पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जिला स्थापना दिवस आज:1969 से शुरू हो गया था संघर्ष, 31 साल बाद मिली थी सफलता, हर वर्ग के लोगों का मिला था सहयोग

अररिया2 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • 14 जनवरी 1990 को अररिया को मिला था जिले का दर्जा
  • जिला स्थापना दिवस आज, नहीं होगा कोई कार्यक्रम

अररिया के लोगों ने जिले का दर्जा के लम्बी लड़ाई लड़ी थी। मैला आंचल की धरती को पूर्णिया से अलग करने के लिए 1969 से ही लोगों ने संघर्ष शुरू कर दिया था। साहित्यकारों की धरती अररिया का लंबा इतिहास रहा है।

लम्बी लड़ाई और खूब संघर्ष के बाद आखिरकार 14 जनवरी 1990 को सफलता हाथ लगी। 1990 के दशक में नगरपालिका चेयरमेन रहे और वरिष्ठ अधिवक्ता हंसराज प्रसाद कहते रहे हैं कि उनके संयोजकत्व में ही जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन हुआ था। संघर्ष समिति ने कई तरहो के आंदोलन किये और इसमें हर वर्ग और हर शख्स का साथ मिला था। रेडक्रॉस के पूर्व सचिव हंसराज प्रसाद बता चुके हैं कि उस आंदोलन की खासियत यह थी कि इसमें सभी दलों के जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के प्रातिनिधि, पत्रकार जगत के लोग, अधिवक्ता, चिकित्सक, बुद्धिजीवी समेत तमाम लोग एक मंच पर थे। सभी के मन में बस एक ही सोच थी कि अररिया को कैसे जिला का दर्जा दिलाया जाये।

32वें साल में जिले को प्रवेश होने पर हंसराज प्रसाद खुशी जताते हुए कहते हैं कि जिला विकास की ओर अग्रसर है। इस बार उन्हें एक दुःख यह है कि इस बार स्थापना दिवस में तीन वैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति इस दुनिया में नहीं रहे। जिन्होंने जिला बनाने के आंदोलन में पूरा सहयोग दिया था।दिवंगत सांसद मनो तस्लीमुद्दीन, वरिष्ठ पत्रकार डॉ प्रो अशोक कुमार झा, डॉ नवल किशोर दास व गौरीशंकर सिंह यादव ने संघर्ष समिति में अमूल्य योगदान दिया था। हंसराज प्रसाद बता चुके हैं कि जिला का दर्जा दिलाने में साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु, पूर्व केंद्रीय मंत्री डूमर लाल बैठा, पूर्व सांसद हलीमउद्दीन अहमद, पूर्व मंत्री सरयू मिश्र, अजीमुद्दीन , मो मोइदुर्रह्मान, सत्यनारायण यादव, शीतल गुप्ता, पूर्व विधायक श्रीदेव झा, डॉ आजम, बुन्देल पासवान, मो यासीन, अनिल कुमार बोस, वासिकुररहमान, रुद्रानंद मण्डल, रामेश्वर यादव, लालचंद सहनी, पंडित रामाधार द्विवेदी, रघुनाथ राय, रत्न लाल गोयल, शम्स जमाल, मो नसीर, नेमचंद जैन की अहम भूमिका रही थी। उन्होंने कहा कि आंदोलन के वक्त कितने बसें जलाई गयी थी और कितने बार चक्का जाम हुआ था और लोग जेल भी गये थे। दिवंगत लोगों को याद करते हुए हंसराज जी बताते हैं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व तस्लीमुद्दीन, वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी नायक, मो ताहा, पत्रकार स्व एनके दास, स्व प्रो अशोक झा, समाजसेवी वीरेंद्र नाथ शरण, गौरीशंकर यादव, आदि का भी सराहनीय योगदान रहा था।हालांकि हंसराज प्रसाद कुछ दिनों से बीमार हैं बावजूद उनके मन मे जिला स्थापना दिवस को लेकर खासा उत्साह है।

31 साल का हो गया अररिया, स्थायी बस पड़ाव अब तक मयस्सर नहीं
अररिया। अररिया को जिला का दर्जा मिले 31 साल बीत गए और 32वें में प्रवेश भी कर गया मगर आज भी जिला मुख्यालय में यात्रियों को लिए ना तो स्थायी बस स्टैंड बन पाया है और न ही ऑटो स्टैंड। हालत ये है कि गाड़ियों को बीच सड़क पर लगाने के कारण शहर के चांदनी चौक आदि जगहों पर दिन भर जाम की समस्या बनी रहती है । पटना से आने वाले यात्रियों को सुबह तीन बजे बीच रास्ते मे उतरना पड़ता है। जहां न तो यात्री शेड की व्यवस्था है और न ही शौचालय की। जिस कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

वैसे तो वर्ष 2016-17 में ही नगर परिषद अररिया द्वारा शहर में पांच करोड़ की लागत से खूबसूरत बस स्टैंड का निर्माण किया जाना था, जिसके लिए एनएच 57 फोर लेन सड़क के पास स्थित सिचाई विभाग की तीन एकड़ की जमीन को चिन्हित किया गया था और तत्कालीन डीएम के पहल पर सिचाई विभाग द्वारा स्वीकृति भी प्रदान की गई थी। वही जमीन मिलने से पूर्व ही नगर परिषद के द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट में पांच करोड़ की राशि से बस स्टैंड के निर्माण को शामिल करने का निर्णय लिया गया था। नगर परिषद द्वारा खूबसूरत बस स्टैंड, पार्किंग, ऑटो स्टैंड, यात्री शेड सहित आधुनिक बस स्टैंड निर्माण का भरोसा दिया गया था। मगर 4 वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक स्टैंड का निर्माण अधर में लटका हुआ ही है।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- इस समय ग्रह स्थितियां आपके स्वाभिमान और आत्म बल को बढ़ाने में भरपूर योगदान दे रहे हैं। काम के प्रति समर्पण आपको नई उपलब्धियां हासिल करवाएगा। तथा कर्म और पुरुषार्थ के माध्यम से आप बेहतरीन सफलता...

और पढ़ें

Open Dainik Bhaskar in...

  • Dainik Bhaskar App
  • BrowserBrowser