नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जरूरी, इसलिए वापस कर रहे 'घोटाले' की रकम:बेतिया में 9 पार्षदों ने लौटाए 8.21 लाख, कहा था - नकली साइन कर निकाल लिए

बेतिया3 महीने पहले

बेतिया जिला के चनपटिया नगर पंचायत के बहुचर्चित कफन घोटाला (कबीर अंत्येष्टि) की राशि वापस होने लगी है। बता दें कि चनपटिया के 14 वार्ड पार्षदों में से 9 पार्षदों ने चुनाव लड़ने के लिए 8.21 लाख रुपए लौटा दिए हैं। कारण कि उन्हें नाम निर्दोष प्रपत्र के साथ नो-ड्यूज प्रमाण पत्र भी देना था। यह प्रावधान है। इसीलिए 2 साल बाद आखिरकार उन्हें राशि लौटाने पड़ी। बता दें कि नगर पंचायत के 14 वार्डों में 14.53 लाख रूपए गबन कर लिए गए थे।

कार्यपालक पदाधिकारी वसंत कुमार ने बताया कि जो वार्ड पार्षद राशि वापस कर रहे हैं। उन्हें ही नो-ड्यूज दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक 14 में 9 पार्षदों ने राशि वापस कर दी है, जिसे नगर पंचायत के कबीर अंत्येष्टि के खाते में जमा कर दिया है।

नगर पंचायत के 15 वार्डों में से 14 वार्ड पार्षदों ने कबीर अंत्येष्टि मद की 14.53 की राशि को अग्रिम के तौर पर लेकर उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया था।
नगर पंचायत के 15 वार्डों में से 14 वार्ड पार्षदों ने कबीर अंत्येष्टि मद की 14.53 की राशि को अग्रिम के तौर पर लेकर उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया था।

पार्षदों को अग्रिम भी दी जाती है राशि, जमा करना होता है वाउचर

जानकारी हो कि नगर पंचायत की ओर से गरीब परिवार में किसी के निधन होने पर दाह संस्कार के लिए कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत मृतक के परिजनों को कफन एवं अंतिम संस्कार के लिए 3000 रूपए दिए जाने का प्रावधान है। यह राशि वार्ड पार्षद को अग्रिम भेज भी दी जाती है। उसका वाउचर जमा करना होता है। नगर पंचायत के 15 वार्डों में से 14 वार्ड पार्षदों ने कबीर अंत्येष्टि मद की 14.53 की राशि को अग्रिम के तौर पर लेकर उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया था।

इस मामले का खुलासा 2 साल पहले नगर पंचायत के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी शिवांशु शिवेश ने किया था। उस समय नगर पंचायत ने पत्र जारी कर 14 वार्ड पार्षदों से राशि वापस करने का निर्देश भी दिया था।

घोटाला उजागर करने वाले तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी शिवांशु शिवेश।
घोटाला उजागर करने वाले तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी शिवांशु शिवेश।

बोर्ड ने 2020 में कार्रवाई का किया था प्रस्ताव पारित
12 सितंबर 2020 को नगर पंचायत के बोर्ड की बैठक कर सदन में इस मामले की जांच कर दोषी के विरूद्ध कार्रवाई करने का प्रस्ताव भी लाया गया था। उस समय सभी वार्ड पार्षदों का कहना था कि उनका जाली हस्ताक्षर कर रुपए की निकासी कर ली गई है। दूसरी तरफ कार्यपालक पदाधिकारी शिवांशु शिवेश ने मामले की जांच कर कार्रवाई की बात कही थी।

अब सवाल यह उठता है कि जब पार्षदों ने राशि नहीं ली और उनके गलत हस्ताक्षर से ही राशि निकाली गई तो आज उन्हें चुनाव लड़ने के दौरान नो-ड्यूज लेने से पहले उक्त राशि को जमा क्यों करना पड़ा? यह बड़ा सवाल है, जिसका जवाब देने से अब सभी पार्षद कतरा रहे हैं।

जिन पार्षदों पर था गबन का आरोप, वो हैं
वार्ड संख्या-1 के पार्षद उपदेश प्रसाद पर 1.5 लाख,

वार्ड संख्या-2 की पार्षद सह निवर्तमान अध्यक्ष किरण देवी पर 87 हजार,

वार्ड संख्या-3 के पार्षद चंद्रमोहन प्रसाद पर 99 हजार,

वार्ड संख्या-4 की पार्षद पूनम देवी पर 92 हजार,

वार्ड संख्या-5 की पार्षद एवं नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष विमला देवी पर 1.29 लाख,

वार्ड संख्या-6 की पार्षद सुशीला देवी पर 1.96 लाख,

वार्ड संख्या-7 की पार्षद गीता देवी पर 1.51 लाख,

वार्ड संख्या-8 की नीलम देवी पर 1.29 लाख,

वार्ड संख्या-9 की पार्षद गुलनयारा खातून पर 67 हजार,

वार्ड संख्या-10 की पार्षद सजरूल नेशा पर 84 हजार,

वार्ड संख्या-11 की पार्षद मीरा देवी पर 81 हजार,

वार्ड संख्या-12 के पार्षद माधव प्रसाद पर 80 हजार,

वार्ड संख्या-13 के पार्षद मनोहर प्रसाद पर 1.26 लाख और

वार्ड संख्या-14 की पार्षद चंदा कुमारी पर 54 हजार बकाया था।