त्योहार:ज्येष्ठ में जल की पूजा की है विशेष परंपरा

बांकाएक महीने पहले
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  • 30 मई काे शनि जयंती और वट सावित्री पूजा एक साथ मनाएंगे श्रद्धालु

ज्येष्ठ महीना 17 मई से शुरू हो चुका है, जो 14 जून तक जारी रहेगा। इस महीने गर्मी का मौसम अपने चरम पर रहता है। इसलिए ज्येष्ठ मास में जल की पूजा करने की विशेष परंपरा है। साथ ही पानी बचाने की कोशिश की जाती है। प्राचीन समय में ऋषियों ने पानी से जुड़े दो बड़े व्रत और त्योहार की व्यवस्था भी इसी महीने में की है। इसके अलावा ऋषियों ने पर्यावरण का ध्यान रखते हुए और भी व्रत व त्योहार बताए हैं, जिनमें पेड़-पौधों की पूजा की जाती है। इस बार तिथियों की घट-बढ़ के कारण ये महीना 29 दिनों का ही रहेगा। ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी या अचला एकादशी भी कहा जाता है। अपरा एकादशी के दिन तुलसी, चंदन, कपूर, गंगाजल सहित भगवान विष्णु की पूजा की जानी चाहिए। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। ग्रंथों के अनुसार इस दिन शनि देव का जन्म हुआ था। शनि जयंती पर व्रत और शनि पूजा करने से कुंडली में शनि दोष खत्म हो जाते हैं। इसके अलावा हर तरह की परेशानियां इस व्रत से दूर होती है। 30 मई को ये पर्व मनाया जाएगा। जबकि ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि में वट सावित्री व्रत भी मनाया जाता है।

9 जून काे गंगा दशहरा पर किए जाएंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान
गंगा दशहरा एक प्रमुख त्योहार है। ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की दशमी को ये व्रत किया जाना है। इस दिन गंगा स्नान और विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन दान का भी महत्व है। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से निजात मिलता है। 9 जून को ये व्रत होगा। इस महीने की पूर्णिमा का व्रत और दान करने से सौभाग्य प्राप्त होता है। इस पूर्णिमा पर व्रत करने से संतान सुख भी मिलता है। इस बार ये पर्व 14 जून को मनाया जाएगा। इसे वट पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भी सत्यवान और सावित्री की पूजा की जाती है और बरगद की पूजा की जाती है।

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