30 मई को सोमवती अमावस्या:30 वर्षों बाद सोमवती अमावस्या व शनि जयंती का बन रहा शुभ एवं दुर्लभ संयोग

बेतियाएक महीने पहले
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  • व्रत और पूजन से पुण्य की प्राप्ति होती है

30 वर्षों बाद सोमवती अमावस्या व शनि जयंती का शुभ एवं दुर्लभ मुहूर्त संयोग इस बार 30 मई को बन रहा है। इन 30 वर्षों में पहली बार ऐसा हो रहा है कि शनि जयंती पर शनि महाराज अपनी राशि कुंभ राशि में रहेंगे। इसी दिन कृष्ण पक्षीय उत्तरात्य वट सावित्री अमावस्या यानी बरगद अमावस्या भी है। आचार्य राधाकांत शास्त्री ने बताया कि ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार वृषभ राशि में चल रहे बुध का भी इस दिन उदय होगा। इस पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। इन शुभ योग के बीच पवित्र नदी में स्नान, दान व पितरों के निमित्त पूजा करने का विधान है। बताया कि शास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व बताया गया है। उसमें भी खास कर सोमवार को लगने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन व्रत,पूजन व पितरों को जलदान एवं त्रिपिंडी से पुण्य की प्राप्ति होती है

सुहागिनों के लिए सोमवती अमावस्या व्रत का खास महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा व व्रत करने से सुहाग की आयु लंबी होती है तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन में स्नेह व सद्भाव बढ़ाने के लिए भी सुहागिनों को अमावस्या व्रत व पूजन करना चाहिए।महाभारत काल में गंगा पुत्र भीष्म ने राजा युधिष्ठिर को सोमवती अमावस्या का महत्व बताते हुए कहा था कि इस दिन पुण्य सलिला नदियों में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप कट जाते हैं तथा उसे सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिल जाती है।

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