बगहा में ऑपरेशन बाघ:15 दिन बाद भी वन विभाग की पकड़ से दूर आदमखोर; बुधवार को फिर हाथियों की मदद से शुरू होगा रेस्क्यू ऑपरेशन

बगहा (वाल्मीकिनगर)2 महीने पहले

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में 15 दिन बाद भी आदमखोर बाघ वन विभाग की पकड़ से दूर है। बाघ को पकड़ने के लिए 4 हाथियों पर बैठकर टीम जंगल के अंदर उतर चुकी है। ये टीम बाघ का पीछा कर रही है। बाघ लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। इसके चलते रेस्क्यू में परेशानी हो रही है। 80 लोगों की टीम 5 टुकड़ियों में बाघ की तलाश में लगी हुई है। इस टीम के साथ दैनिक भास्कर के संवाददाता भी जंगल में मौजूद हैं।

इससे पहले एक भैंस को पेड़ से बांधकर बाघ का इंतजार किया गया। एक्सपर्ट ट्रेंकुलाइज शूटर की टीम पेड़ पर मचान बनाकर बैठी रही, लेकिन बाघ चकमा देकर निकल गया।

ये बाघ 9 महीने में 6 लोगों को शिकार बना चुका है। इसमें से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बार बाघ को पकड़ने के लिए 4 हाथियों को लाया गया है।

बाघ बार-बार अपना ठिकाना बदल रहा है। स्थानीय स्तर पर पिछले 7 दिनों से रेस्क्यू अभियान तेज किया गया था। हालांकि अब तक बाघ का रेस्क्यू नहीं हो सका है। अब पटना से एक्सपर्ट्स की टीम वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पहुंची है। आज एक बार फिर बाघ को पकड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

बाघ को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे इसे लेकर हर स्तर पर तैयारी की गई है। टीम में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पीके गुप्ता के नेतृत्व में वेटनरी चिकित्सक समरेंद्र कुमार, ट्रेंक्यूलाइज एक्सपर्ट शूटर शफाअत अली और इकोलॉजी डायरेक्टर सुरेंद्र सिंह भी शामिल हैं।

बाघ के लिए शिकार बांधकर उसका इंतजार किया जा रहा है।
बाघ के लिए शिकार बांधकर उसका इंतजार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर के एक्सपोर्ट ट्रेंकुलाइज शूटर भी पहुंचे
टाइगर को जल्द से जल्द रेस्क्यू कर लिया जाए, इसके लिए टीम में ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट शफाअत अली को शामिल किया गया है। शफाअत अली कठिन परिस्थिति में अब तक वन्यजीवों को ट्रेंकुलाइज करते आए हैं। वो छोटे जानवर से लेकर बड़े खतरनाक जानवरों तक को ट्रेंकुलाइज कर चुके हैं। इनके साथ ही पटना चिड़ियाघर के बाघ एक्सपर्ट भी शामिल है।

बाघ के हमले में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है।
बाघ के हमले में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है।

बाघ को रिझाने के लिए दिया जा रहा है लालच
बाघ को सामने लाने के लिए जंगल के किनारे एक छोटा भैंसा, बकरी रखा गया है। ताकि बाघ किसी तरह खाने के लालच में पहुंचे। हालांकि कल शाम 6 बजे तक बाघ बाहर नहीं आया था।

भागो...भागो बाघ को होश आ रहा है....:बगहा में सामने था आदमखोर, ट्रेंकुलाइज किया, 40 मिनट तक ढूंढा; 5 मिनट बाद होश आने वाला था

बगहा के आसपास के गांवों में पिछले 9 महीने से आदमखोर बाघ की दहशत है। 9 महीने में 6 लोगों को शिकार बना चुका है। इनमें से 5 की मौत भी हो चुकी है। बुधवार को इस आदमखोर को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पूरी फौज मैदान में उतार दी। 60 फॉरेस्ट गार्ड, 5 वैन, 4 बड़े जाल, 2 ट्रेंकुलाइज गन, 2 ट्रैक्टर, 40 सीसीटीवी और एक ड्रोन की मदद ली गई।

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पत्नी के सामने जबड़े में दबाकर ले गया बाघ, मौत:बगहा में बेटी और बहू चिल्लाते रहे, गन्ने के खेत में छोड़कर भागा

बगहा में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में सोहनी कर रहे एक किसान(65) को आदमखोर बाघ ने मौत के घाट उतार दिया। किसान अपनी पत्नी, बेटी और बहू के साथ खेत में काम कर रहा था, तभी बाघ ने उसपर हमला कर दिया। किसान के परिवार के सामने ही बाघ उसे जबड़े में दबाकर घसीटते हुए गन्ने के खेत में लेकर चला गया। थोड़ी देर बाद गांव के लोग इकट्‌ठा हुए तो सभी गन्ने के खेत में गए। वहां किसान की लाश पड़ी थी।

मामला बैरिया काला गांव के बैरिया के पास सरेह का है। बुधवार को बैरिया कला गांव निवासी रामप्रसाद उरांव अपने परिवार के साथ खेत में सोहनी कर रहा थे। इसी दौरान आदमखोर बाघ किसान पर हमला कर दिया। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

शव को वन विभाग के लोगों ने कब्जे में ले लिया है। घटना के बाद से ग्रामीण दहशत में हैं। बीते 12 सितंबर को भी बैरिया कला गांव के पास बाघ के हमले में एक महिला की मौत हो गई थी। इसके बाद आक्रोशित किसानों ने शव लेकर प्रदर्शन भी किया था। जिसे वन विभाग के अधिकारी को लोगों का भारी आक्रोश झेलना पड़ा था। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिए...

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