शिक्षक प्रतिनियोजन का बड़ा खेल:डीईओ का हस्ताक्षर स्कैन कर दो शिक्षकों को कार्यालय में ही कर दिया प्रतिनियोजित

बेगूसराय15 दिन पहले
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जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय। - Dainik Bhaskar
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय।

जिले में शिक्षक प्रतिनियोजन का खेल बड़े लेवल पर लगातार जारी है। प्रतिनियोजन करा कर मौज उड़ाने की प्रवृत्ति के कारण शिक्षक यह काम कराने में जालसाजों पर अच्छी खासी रकम भी लुटाते हैं। पैरवी और पैसा के बल पर प्रतिनियोजन का खेल जिले में लगातार जारी है। एक नए मामले में बलिया अनुमंडल के दो शिक्षकों का प्रतिनियोजन तीन महीने पहले डीईओ कार्यालय में हुआ। प्रतिनियोजन आदेश पर डीईओ का हस्ताक्षर था, लेकिन डीईओ को यह पता ही नहीं था कि दो शिक्षकों का प्रतिनियोजन शिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय में हुआ है क्योंकि उक्त कागजात पर जालसाजों ने डीईओ के हस्ताक्षर का स्केन कर डाल दिया था।

मिली जानकारी के अनुसार विभाग के कर्मियों की मिलीभगत से 30 हजार रुपए के एवज में उक्त जालसाजी को अंजाम दिया गया। डीईओ के हस्ताक्षर का स्कैन इतनी सफाई से की गई थी कि उक्त फर्जी प्रतिनियोजन के आदेश को बीईओ और एचएम भी सही मान बैठे। और दोनों शिक्षकों का वेतन तीन महीने से बिना काम किए ही जारी होता रहा। मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रतिनियोजन रद्द करने के डीईओ के आदेश के बाद प्रतिनियोजित शिक्षकों की सूची मांगी गई तो यह मामले का पता चला।

मामला बलिया और डंडारी प्रखंड का
मामला बलिया और डंडारी प्रखंड का है। जहां प्राथमिक विद्यालय बेला की शिक्षिका नीलम प्रभा और उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंचरुखी के रामविलास दास को डीईओ कार्यालय में प्रतिनियुक्त कर दिया गया। जानकारी के अनुसार इस प्रतिनियोजन के एवज में दोनों शिक्षकों से 30-30 हजार रुपया बतौर नजराना लिया गया।

बलिया प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बेला की पंचायत शिक्षिका नीलम प्रभा को ज्ञापन 1379 से 8 मार्च 2022 को पत्र जारी कर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में 7 अप्रैल 2022 तक के लिए प्रति नियोजित कर दिया। वहीं डंडारी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंचरुखी के प्रखंड शिक्षक के रामविलास दास को ज्ञापांक 1385, 23 मार्च 2022 को पत्र जारी कर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में प्रतिनियोजित का पत्र थमा दिया।

तीन माह तक किया मौज,उठाते रहे वेतन
दोनों शिक्षक को बिना कोई काम किए तीन महीने से वेतन भी मिलता रहा। उनके मूल विद्यालय के प्रधानाध्यापक को पता था कि उनका प्रतिनियोजन जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में है। जबकि जिला शिक्षा अधीक्षक ने ऐसा कोई आदेश ही जब नहीं निकाला था तो प्रतिनियोजित शिक्षकों की कोई खोज भी नहीं हो रही थी। हालांकि उनकी उपस्थिति की फर्जी रिपोर्ट लगातार डीडीओ को जाता रहा। जिस कारण उन दोनों का वेतन भी मिलता रहा।

ऐसे हुआ प्रतिनियोजन का खेल
जालसाजों ने पहले डीईओ शर्मिला के द्वारा किसी दूसरे शिक्षक के सही प्रतिनियोजन का पत्र उपलब्ध किया। इसके बाद उसी पत्र के तहत दूसरा पत्र स्कैन कर उसपर शिक्षक का नाम बदल दिया। साथ ही सही पत्र से डीईओ के हस्ताक्षर को स्कैन कर लिया। जिसके बाद नए पत्रांक दिनांक देकर प्रतिनियोजन को लेकर एक नया पत्र ही जारी कर दिया। जिसे बाद में विद्यालय के एचएम और बीईओ को भीे भेज दिया गया।

बताया जाता है कि इसी मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी शर्मिला राय ने मामले का पता चलने पर शिक्षकों को बुलाया। पहले तो फर्जी प्रतिनियोजन की बात सामने आई। इसके बाद जब आरोप लगने लगा तो इस प्रतिनियोजन में उनके नाम पर रुपए की लेन देने का बात भी बताई गई। मामले का खुलासा हुआ और डीईओ कार्यालय में इसकी सुनवाई हुई तो कई राज सामने आए।

शिक्षिका नीलम प्रभा ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को बताया की मोटी रकम एक शिक्षक को दिया था। जिसके बाद उन्होंने प्रतिनियोजन से संबंधित पत्र मुझे उपलब्ध कराया। हालांकि शिक्षक का नाम नहीं बोली। वहीं प्रखंड शिक्षक रामविलास दास ने बलिया प्रखंड में सहायक लेखापाल के पद पर कार्यरत विनोद कुमार को 30 हजार देने की बात बताई। साथ ही कहा कि इसके बदले उन्होंने ही मुझे प्रतिनियोजन से संबंधित पत्र दिया है।

जांच हुई तो और मामले आएंगे सामने

जिले में प्रतिनियोजन का खेल काफी अर्से से होता रहा है। मटिहानी के एक शिक्षक एसडीओ कार्यालय में प्रतिनियोजित है। चुनाव कार्य के बहाने से उनका सालों भर प्रतिनियोजन एसडीओ कार्यालय में रहता है। इंटर की परीक्षा के दौरान बिना किसी ज़रुरत के कॉलेजिएट स्कूल में कार्यालय कार्य के नाम पर 18 शिक्षकों का प्रतिनियोजन कर दिया गया था। दबी जुबान में कार्यालय कर्मी ही कह रहे हैं कि अगर प्रतिनियोजन की जांच हुई तो ऐसे कई और प्रतिनियोजन मिल सकते हैं।

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