सुधा डेयरी में आयोजित कार्यक्रम:ब्रिड डेवलपमेंट पर काम ही नहीं हुआ वरना आज पशुपालक होते उन्नत

बरौनी8 दिन पहले
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बरौनी- संयंत्र का उद्घाटन करते केंद्रीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री। - Dainik Bhaskar
बरौनी- संयंत्र का उद्घाटन करते केंद्रीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री।

आजादी के बाद हमने अपने पशुओं के ब्रिड डेवलपमेंट का कोई विजन ही नहीं रखा वरना आज हमारे देश के पशुपालक काफी उन्नत एवं आर्थिक रूप से सबल होते। ये बातें शनिवार को बरौनी सुधा डेयरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री सह बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह ने कही। श्री सिंह ने कहा कि वे नेहरू के प्रति दुर्भावना नहीं रखते लेकिन उन्हें यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि आजादी के बाद कृषि क्षेत्र में तो कार्य हुआ लेकिन हमने लाइव स्टॉक पर कोई काम नहीं किया।

हमारे यहां की गाय ले जाकर ब्राजील ने उसके नस्ल को उन्नत कर 50 से 60 लीटर दूध देने के लायक उसे तैयार कर लिया लेकिन हमने अपने पशुओं के ब्रीड को उन्नत करने के लिए कोई विजन ही नहीं रखा। लेकिन अब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 में गोकुल मिशन की शुरुआत की गई है। जिसके बाद गायों के नस्ल विकास के लिए लगातार सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है।

सेक्सड सीमेन के लिए देश में 31 लैब तैयार किया गया है। जिसमें दो लैब बिहार में लगाए गए हैं। अब पशुपालक अपनी इच्छा के अनुसार अपनी गायों से उन्नत नस्ल के सिर्फ बछिया ही प्राप्त कर रहे हैं। श्री सिंह ने बताया कि उनका राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष मिनेश शाह बातचीत हुई है। कम से कम 1000 लीटर प्रतिदिन दुग्ध संग्रह करने वाले बरौनी सुधा डेयरी के सोसायटी को ग्रांट लोन की शर्त पर मिल्क बल्क कूलर उपलब्ध करवाया जाएगा। इतना ही नहीं इस वर्ष के अंत तक किसानों को अब मात्र ₹250 में स्वदेशी सेक्स सीमेन उपलब्ध हो पाएगा।

बीज प्रसंस्करण संयंत्र, साइलेज निर्माण, सैलरी प्रसंस्करण एवं जैविक खाद संयंत्र का उद्घाटन

इसके पूर्व बरौनी सुधा डेयरी में तकरीबन 3 करोड़ की लागत से लगाए गए बीज प्रसंस्करण संयंत्र, साइलेज निर्माण संयंत्र, सैलरी प्रसंस्करण एवं जैविक खाद संयंत्र के अलावा एकीकृत डेयरी फार्मिंग का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह एवं उपमुख्यमंत्री सह पशुपालन मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने संयुक्त रूप से किया। अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि बरौनी सुधा डेयरी में जो फिजा बनी है, वह सभी डेयरी के लिए मार्गप्रदर्शक है।

निश्चित ही इसमें यहां के सांसद सह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का मार्गदर्शन बहुमूल्य है। लेकिन बिहार के कोने-कोने तक यह पहुंचे इसके लिए विभाग के अधिकारियों को कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषक व पशुपालकों की समस्या के प्रति सरकार है। पशुपालन, मत्स्य पालन एवं मुर्गी पालन हो अगर केसीसी ऋण मिलने में किसी भी तरह की दिक्कत हुई तो दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

हर गांव काे डेयरी से जाेड़ने का हाे प्रयास
एमएलसी सर्वेश कुमार ने कहा कि अगर बिहार में 60 हजार करोड़ का अनाज उत्पादन होता है, तो 40 हजार करोड़ का दुग्ध उत्पादन होता है। यदि वास्तव में पशुपालकों का विकास चाहिए तो यह खोजना होगा कि अगर 2600 गांव में समितियां हैं तो वह कौन गांव है जहां समितियां नहीं है। आखिर शेष किसान किस कारण से अब तक डेयरी से नहीं जुड़े हैं।

ये लाेग थे माैजूद
मौके पर आईओसीएल के निदेशक आरके झा, बिहार सरकार के कृषि सह पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव डॉ एन. सरवन, कंफेड एमडी शिखा श्रीवास्तव, विधायक राम रतन सिंह, कुंदन कुमार, सुरेंद्र मेहता, सूर्यवंशी महतों, बरौनी सुधा डेयरी के एमडी सुनील रंजन मिश्रा, सहायक महाप्रबंधक मो हमीद, सांसद प्रतिनिधि अमरेंद्र अमर कांग्रेसी नेता संजय सिंह के अलावे बरौनी डेयरी से जुड़े किसान व अन्य लोग मौजूद थे।

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