संस्कृत भाषा की महत्ता पर संगोष्ठी:सबसे अधिक विज्ञान सम्मत भाषा है संस्कृत

इंद्रपुरी4 दिन पहले
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संगोष्ठी के मौके पर महाविद्यालय में मौजूद मुख्य वक्ता, प्राचार्य एवं अन्य। - Dainik Bhaskar
संगोष्ठी के मौके पर महाविद्यालय में मौजूद मुख्य वक्ता, प्राचार्य एवं अन्य।

स्थानीय राधा शांता महाविद्यालय तिलौथू के सभागार में शनिवार को संस्कृत भाषा की महत्ता पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार सिंह व संचालन संस्कृत विभाग के प्रो वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने किया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में रांची विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग की अध्यक्षा प्रो डॉ अर्चना कुमारी दुबे ने संस्कृत विषय की महत्ता पर प्रकाश डाला एवं उसकी व्यापकता के बारे में लोगों को बताया।

प्रो दूबे ने बताया कि संस्कृत विश्व में पाए जाने वाली सभी भाषाओं की जननी तो है ही यह पूरी तरह से सच है की पूरी दुनिया में लगभग तीन हजार भाषाओं में सबसे अधिक विज्ञान सम्मत भाषा संस्कृत है। आज भी विद्वान इसको बखूबी मान रहे हैं कि मात्र यही एक भाषा है। जिसमें किसी भी एक धातु से हजारों शब्द बनाने की क्षमता है।

हिंदी संस्कृत की बेटी है और जो लोग हिंदी बोलते हैं। लगभग आधे से अधिक लगभग 60 प्रतिशत संस्कृत ही बोलते हैं, परंतु इससे अनजान हैं। हिंदी भाषा संस्कृत भाषा से कदापि अलग नहीं है । सत्य है कि कुछ काल खंडो में संस्कृत भाषा को उपेक्षित किया गया है।

संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता काे आधार मान हो रहे कार्य

आज वर्तमान परिवेश में संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता को आधार मानकर ही इस भाषा से संबंधित कंप्यूटर पर अनेक कार्य जारी है। यहां तक कि नासा के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी भाषा में अंतरिक्ष यात्रियों को मैसेज भेजने पर उन भाषाओं के शब्द बदल जाते हैं और अर्थ भी बदल जाते हैं, परंतु संस्कृत ही एक ऐसी भाषा है जिसमें शब्द के बदलने से संस्कृत के वाक्यों का प्रत्येक शब्द अपना अर्थ कभी नहीं छोड़ता। यही कारण है कि विश्व की महत्वपूर्ण रक्षा एजेंसियां एवं गोपनीय एजेंसियां अपनी सुरक्षा कोड को संस्कृत में जनरेट कर रही हैं।

संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अशोक कुमार सिंह, प्रो महेंद्र सिंह, डॉ ए पी सिंह, डॉ प्रदीप कुमार दुबे, डॉ अनिल कुमार सिंह, प्रो राजकिशोर सिंह, प्रो कमलेश्वर सिंह, प्रो महेंद्र गुप्ता, प्रो सुरेंद्र पाठक, प्रो गुलाम हैदर, पुस्तकालय अध्यक्ष मुरली सिंह, प्रधान लिपिक रविंद्र प्रसाद सिंह सहित महाविद्यालय के कई छात्र- छात्राओं ने भाग लिया।

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