पत्रकार हत्याकांड:शराब व बालू माफिया के खिलाफ खबरें चलाने के कारण निशाने पर था सुभाष

बखरीएक महीने पहले
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हत्याकांड को लेकर घटनास्थल पर जुटी भीड़, विलाप करते परिजन। - Dainik Bhaskar
हत्याकांड को लेकर घटनास्थल पर जुटी भीड़, विलाप करते परिजन।

शुक्रवार की रात 9 बजे पत्रकार सुभाष कुमार की हत्या के बाद 1 बजे के करीब उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया। शनिवार की सुबह सुभाष कुमार के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान पूरे दिन सुभाष के घर पर विभिन्न दल के नेताओं के आने का सिलसिला जारी रहा। इस घटना से जहां जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश है वहीं एसपी योगेन्द्र कुमार ने भरोसा दिलाया है कि 24 घंटे के अंदर बदमाशों को गिरफ्तार कर स्पीडी ट्रायल चला कर सजा दिलायी जाएगी।

हत्याकांड में शामिल चार युवकों को पहचानने की बात बताई।
सुभाष के चचेरे भाई ने कहा कि हत्याकांड में शामिल चार युवकों को मैं पहचान लूंगा। सभी अपराधी लफंगा टाइप के युवक हैं। इनमें से दो सहोदर भाई खगड़िया जिला अंतर्गत गंगौर ओपी क्षेत्र के छोटी शकरपुरा गांव का निवासी है। जो उसी गांव के कई हत्याकांड में आरोपित शातिर अपराधी का सगा संबंधी और शागिर्द भी है। एक बेला सिमरी गांव के निजी विद्यालय के शिक्षक का पुत्र है।

जबकि इन सबों को पनाह देकर अपने यहां अड्डेबाजी करवाने वाला ननिहाल में रह रहा एक स्थानीय सांखु गांव का युवक शामिल है। युवक ने यहां तक बताया कि छोटी शकरपुरा के अपराधी युवक का सांखु गांव के ही एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है। जिस कारण वह यहां बराबर अड्डेबाजी करता है। जिसका विरोध सुभाष हमेशा किया करता था।

भगवान एते अनर्थ किए कैर देलहो दुशमनमा बुढ़ापा के लाठी छीन लेलकय
बतातें चलें कि सुभाष अपने मां बाप का इकलौता चिराग था, जिसे अपराधियों ने समय से पहले बुझा डाला।सीधे साधे पिता अर्जुन महतो छोटे मोटे किसान हैं, मां आशा बहु है। बड़ी बहन की शादी हो रखी है। जबकि छोटी बहन कुंवारी है। उसने बिलखते हुए बताया कि भैया को हमलोग गलत का विरोध करने से मना करते थे। लेकिन उन्हें बर्दाश्त नही होता था। शव के घर पहुंचते ही सुभाष की मां बच्ची देवी अपना सुध बुध खो बैठी।

वह दहार मारते हुए बेटे के शव से लिपट गयी और एक ही बात कही जा रही थी दुश्मनवा हमर बुढापा के लाठी छीन लेलकय, हमर घोर के इकलौता चीराग बुइझ गेलय।वहीं बहन पल्लवी व मौसम भाई का हाथ पकड़कर रोते हुए कह रही थी अब केकरा राखी बांधवैय हो भैया।भगवान एत्ते अनर्थ किये कैर देलहो। लोगों का मानना है कि पत्रकारिता की राह पर असमाजिक तत्वों का विरोध दिवंगत पत्रकार सुभाष को मंहगा पड़ा।

बढ़ती लोकप्रियता से बढ़ गए थे दुश्मन
पत्रकारिता करते हुए गांव में बढ़ती लोकप्रियता के कारण सुभाष ने दुश्मनों की संख्या बढ़ा ली थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते पंचायत चुनाव में उसने अपने गृह वार्ड से दूसरे वार्ड के अपने समर्थक महिला प्रत्याशी को चुनाव में खड़ाकर जीत दिलाने में सफल रहा। जिसके बाद तमाम अवरोधों के बावजूद वह अपने वार्ड का वार्ड सचिव बनने में सफल रहा। जिस कारण वह राजनीतिक विरोधियों को खटकने लगा।

पूर्व नियोजित योजना के तहत की गई सुभाष की हत्या
सुभाष के जिगरी दोस्त नवीन की शादी थी। आम महुआ ब्याहने का दौर चल रहा था। जिसमें परिवार की महिलाएं डांस कर रही थी। बिन बुलाए मेहमान बनकर सांखु और दूसरे गांव के आठ नौ युवक पूरी प्लानिंग के साथ डांस कर रही महिलाओं के झुण्ड में घुस गए। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। सुभाष के साथ साथ स्थानीय युवकों की उन बदमाशों से नोकझोंक हुई। किन्तु उन लोगों का टार्गेट सुभाष था। इस झड़प के काफी देर बाद भोज खाकर लौटने के दौरान सुभाष के घर के समीप ही बदमाशों ने उसे रोक लिया तथा डांस के दौरान सुभाष पर चश्मा छीन लेने का आरोप लगाते हुए।

पहले उससे उलझ गया। उसके चचेरे भाई द्वारा बीच बचाव किया गया, किन्तु वे लोग नहीं माने। उन्हीं में से एक युवक ने पिस्तौल निकालकर सुभाष को टार्गेट कर फायर झोंक दिया। संयोगवश पहली गोली नहीं लगी। जान पर खतरा बनता देख सुभाष भागने लगा। किन्तु सभी युवकों ने मिलकर उसे खदेड़कर पकड़ लिया। जिसके बाद कनपटी को निशाना बनाकर फायर झोंक दिया, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। इस दौरान भागते समय सभी युवक लोगों को दिग्भ्रमित करने के उद्देश्य से आपस में ही पकड़ो पकड़ो का शोर मचाते हुए भाग खड़े हुए।

शादी में उपयोग हुआ वीडियो कैमरा से अपराधी को पहचानने में मिल सकती है मदद

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शादी में उपयोग किए गए वीडियो कैमरे को खंगालने से पुलिस को हत्याकांड से जुड़े अपराधी युवकों को पहचानने में मदद मिल सकती है। फिर उन युवकों से पूछताछ कर बिन बुलाए शादी में आने का उद्देश्य व हत्याकांड से जुड़ी गुत्थी को सुलझाने में मदद मिल सकती है।

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