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कार्यक्रम:कुपोषित बच्चों के लिए वरदान साबित होगा ‘संवर्धन’

अररिया4 दिन पहले
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  • लगभग 90 फीसद अति गंभीर कुपोषित बच्चे समुदाय आधारित देखभाल से हो सकते हैं स्वस्थ
  • संवर्धन कार्यक्रम के लिए राज्य के 5 महत्वाकांक्षी जिलों में शामिल है अररिया

कोरोना महामारी ने लोगों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। एक तरफ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में चुनौतियां बढ़ी तो दूसरी तरफ़ कोरोना के कारण गरीब तपके के लोगों की आर्थिक स्थिति भी खराब हुयी। जिसके कारण गरीब परिवारों में बच्चों को पौष्टिक आहार खिलाना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी। एक अनुमान के अनुसार कोविड के कारण कुपोषण लगभग 15 फीसद बढ़ने की आशंका जताई गयी है। इन विपरीत परिस्थितियों में अति गंभीर कुपोषित बच्चों की बेहतर देखभाल की जरूरत बढ़ी है जिसे अब ‘संवर्धन’ कार्यक्रम के तहत सुधारने की पहल की जा रही है। राज्य के 5 महत्वाकांक्षी जिलों में इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है, जिसमें अररिया भी शामिल है।

कुपोषित बच्चों को संस्था आधारित देखभाल की होती है जरूरत
पोषण अभियान की नोडल पदाधिकारी श्वेता सहाय ने कहा कि अति गंभीर कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के लिए उन्हें पोषण पुनर्वास केन्द्रों (एनआरसी) में भेजा जाता है, लेकिन एक अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि केवल 10-15 फीसद ही अति-गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भेजने की जरूरत है। वहीं, लगभग 90 फीसद बच्चे समुदाय आधारित देखभाल से ही स्वस्थ हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए संवर्धन कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है, जिसमें अति गंभीर कुपोषित बच्चों को समुदाय आधारित देखभाल प्रदान की जाएगी।

अति गंभीर कुपोषित बच्चों में मृत्यु की संभावना अधिक
यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ रवि नारायण परही ने कहा कि भारत ने एसडीजी (सतत विकास लक्ष्यों) के तहत 2025 तक वेस्टिंग में 5 फीसद तक लाने की प्रतिबद्धता जाहिर की है। वर्तमान में में वेस्टिंग 22.9% है।

विभाग के साथ गैर-सरकारी संस्था के सहयोग से हासिल होगा लक्ष्य
संवर्धन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आईसीडीएस एवं स्वास्थ्य विभाग मिलकर कार्य करेंगे। स अति गंभीर कुपोषित बच्चों का पंजीकरण और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना एवं एनआरसी से छुटे बच्चों को समुदाय आधारित देखभाल से जोड़ने का कार्य करेगी।

कार्यक्रम के 10 चरण साबित होगा संजीवनी | संवर्धन कार्यक्रम को कुल 10 चरणों में संपादित किया जाएगा, जिसमें सामुदायिक मोबिलाईजेशन एवं सभी बच्चों की पोषण स्थिति का आंकलन, चिकित्सीय जांच, भूख की जांच, अति गंभीर कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के तरीके, दवाइयां, पोषण, पोषण-स्वास्थ्य शिक्षा, संवर्धन कार्यक्रम के दौरान पोषण की निगरानी, संवर्धन कार्यक्रम से छुट्टी देने के बाद फालाेअप शामिल है।

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