बेतिया के युवक ने बनाया साइकिल जैसा चलने वाला ट्रैक्टर:1 घंटे में जोतता है 3 कट्ठा जमीन, डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों को देखकर बनाया

गोलू शुक्ला|बेतिया6 महीने पहले
गोवा के पणजी में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में अपना ट्रैक्टर लेकर शामिल हो चुके हैं संजीत।

डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों को देखकर बेतिया के युवक ने एक ऐसा मिनी ट्रैक्टर डिजाइन किया है, जो साइकिल की तरह चलाया जा सकता है। इस मिनी ट्रैक्टर से खेत जोता जा सकता है। 28 वर्ष का यह युवक नौतन प्रखंड के धुसवा गांव के किसान रामकुमार शर्मा का पुत्र संजीत रंजन है।

बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद घर का खर्च चलाने के लिए संजीत ने अपने दरवाजे पर ही गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था। स्वच्छ भारत अभियान से प्रभावित होकर उसने इस तरह का ट्रैक्टर बनाने का निर्णय लिया। 20 हजार रूपए इकठ्ठा कर कबाड़ से चार पुराने पहिए खरीदे। पुरानी साइकिल की हैंडल, पैडल और बाइक की चेन खरीदी। फिर वेल्डिंग का काम करने वाले अपने मित्र की मदद से ट्रैक्टर की तरह बॉडी बनाकर इन सभी को उसमें फिट कर दिया।

इसमें खेत की जुताई करने के लिए पीछे हल भी जोड़ा है।
इसमें खेत की जुताई करने के लिए पीछे हल भी जोड़ा है।

संजीत ने बताया कि जिस तरह पैडल चलाकर साइकिल चलाई जाती है, ठीक उसी तरह इसे चलाने की व्यवस्था की है। इसमें खेत की जुताई करने के लिए पीछे हल भी जोड़ा है। इस ट्रैक्टर से एक घंटे में तीन कठ्ठे भूमि की जुताई हो सकती है। यह ट्रैक्टर 500 किलो वजन की ढुलाई भी कर सकता है।

अपने परिवार के साथ संजीत।
अपने परिवार के साथ संजीत।

गोवा के फेस्टिवल में अपना ट्रैक्टर प्रदर्शित कर चुका है संजीत
संजीत ने बताया कि ट्यूशन से होने वाली कमाई से रूपए बचाकर 15 दिनों में इस ट्रैक्टर का निर्माण किया है। पिछले साल 10 दिसंबर को गोवा के पणजी में लगे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में ट्रैक्टर लेकर शामिल भी हुआ था।

संजीत अपने ट्रैक्टर के लिए मदद की आस में है।
संजीत अपने ट्रैक्टर के लिए मदद की आस में है।

वहां सभी लोगों ने उसकी सराहना की थी। लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिल सकी है। संजीव ने बताया कि मदद के लिए उसने अधिकारियों से लेकर कई मंत्रियों से भी संपर्क किया, लेकिन अभी तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है।

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