पुष्पांजलि अर्पित:जयंती पर याद किए गए रवींद्रनाथ टैगोर

टिकारी15 दिन पहले
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सांसद आदर्श ग्राम केसपा स्थित ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल के प्रांगण में शनिवार को राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई गई। मौके पर सबसे पहले उपस्थित शिक्षकों व छात्रों ने गुरुदेव के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक हिमांशु शेखर ने बच्चों को गुरुदेव की जीवनी पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी एवं बच्चों से उनके पदचिह्नों पर चलने की अपील की।

गुरुदेव ने सुयोग्य लेखन क्षमता से करोड़ों पाठकों के दिलों पर राज किया। महज आठ वर्ष की उम्र से उन्होंने लेखन का कार्य प्रारंभ किया एवं 16 वर्ष की उम्र में उनकी पहली रचना प्रकाशित हुई। श्री शेखर ने कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर एक महान संत, कवि के साथ लेखक, चित्रकार, दार्शनिक, संगीतकार, समाज सुधारक एवं नाटककार भी थे। उनकी रचनाओं से बंगाल संस्कृति पर विशेष प्रभाव पड़ा।

उनका संगीत आज भी रविंद्र संगीत के नाम से जाना जाता है और बंगाल के घर-घर में रविंद्र संगीत की गूंज आज भी सुनाई देती है। गीतांजलि के लिए रविंद्र नाथ टैगोर ने पहली बार नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर भारत का मान बढ़ाया। गुरुदेव का लिखा ‘’एकला चालो रे’’ कविता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन का आदर्श बन गया। बांग्लादेश ने भी गुरुदेव की रचना को अपना राष्ट्रगान घोषित किया। मौके पर अरविंद पांडेय, दयानंद शर्मा, उमाकांत शर्मा, प्रियंका शर्मा सहित विद्यालय के छात्र-छात्रा उपस्थित थे।

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