लगभग 32लाख से ज्यादा की राशि खर्च की गई थी। लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा। ये सार्वजनिक शाैचालय देख रेख के अभाव में अंतिम सांस ले रहे हैं ।

वरीय अधिकारियों व ग्रामीणों की लापरवाही का परिणाम है कि सार्वजनिक शौचालय का लॉक गेट तोड़ फोड़ कर कहीं-कहीं उसे हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। कई जगहों पर पानी के लिए लगाया गया चापाकल का हैंडल खोल लिया गया है।इन शौचालयों पर लगभग 32लाख से ज्यादा की राशि खर्च की गई थी। लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा।

बोले बीडीओ - जांच कर कराई जाएगी मरम्मत

इस संबंध में पूछे जाने पर दाउदनगर बीडीओ योगेंद्र पासवान ने बताया कि जो सामुदायिक शौचालय लोहिया स्वच्छता अभियान के तहत बनाए गए थे। उसकी जांच कराई जाएगी। किस कारण से वे सामुदायिक शौचालय बंद हो गए हैं। जहां मरम्मत की आवश्यकता होगी वहां कराकर चालू कराया जाएगा।

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