त्यौहार:भैया दूज पर किसी ने बजरी कूटकर खिलाया तो कहीं पान से लिया निमंत्रण

अररिया /सिकटीएक महीने पहले
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एक बुजुर्ग बहन अपने भाई से आशीर्वाद लेती - Dainik Bhaskar
एक बुजुर्ग बहन अपने भाई से आशीर्वाद लेती
  • छोटे बच्चों में दिखा उत्साह, बुजुर्ग भाई-बहन में भी दिखा आपसी प्रेम

भाई-बहन के प्यार का प्रतीक भैया दूज का पर्व शनिवार को जिलेभर में उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान भाइयों के माथे पर बहनों ने टीका लगाते हुए भाइयों की सलामती दीर्घायु की दुआ मांगी। वहीं सुबह से ही सिकटी प्रखंड के विभिन्न चौक चौराहे पर दुकानों पर मिठाई की दुकान लग गयी थी। भाई दूज के अवसर पर भाइयों ने भी अपनी बहनों को स्नेह स्वरूप उपहार दिए। पंडित हरिकांत झा ने बताया कि हिंदू धर्म में भाई दूज का विशेष महत्व है। पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली के त्योहार का समापन भाई दूज के दिन होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाई दूज या भैया दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। रक्षाबंधन की तरह यह त्योहार भी भाई-बहन के प्रति एक-दूसरे के स्नेह को दर्शाता है। इस दिन भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से दोपहर 3 बजकर 21 मिनट तक था।

क्या है भाइ दूज पर्व की मान्यताएं
भाई दूज के दिन भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल लगाती हैं, उसके ऊपर सिंदूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए कहती हैं जैसे ‘गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े।इस दिन शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है।

भाई दूज को यम द्वितीया नाम से भी जाना जाता है
पंडित हरिकांत झा ने बताया कि भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा की जाती है। भाई दूज पर बहनें भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं। भाई दूज के दिन बहनें भाई को तिलक करके उनके उज्जवल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं।

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