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अररिया:लोगों के काम आना ही असल जिंदगी प्लाजमा डोनेट करने पर हुई सराहना

अररियाएक महीने पहले
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कोरोना काल में लोगों के आपसी रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। संकट के इस दौर में कई लोग ऐसे हैं एक दूसरे को उबारने में बेहद मददगार साबित हुए हैं। लोग आपसी रिश्ता, बिना किसी पूर्व जान-पहचान व परिचय के भी एक दूसरे की मदद के लिये आगे आए। ऐसा ही एक शख्स हैं गोपाल कुमार चौधरी।

उन्होंने कोरोना संक्रमण से जूझ रहे एक मरीज को बिना किसी पूर्व पहचान के अपना प्लाज्मा दान कर उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गोपाल अबतक जिले के पहले व एकमात्र प्लाज्मा दाता हैं। गोपाल बताते हैं कि वे बीते अगस्त माह में अपने कामकाज के दौरान वे संक्रमण की चपेट में आ गये थे। उनके साथ उनके कई सहकर्मी भी संक्रमित हुए थे।

संक्रमण की पुष्टि होने के उन्हें बेहद घबराहट हुई। वे बेहद निराश भी हुए। चिकित्सकों ने उन्हें होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी। पूरे 14 दिनों तक वे होम आइसोलेशन में रहे। इस दौरान नियमित खान-पान पौष्टिक आहार का सेवन, इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने वाले पेय व नियमित योगाभ्यास पर पूरी तरह फोकस किया। ताकि किसी तरह का नकारात्मक विचार उनके मन में अपनी जगह नहीं बना सके। अंतत: कोरोना ने हार मान ली। गोपाल पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने काम में जुट गये हैं।
नहीं जानते थे कि किसे देना है प्लाज्मा
बकौल गोपाल सितंबर के शुरुआती सप्ताह में वे ऑफिस में अपने कार्यों में व्यस्त थे। इस दौरान उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। इसमें किसी गंभीर रूप बीमार व्यक्ति को रोग से बचाव के लिये प्लाज्मा के जरूरत होने की बात बतायी गयी। लेकिन इसे जीवन में एक अवसर मानते हुए उन्होंने प्लाज्मा डोनेट करने का निर्णय लिया।

प्लाज्मा किसे देना है। इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। ये पता था कि इसके लिये उन्हें पटना स्थित एम्स जाना होगा। गोपाल कहते हैं कि मेरे साथ ऑफिस के कई अन्य लोग भी संक्रमित हुए थे। लेकिन कॉल सिर्फ उन्हें आया था। लिहाजा उन्होंने इसे एक अवसर मानते हुए पटना जाकर प्लाज्मा दान करने का निर्णय लिया।

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