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सख्ती:बिना अनुमति व पूर्व सूचना के गायब रहने वाले चिकित्सकों पर होगी कड़ी कार्रवाई

अररिया7 दिन पहले
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  • सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता ने जारी किया आदेश, खुद फारबिसगंज से करते हैं आना-जाना

जिले के सरकारी अस्पतालों में बिना अनुमति और बिना पूर्व सूचना के गायब रहने वाले चिकित्सकों की मनमानी पर लगाम लगाने की कवायद शुरू हो गई है। सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। हालांकि यह पत्र स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्र में सिविल सर्जन ने कहा है कि बिना अनुमति के कर्तव्य स्थल अथवा मुख्यालय से अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सक पर कार्रवाई होगी। पत्र में सिविल सर्जन ने अधोहस्ताक्षरी को बिना ससमय सूचना दिये बिना अनुपस्थित रहने वालों को कड़ी चेतावनी दी है और इसे कर्तव्यहीनता, लापरवाही तथा संवेदनहीनता का द्योतक करार दिया है। संस्थान के अंतर्गत कार्यरत चिकित्सकों को अधोहस्ताक्षरी के पूर्वानुमति के बिना कर्तव्य स्थल या अनुपस्थित नहीं रहने का आदेश निर्गत किया गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि यदि निरीक्षण या पर्यवेक्षण के क्रम में कोई भी चिकित्सक पूर्वानुमति के बिना अनुपस्थित पाये जाते हैं तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कड़ते हुए उनके विरुद्ध अग्रतर कार्रवाई भी की जायेगी। सिविल सर्जन का यह पत्र सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक, उपाधीक्षक अनुमंडलीय अस्पताल, फारबिसगंज और जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दी गयी है। जबकि पत्र की प्रतिलिपि पूर्णिया क्षेत्रीय अपर निदेशक,स्वास्थ्य सेवाएं और अररिया जिला पदाधिकारी को भी दी गयी है। पत्र को लेकर स्वास्थ्य विभाग सहित सिविल सर्जन स्वयं कठघरे में हैं। सिविल सर्जन डॉ. एमपी गुप्ता जहां स्वयं फारबिसगंज स्थित अपने आवास सह क्लिनिक से प्रतिदिन आते हैं। वहीं अधिकांश चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी स्थायी रूप से रहकर योगदान नहीं दे रहे हैं। अधिकांश चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी दूसरे शहरों से आकर ड्यूटी करने की महज औपचारिकता पूरी करते हैं और बिना सूचना के गायब रहना तो स्वास्थ्य विभाग में शगल बना हुआ है। एसीएमओ डॉ रंजेश कुमार पूर्णिया, डॉ बिमल कुमार बहादुरगंज से तो डॉ राजेश कुमार टू पूर्णिया से, डॉ नवनीत कुमार मधेपुरा, डॉ कर्ण मधेपुरा से अररिया पहुंचकर ड्यूटी की औपचारिकता निभाते हैं। कहा जाता है ये सभी चिकित्सक अपने-अपने इलाके में निजी प्रैक्टिस को फोकस करते हैं। चिकित्सक ही नहीं सिविल सर्जन कार्यालय और सदर अस्पताल में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी भी लोकल में नहीं रहकर दूसरे शहरों से आकर ड्यूटी बजाते हैं। ऐसे स्वस्थ्य कर्मियों में नवकान्त कुमार पूर्णिया, अनिल शर्मा पूर्णिया, फार्मासिस्ट अमरकांत फारबिसगंज, फैमिली प्लानिंग काउंसलर अविनाश कुमार फारबिसगंज, राकेश कुमार फारबिसगंज से आकर ड्यूटी करने का काम वर्षों से कर रहे हैं। इतना ही नहीं फारबिसगंज अनुमंडल अस्पताल और दूसरे पीएचसी में भी कई चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी दूसरे शहर से पहुंचकर ड्यूटी बजाने का काम करते हैं। ऐसे में सिविल सर्जन का यह पत्र वर्तमान परीपेक्ष्य में हास्यास्पद लगता है।लेकिन देखना भविष्य में दिलचस्प होगा कि सिविल सर्जन की ओर से जारी किए गये पत्र का सिविल सर्जन के साथ अन्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कितना असर डालता है।

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