औरंगाबाद में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर खुद बनाया स्कूल:सरकार द्वारा वर्षों से नहीं बनाया जा रहा था विद्यालय का भवन, थानाध्यक्ष ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

औरंगाबाद2 महीने पहले
औरंगाबाद में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर खुद बनाया स्कूल

औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद जिले के कई गांव में स्कूलों का उन्नयन तो किया गया। लेकिन उसके लिए भवन नहीं बनाया गया। ऐसे में छात्रों को बैठने के लिए जगह नहीं होने पर कहीं अतिरिक्त कक्ष में तो कहीं रंग मंच जैसे जगहो पर छात्रों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। बताते चलें कि मदनपुर प्रखंड के ग्राम पंचायत पिपरौरा के उचौली टोला बिलासपुर गांव शिक्षा के लिए एक उदाहरण बनकर रह गया है। वर्षों से शासन से स्कूल भवन की मांग कर रहे ग्रामीणों ने थक हार कर अब चंदा इकट्ठा कर स्कूल भवन बनाने का निर्णय लिया है।

बिलासपुर गांव में नवसृजित विद्यालय के उन्नयन के बाद भवन की समस्या थी। जब सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो ग्रामीणों ने इसे अपने स्तर से बनाने की ठान ली। 500 आबादी वाले गांव में ग्रामीणों ने एक लाख का चंदा और श्रमदान कर शेड वाला स्कूल भवन तैयार कर देने की ठानी और भवन का निर्माण कराया। भवन बनने के बाद अब गांव के बच्चे इसमे पढ़ने लगे।

ग्राम पंचायत से भी नहीं ली मदद लेकिन कार्य किया शुभारंभ

विद्यालय की शिक्षाविद समिति के सदस्य राधेश्याम कौशिक ने बताया कि इसके लिए ना तो ग्राम पंचायत से मदद ली गई और नहीं सरकार से। अपने दम पर ग्रामीणों ने भवन बनाने का निर्णय लिया। जिसका शुभारंभ घर में ग्रामीणों के द्वारा कराया गया। ग्रामीणों के द्वारा बने इस स्कूल भवन में पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक 56 छात्र हैं।

मदनपुर के पूर्व एवं ओबरा के वर्तमान थाना अध्यक्ष ने बढ़ाया मदद का हाथ

ग्रामीणों के द्वारा चंदा इकट्ठा कर भवन निर्माण करने का बेड़ा उठाया और कार्य शुरू किया। जब इसकी बात मदनपुर के पूर्व एवं ओबरा के वर्तमान थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी को पता चला तो उन्होंने अपना सहयोग देने को कहा। उन्होंने अगले दिन ही दो ट्रैक्टर ईंट और अल्बेस्टर शेड ग्रामीणों को दिया। थानाध्यक्ष की मदद से ग्रामीणों में काफी खुशी एवं प्रसन्नतायें दिखी।

थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी ने बताया कि मैं जहां भी रहता हूँ, वहां मैं अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए क्षेत्र में शिक्षा पर जोर जरूर देता हूं। वैसे छात्र छात्राओं को सहयोग करता हूं जो आर्थिक रूप से कमजोर है और कहीं से कोई मदद नहीं मिलता है।

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