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मौसम:312 मिमी बारिश व 41 किमी प्रतिघंटे की हवा ने मक्का की फसल को पहुंचाई भारी क्षति

अररिया8 दिन पहले
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मंगलवार को डोरियारे गांव में मकई की बर्बाद फसल को दिखाते किसान। - Dainik Bhaskar
मंगलवार को डोरियारे गांव में मकई की बर्बाद फसल को दिखाते किसान।
  • 12 घंटे तक होती रही रुक-रुककर बारिश, कहीं फसल क्षति तो कहीं घरों के उड़े छप्पर, 5 दिन तक ऐसे हालात की संभावना

सोमवार देर रात को 312 मिलीमीटर बारिश व 41 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवा ने किसानों को एक बार फिर मुसीबत में डाल दिया है। लगातार 12 घंटे तक तेज हवा व बारिश से किसानों के खेत में लगी मक्का का फसल टूटकर गिर गई। जिसके कारण जिले के सैकड़ों एकड़ में लगी मकई के नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। बीते सप्ताह तेज ओलावृष्टि आंधी तूफान से किसानों के खेत में लगे मक्का व गेंहू की फसल को काफी नुकसान हुआ था। फिर दोबारा तेज रफ्तार की हवा व बारिश के कारण जिले के किसान हलकान हो गए हैं। मूंग की फसल को भी नुकसान होने की आशंका है। जिला संख्याकी पदाधिकारी किशोर कृष्ण ने बताया कि सोमवार की रात 312 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। खासकर रात 10 बजे से लेकर 12 बजे तक हवा इतनी तेज थी कि मक्का के पौधों को खेत में ही सुला दिया। तेज रफ्तार की हवा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के कई हिस्सों में फूस का घर भी धराशायी हो गया है। मक्का के पौधे नष्ट होने के कारण किसानों के चेहरे पर एक बार फिर मायूसी छा गई है।

गेहं और पटसन को छोड़ मकई पर निर्भर हो रहे सीमांचल के किसान
सीमांचल के किसान बीते एक दशक में पाट की खेती छोड़कर मक्का की खेती करने लगे हैं। किसान मक्के की फसल को सुखा फसल मानते हैं और इस फसल से किसानों को बड़ी उम्मीदें होती है। मक्का कटने के बाद एकमुश्त राशि हाथ में आएगा और उस राशि से बेटी की शादी, बच्चे की स्कूल फीस के लिए मोटी रकम की व्यवस्था या अन्य कोई बड़ा प्लान कर रखते हैं।लेकिन मौसम की मार ने इस वर्ष बारिश के शुरुआती दिनों में ही किसानों को मायूस कर दिया है। आगामी 5 दिनों में भी मौसम इसी प्रकार रहने की संभावना है इस बात को जानकर किसान और ज्यादा विचलित हो रहे हैं।

मौसम विभाग ने 5 दिनों तक तेज बारिश व आंधी की जताई संभावना
कृषि विज्ञान केन्द्र के मौसम वैज्ञानिक प्रभात कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 5 दिनों तक तेज रफ्तार की हवा व बारिश होने की पूर्वानुमान लगाया गया है।जिससे किसानों को काफी नुकसान होने की संभावना है।उन्होंने बताया कि जो मक्का के पौधे तेज रफ्तार की हवा में टूट जाती है वह तो बर्बाद हो जाएगा। लेकिन किसान खेत में खड़े मक्के की पौधों को बचा सकते हैं। इसके लिए किसानों खेत पानी जमा नहीं हो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपील किया है।उन्होंने मूंग की खेती करने वाले किसानों को भी खेत से बराबर पानी निकासी करने की सलाह दी है।

33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर ही मुआवजा देने का प्रावधान
फसल नुकसान के मामले में पूछे जाने पर जिला कृषि पदाधिकारी संत लाल प्रसाद साह ने बताया कि रात में तेज रफ्तार की हवा व बारिश से किसानों को हुए नुकसान की आकलन कराने के लिए सभी बीएओ को निर्देश दिया गया है। जल्द ही जिले भर के कृषि समन्वयक व किसान सलाहकार फसल नुकसान की आकलन रिपोर्ट सौंप देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक आपदा में किसी भी प्रखंड क्षेत्र में 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने पर ही किसानों को फसल मुवावजा देने का प्रावधान है।भरगामा प्रखंड क्षेत्र के खुटहा बैजनाथपुर के बड़े किसान हरिमोहन झा ने बताया कि रात की बारिश व तेज रफ्तार की हवा ने किसानों की कमर तोड़ दी है।

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