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रमज़ान:अलविदा की नमाज़ अदा कर लोगों ने मांगी कोरोना से हिफाजत की दुआ

अररियाएक महीने पहले
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  • मस्जिदों में कोरोना गाइडलाइन का हुआ पालन, घरों में पढ़ी नमाज़

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के नियमों को ध्यान में रखकर अलविदा की नमाज़ को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पूरा किया। नमाज़ की समाप्ति के बाद पूरी इंसानियत के हिफाजत की खुदा से दुआ मांगी। इस्लामिक स्कॉलर मौलाना हिमायूं इकबाल ने बताया कि रमज़ान महीने के आखरी जुमा को अलविदा कहते हैं। उन्होंने कहा कि अलविदा का खास महत्व और दर्जा है। इस नमाज़ को दुनिया भर के मुसलमान पूरी अकीदत से पढ़ते हैं। ये जुमा अन्‍य जुमा के मुकाबले इसलिए खास है क्‍योंकि यह रमजान के महीने का आखिरी जुमा यानी शुक्रवार है और इस साल के बाद रमजान में कोई और जुमा नहीं पड़ेगा। वहीं अलविदा का मतलब रमजान के पाक महीने का समाप्‍त होना यानी इसकी विदाई है। यही वजह है कि इसे अलविदा कहते हैं और इसकी नमाज भी काफी अहम मानी जाती है। इस्लाम में अलविदा को सबसे अफजल करार दिया गया है। रमज़ान का आखिरी जुमा कई मायनों में ख़ास है। एक तो इसके आने का मतलब यह है कि ईद आने ही वाली है। यानी ईद के चांद से पहले का यह आखिरी जुमा है। मौलाना हिमायूं इकबाल ने बताया कि इस बार कोरोना की बढ़ती महामारी को लेकर मस्जिदों में भिड़ नहीं जुटी। रोजेदारों ने घर पर ही नमाज़ अदा किया। आज पूरी कौम अल्लाहताला से दुआ कर रही है कि कोरोना का संकट पूरी दुनिया से खत्म हो और खुदा इंसानियत की हिफाजत फरमाए।

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