खुशी / कनेक्टिविटी उड़ान के लिए फारबिसगंज एयरपोर्ट का चयन, हवाई सफर होगा सरल

Forbisganj Airport selected for connectivity flight, air travel will be simple
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Forbisganj Airport selected for connectivity flight, air travel will be simple

  • हवाई अड्डा शुरू होने पर सीमांचल सहित नेपाल के लोगों को होगा आवागमन में सुविधा
  • वर्तमान समय में हवाई यात्रा के लिए 250 किमी. की यात्रा कर बागडोगरा जाना पड़ता है

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 05:00 AM IST

अररिया. द्वितीय विश्व युद्ध और 1962 भारत-चीन युद्ध के गवाह रहा फारबिसगंज का हवाई अड्डा शुरू होने की कवायद से सीमाई क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह हवाई अड्‌डा जिर्णोदद्धार के लिए 55 वर्षों से बाट जोह रहा है। समाजिक कार्यकर्ता दक्षिणेश्वर प्रसाद राय पप्पू ने कहा कि फारबिसगंज और जोगबनी में हवाई अड्‌डा शुरू होने से काठमांडू सहित विभिन्न स्थानों पर जाना आसान होगा।  इस एयरपोर्ट के शुरू होने से फारबिसगंज से नेपाल के राजधानी काठमांडू, जनकपुर, पोखरा के अलावा पटना, दरभंगा, लखनऊ, दिल्ली आदि स्थानों पर जाना भी सरल हो जाएगा।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बिहार के चुनिंदा जिलों से एयरपोर्ट व वहां से कनेक्टिविटी उड़ान सेवा शुरू करने की दिशा में अपना काम शुरु कर दिया है। श्री पप्पू ने बताया कि पीएम नरेन्द्र मोदी का सपना है की एक आम आदमी हवाई चप्पल पहनकर हवाई यात्रा करे और उस दिशा में यह हकीकत उनके सपने को सरजमीं पर लाकर हर एक आम आदमी के कद को बड़ा करने में अतुलनीय भूमिका निभाएगी।

वर्तमान समय मे वायुयान से यात्रा करने के लिए 250 किमी. की यात्रा कर बागडोगरा जाना पड़ता है। ज्ञात हो कि अररिया लोकसभा के सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने फारबिसगंज के लंबित पड़े हवाई अड्डा का मामला विगत कुछ महीने पूर्व सदन में उठाया था। उन्होंने कहा कि फारबिसगंज स्थित इस हवाई अड्डा का बाउंड्री किया हुआ है। अगर इसको चालू कर दिया जाता है ताे पूरे सीमांचल के लोगों के साथ-साथ नेपाल के लोगों को सुविधा मिलेगी। 

द्वितीय विश्वयुद्ध में हुआ हवाईपट्टी का निर्माण 
वरिष्ठ अधिवक्ता व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय ठाकुर कहते हैं कि इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल 1934 से लेकर 1942 तक द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भी किया गया था। 1962 में भारत-चीन के बीच जारी युद्ध के दौरान देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सैनिक इस्तेमाल के लिए भागलपुर सेंट्रल जेल के कैदियों द्वारा इस अर्द्धनिर्मित सैनिक हवाइपट्टी का निर्माण कराया था। यह हवाई पट्टी 1973 को सुर्खियां में आया था। 10 जून 1973 को नेपाल से शाही विमान का अपहरण कर इसी हवाईपट्टी पर उतार कर 37 लाख रुपए लूट लिए गए थे।

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