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मायागंज में नहीं मिला ऑक्सीजन हंगामा फिर जेल:पिता व दो चाचा की मौत के बाद दादा-दादी भी भर्ती हंगामे के आरोप में उतरी पहने दो युवक को भेजा जेल

अमरपुर/बांका4 दिन पहले
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अब कौन देखतई हो बाबू... दादा की बिगड़ती हालत के बीच संक्रमित दादी से गले लिपटकर बिलखता पोता। - Dainik Bhaskar
अब कौन देखतई हो बाबू... दादा की बिगड़ती हालत के बीच संक्रमित दादी से गले लिपटकर बिलखता पोता।
  • ये दर्द की इंतहा है... एक सप्ताह में तीन बेटों की कोरोना से मौत के बाद बुजुर्ग दंपती भी मिले संक्रमित
  • मायागंज प्रबंधन ने सरकारी काम में बाधा डालने व तोड़फोड़ का लगाया आरोप, डॉक्टरों ने मांगी सुरक्षा

एक सप्ताह में कोरोना से तीन बेटों को खोने वाले बुजुर्ग पति-पत्नी भी संक्रमित मिले। दोनों मायागंज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे है। इधर अस्पताल प्रबंधन की कुव्यवस्था पर जब बुजुर्ग दंपत्ति के पोते ने सवाल उठाया तो उसे सरकारी काम में बाधा डालने और तोड़फोड़ के आरोप में जेल भेज दिया गया। कोरोना से पूरे परिवार को बिखड़ने की ये दास्ता अमरपुर के बल्लिकित्ता गांव निवासी शशिधर कापरी के परिवार की है। शशिधर और उनकी पत्नी की सोमवार को सांस लेने में दिक्कत होने पर अमरपुर अस्पताल लाया गया था, जहां से उन्हें मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया गया। कहने का तो मायागंज इस इलाके का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन यहां कोरोना मरीजों को क्या सुविधा क्या मिल रही है, उसे शशिधर कापरी के पोते ने वीडियो बनाकर बतााया। बुजुर्ग के साथ अस्पताल पहुंचे अक्षय और छोटू का एक वीडियो वायरल हो रहा है कि जिमसें वो दादा के लिए ऑक्सीजन की मांग करते दिख रहे हैं। अॉक्सीजन नहीं मिलने पर ये दोनों रोते-बिलखते सिस्टम को गाली भी देते दिखते है। साथ ही वहां रखी कुर्सी को पटकते दिखते हैं। जब ये हंगामा हो रहा था तभी अस्पताल प्रबंधन ने बरारी थाना की पुलिस बुलाकर दोनों को गिरफ्तार करा दिया। जानकारी हो कि शशिधर कापरी के पुत्र निकुंज कापरी की दिल्ली में काेराेना से माैत हाे गयी थी, उन्हें अाग देने के लिए बड़े पुत्र प्रमाेद कापरी भी बाद में संक्रमित मिले थे। उनकी मायागंज में ही रविवार काे माैत हाे गयी थी। जबकि सबसे छोटे पुत्र प्रभाष कापरी कुछ ही दिनों पूर्व देवघर से लौटे थे, और पॉजिटिव हो गये थे, जिनकी मौत बल्लिकित्ता में ही हो गयी थी। अब माता-पिता मायागंज में जिंदगी और माैत से लड़ाई लड़ रहे है। जिन्हें बचाने की जद्दोजहद में पोता अक्षय और छोटू गले में पिता की उतरी लिए जेल भेजा जा चुका है। गांव में इस परिवार में केवल महिलाएं है। कोरोना के डर से स्थानीय लोग शशिधर के परिवार से दूरी बनाए हैँ। अब ऐसी स्थिति में उनका इलाज और बेटों का श्राद्ध कैसे होगा ये कोई नहीं जानता।

पीजी डाॅक्टराें ने कहा-परिजनाें ने की हाथापाई
पीजी डॉक्टर ने प्रभारी अधीक्षक काे बताया कि साेमवार रात बांका के अमरपुर के बल्लीकित्ता गांव के मरीज के परिजनाें ने डॉ. राहुल कुमार भारती और डॉ. रंजन कुमार के साथ हाथापाई और गाली गलौज की। कैजुलिटी के सामानों को तोड़ दिया। अगर इस तरह की घटना नहीं रुकी ताे वे कार्य बहिष्कार कर देंगे। इधर, मंगलवार सुबह स्वास्थ्य प्रबंधकों ने अधीक्षक को काम राेकने की चेतावनी दी। इसके बाद अधीक्षक ने दोपहर में सभी मैनेजरों को बुलाया। मैनेजरों ने कहा कि यहां बुनियादी कमी के कारण हंगामा होता है। यहां उचित संख्या में ट्रॉली मैन, फ्लो मीटर के साथ बी टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करनी हाेगी।

सात दिन में तीन बेटों को खोने के बाद मायागंज में खुद जिंदगी और मौत की जंग लड़ते शशिधर
सात दिन में तीन बेटों को खोने के बाद मायागंज में खुद जिंदगी और मौत की जंग लड़ते शशिधर

नाराज डॉक्टर व कर्मियों ने दी हड़ताल की धमकी

भागलपुर| परिजनाें के हंगामा और ताेड़फाेड़ के बाद अब आईसीयू, आइसोलेशन वार्ड व इमरजेंसी के बाहर रायफलधारी सुरक्षाकर्मी की तैनाती की जाएगी। डॉक्टरों, हेल्थ मैनेजरों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की मांग पर हॉस्पिटल प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है। घटना से खफा पीजी डाॅक्टराें व हेल्थ मैनेजरों के हड़ताल पर जाने के अल्टीमेटम के बाद प्रभारी अधीक्षक डॉ. पंकज कुमार ने उन्हें यह भराेसा दिलाया। उन्हाेंने स्वास्थ्य कर्मियों को हड़ताल पर नहीं जाने का अनुरोध किया। कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा देने के लिए उन्हाेंने डीएम व एसएसपी से अनुरोध किया है। मामले में बरारी थानाध्यक्ष नवनीश कुमार ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से मिले हंगामे की सूचना पर दोनों युवकों को जेल भेजा गया।

डॉक्टर, नर्स और कंट्रोल रूम में जाकर लगाई ऑक्सीजन की गुहार, पर नहीं मिली

गिरफ्तार भाइयों ने बताया कि एक मई को उनके पिता प्रमोद कापरी की अमरपुर अस्पताल में मौत हो गई थी। इससे पहले 30 अप्रैल को चाचा निकुंज बिहारी दिल्ली में इलाज के दौरान चल बसे थे। अब दादा शशिधर कापरी की हालत खराब है। इलाज को मायागंज अस्पताल में भर्ती कराए, जहां कोरोना संक्रमित बेड पर बिना साफ-सफाई के इलाज शुरू किया गया। अॉक्सीजन की जरूरत पड़ी तो रेगुलेटर खराब रहने के कारण समय पर दादा को नहीं मिल सका, इस कारण उनकी हालत और बिगड़ गई। डॉक्टर, नर्स, कंट्रोल रूम में जाकर ऑक्सीजन लगाने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। यह देख रहा नहीं गया तो हंगामा की।

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